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प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य समेत 4 के खिलाफ FIR दर्ज, मामला यौन शोषण से जुड़ा
प्रयागराज में कोर्ट के आदेश के बाद अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में केस दर्ज कर लिया गया है. यह मुकदमा झूंसी थाना में दर्ज हुआ है. एफआईआर में अविमुक्तेश्वरानंद के साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात को नामजद किया गया है.
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसने धार्मिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है. कोर्ट के आदेश के कुछ ही घंटों के भीतर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया. यह एफआईआर प्रयागराज के झूंसी थाना में दर्ज की गई है. पुलिस ने देर रात कार्रवाई करते हुए मामले की जांच शुरू कर दी है.
कोर्ट के आदेश के बाद त्वरित कार्रवाई
मामले की शुरुआत तब हुई जब आशुतोष ब्रह्मचारी ने विशेष कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल किया. उन्होंने आरोप लगाया कि दो नाबालिग लड़कों के साथ यौन शोषण हुआ है. कोर्ट ने शनिवार को मामले को गंभीर मानते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. आदेश मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई और उसी रात मुकदमा दर्ज कर लिया गया. एफआईआर (FIR) में अविमुक्तेश्वरानंद के साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी और तीन अज्ञात लोगों को भी नामजद किया गया है. आरोप है कि महाकुंभ 2025 और माघ मेला 2026 के दौरान कई बार नाबालिगों के साथ जबरन यौन शोषण किया गया. विरोध करने पर बच्चों को डराया और धमकाया गया. तहरीर में यह भी कहा गया है कि दोनों लड़कों ने कैमरे के सामने बयान दर्ज कराए और खुद को अविमुक्तेश्वरानंद का शिष्य बताया.
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पहले दी गई थीं शिकायतें
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बताया जा रहा है कि 24 जनवरी को झूंसी थाने में पहली बार तहरीर दी गई थी. इसके बाद 25 जनवरी को पुलिस आयुक्त और 27 जनवरी को माघ मेला के पुलिस अधीक्षक को भी प्रार्थना पत्र दिया गया. जब स्थानीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तब न्यायालय की शरण ली गई. विशेष कोर्ट ने त्वरित सुनवाई करते हुए केस दर्ज करने का स्पष्ट निर्देश दिया.
शंकराचार्य की प्रतिक्रिया
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इस पूरे मामले पर अविमुक्तेश्वरानंद ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि मुकदमा दर्ज होना उचित है, ताकि जांच प्रक्रिया पूरी हो सके. उनका कहना है कि न्यायालय को बिना देरी के निष्पक्ष जांच करानी चाहिए, क्योंकि इस मामले पर कई लोगों की नजर है. उन्होंने आरोप लगाने वाले व्यक्ति पर सवाल उठाते हुए उसे हिस्ट्रीशीटर बताया और कहा कि उन्हें न्यायपालिका और सच्चाई पर पूरा भरोसा है. इससे पहले कोर्ट का आदेश आने से पहले ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यानाथ को निशाने पर लेते हुए धर्मयुद्ध का ऐलान किया था.
पुलिस जांच जारी
झूंसी थाना प्रभारी महेश मिश्रा ने पुष्टि की है कि कोर्ट के आदेश के आधार पर मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की विवेचना जारी है. फिलहाल पुलिस साक्ष्यों और बयानों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है.
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बताते चलें कि यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें धार्मिक पद और नाबालिगों से जुड़े गंभीर आरोप शामिल हैं. कानून के अनुसार पॉक्सो एक्ट के तहत नाबालिगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. अब सबकी नजर जांच प्रक्रिया और न्यायालय की अगली सुनवाई पर टिकी है. आने वाले दिनों में जांच की दिशा और साक्ष्यों के आधार पर स्थिति और स्पष्ट होगी.