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कनाडा चुनाव: ट्रूडो सरकार में किंगमेकर रहे खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह और उनकी पार्टी की करारी हार, मार्क कार्नी बने रहेंगे PM
कनाडा में हुए आम चुनावों में भारत के नजरिए से सबसे बड़ी खबर यह है कि बर्नाबी सेंट्रल सीट से नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी (NDP) नेता जगमीत सिंह हार गए हैं. इस हार को स्वीकार करते हुए जगमीत सिंह ने पार्टी का नेतृत्व छोड़ दिया है.
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कनाडा की राजनीति में कभी किंगमेकर की भूमिका निभाने वाले जगमीत सिंह संसद का चुनाव हार गए हैं और उनकी पार्टी को भी करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह को पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो के भारत विरोधी रुख के लिए जिम्मेदार कारणों में से एक माना जाता है. ट्रूडो अपनी अल्पमत सरकार को सत्ता में बनाए रखने के लिए उन पर निर्भर थे. अब, सिंह व्यक्तिगत रूप से पराजित हो चुके हैं, उनकी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (एनडीपी) अप्रासंगिक हो गई है. पिछले हाउस ऑफ कॉमन्स में एनडीपी को 24 सीटें मिली थीं, जो इस बार घटकर सात रह जाने की उम्मीद है. पार्टी ने चार सीटें जीत ली है और खबर लिखे जाने तक तीन पर आगे चल रही थी.
खालिस्तान समर्थकों को आम चुनाव में झटका
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खालिस्तान समर्थक रुख रखने वाले जगमीत सिंह की पार्टी, NDP ने सभी 343 सीटों पर चुनाव लड़ा था. पर पार्टी केवल 7 सीटों पर आगे चल रही है. 2021 के चुनाव में 24 सीटें जीतकर NDP चौथे नंबर पर थी. वहीं इस बार 12 सीटों के नीचे रह गई है और इस वजह से उसने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खो दिया है. इस नतीजे ने कनाडा में खालिस्तान समर्थकों को बड़ा झटका लगा है. क्योंकि NDP के नेता जगमीत सिंह को खालिस्तानी समर्थक और बारे विरोधी के रूप में पहचाना जाता है.
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जगमीत सिंह का बयान
खालिस्तान समर्थक जगमीत सिंह ने अपने समर्थकों से कहा कि मुझे निराशा है कि हम और सीटें नहीं जीत पाए, लेकिन मैं अपने आंदोलन से निराश नहीं हूं." उन्होंने कहा कि जैसे ही नया नेता चुना जाएगा, वे पार्टी का नेतृत्व छोड़ देंगे. ब्रिटिश कोलंबिया के बर्नबी सेंट्रल निर्वाचन क्षेत्र में तीसरे स्थान पर आए, लिबरल पार्टी के विजेता और कंजर्वेटिव पार्टी के उम्मीदवार से पीछे.
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पेशे से वकील, सिंह 2017 में एनडीपी के नेता बने और 2019 में संसद के लिए चुने गए. उन्होंने सरकार में शामिल हुए बिना ट्रूडो को अपनी पार्टी का समर्थन दे दिया. पूर्व पीएम की लिबरल पार्टी के पास तब बहुमत नहीं था. पिछले साल उन्होंने घोषणा की थी कि उनकी पार्टी ट्रूडो से अपना समर्थन वापस ले रही है. इसके बाद ट्रूडो ने इस वर्ष इस्तीफा दे दिया, क्योंकि एनडीपी के बिना विश्वास मत का सामना करना उनके लिए संभव नहीं था.
क्या है एनडीपी के नुकसान की वजह?
वर्ष की शुरुआत में, कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन के सर्वे में एनडीपी को 17.4 प्रतिशत समर्थन प्राप्त हुआ था. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कनाडा के खिलाफ टैरिफ युद्ध और उसे अपने में मिलाने की धमकियां एनडीपी के नुकसान की बड़ी वजह बनी. कनाडा की जनता ने देश के लिए सबसे अच्छी सुरक्षा के रूप में संकटग्रस्त लिबरल पार्टी का समर्थन किया. वहीं चुनाव की पूर्वसंध्या पर एनडीपी का समर्थन आधा होकर 8.1 प्रतिशत रह गया. पिछले साल, सिंह ने ट्रूडो से भारत पर प्रतिबंध लगाने की अपील की थी. उन्होंने खालिस्तानियों पर हमलों के पीछे भारत का हाथ होने का आरोप लगाया और भारतीय राजनयिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. ट्रूडो ने छह भारतीय राजनयिकों को निष्कासित करके उनकी बात पर जैसे अमल किया.
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अर्श से फ़र्श पर पहुँचा NDP!
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15 साल पहले, कनाडा के प्रमुख राजनीतिक दलों का नेतृत्व केवल श्वेत राजनेताओं द्वारा किया गया था. लेकिन यह 2017 में इसमें बड़ा बदलाव बदल गया, जब जगमीत सिंह एक प्रमुख संघीय पार्टी का नेतृत्व करने वाले पहले अश्वेत व्यक्ति बन गए, जिन्होंने पहले मतदान में एनडीपी नेतृत्व को जीत लिया. सालों तक, अपनी थोड़ी लेकिन अहम सीटों की बदौलत जगमीत सिंह ने कनाडा के संसद में संतुलन की भूमिका निभाई थी, पूर्व लिबरल प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो की अल्पमत सरकार को आगे बढ़ाया. हालांकि 2024 में, उन्होंने ट्रूडो सरकार से समर्थन खींच लिया. जगमीत सिंह ने उस समय ट्रूडो पर कॉर्पोरेट हितों के आगे झुकने और आम कनाडाई लोगों को विफल करने का आरोप लगाते हुए कहा, "लिबरल बहुत कमजोर हैं."
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