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"गोलियां चल रही थी, पीछे मुड़ने की हिम्मत नहीं थी, भगवान का नाम लेकर आगे बढ़ते रहे" चश्मदीदों ने बताई दिल दहला देने वाली कहानी
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत और 20 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। सेना की वर्दी में आए आतंकियों ने पर्यटकों से धर्म पूछकर उन्हें गोली मारी। चश्मदीदों ने बताया कि लोग जान बचाने के लिए पहाड़ियों से कूदे और जंगलों में भागे। ये हमला कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करता है।
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महाराष्ट्र के नागपुर शहर से पहलगाम घूमने आई पर्यटक तिलक रूप चंदानी ने बताया कि "हमने घोड़े बुक किए थे. गाइड ने सात टूरिस्ट स्पॉट घुमाए. लेकिन जैसे ही हम मिनी स्विट्जरलैंड से बाहर निकले वैसे ही गोलियों की आवाज सुनाई देने लगी. हम लगातार फायरिंग की आवाज सुन रहे थे. लेकिन गोली चलाते हुए किसी को भी नहीं देखा. लोग एक-दूसरे के ऊपर गिरते कुचलते 4 फुट के इकलौते दरवाजे से जंगल की तरफ भागे." तिलक रूप चंदानी की पत्नी ने बताया कि "वह जान बचाने के लिए पहाड़ी से कूदी. जिसकी वजह से उनका दोनों पैर फ्रैक्चर हो गया. गोलियों की आवाज काफी देर तक सुनाई दी. लेकिन पीछे मुड़ने की हिम्मत किसी में नहीं थी. भीड़ इतनी ज्यादा थी कि किसी को भी अपने को ढूंढने का समय ही नहीं था. 4 से 5 हजार लोगों की संख्या लगातार बढ़ती गई. लोग सिर्फ भगवान का नाम लेकर आगे बढ़ते रहे. अगर हम 2 मिनट भी रुके होते. तो शायद आज यहां नहीं होते."
हिंदू नाम पूछते ही ताबड़तोड़ फायर शुरू कर दिए
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इसके अलावा कई अन्य चश्मदीदों ने बताया कि हमला करने आए आतंकियों ने सबसे पहले नाम पूछा और जैसे ही उन्हें पता चला कि वह हिंदू हैं. ऐसा सुनते ही तुरंत फायरिंग करने लगे. यह पूरी तरीके से धर्म लक्षित हमला है. फिलहाल पुलिस ने इलाके की घेराबंदी शुरू कर दी है. आसपास के ट्रेकों पर आवाजाही को लेकर रोक लगा दी गई है. सभी घायलों का इलाज श्रीनगर अस्पताल में चल रहा है. इस घटना ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों की पोल-खोल कर रख दी है. बता दें कि कश्मीर में पर्यटकों वाला सीजन चल रहा है. लेकिन इस घटना ने कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.