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जम्मू-कश्मीर में बुलडोजर एक्शन से कश्मीरी पंडितों में भयंकर गुस्सा, बोले-"हमारा सहारा ही छीन लिया"
जम्मू विकास प्राधिकरण द्वारा घाटी से विस्थापित कश्मीरी पंडितों की कई दुकानों पर बुलडोजर गरजा है। यह कश्मीरी पंडित बीते दो-तीन दशकों से छोटा-मोटा कारोबार कर अपनी आजीविका चला रहे थे। कश्मीरी पंडितों का गुस्सा अब्दुल्ला सरकार पर फूटा है। जिसके बात प्रशासन ने कश्मीरी पंडितों को जल्द नई दुकानें देने का वादा किया है।
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जम्मू-कश्मीर में विस्थापित कश्मीरी पंडितों के घरों पर बुलडोजर गरजा है। बुलडोजर एक्शन पर कश्मीरी पंडितों का गुस्सा फूटा है। जिसके बात प्रशासन को भी झुकना पड़ा है। रिलीफ कमिश्नर ने मौके पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और हर एक तरीके से मदद का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कश्मीरी पंडितों को नई दुकानें दी जाएंगी। प्रशासन ने दावा किया है कि तोड़ी गई सभी दुकानें जम्मू विकास प्राधिकरण की जमीन पर बनी थी।
बता दें कि दो-तीन दशक पहले कश्मीरी पंडितों पर हुए हमले के बाद घाटी से विस्थापित कश्मीरी पंडित यहां छोटे-मोटे कारोबार कर रहे थे। लेकिन अब उनसे यह भी छीन लिया गया। कई दुकानों पर प्रशासन का बुलडोजर गरजा है। सभी दुकानों को पूरी तरीके से जमीदोज कर दिया गया है। बुलडोजर एक्शन के बाद कश्मीरी पंडितों का गुस्सा जम्मू-कश्मीर सरकार पर फूटा है।
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जम्मू विकास प्राधिकरण द्वारा जहां पर बुलडोजर कार्रवाई हुई है। उन्हीं जगहों पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनाया जाएगा। प्रशासन का कहना है कि कॉम्प्लेक्स बनाने के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है। यहां कुल 10 दुकान बनाई जाएंगी। जिन्हें कश्मीरी पंडितों को दिया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि "कश्मीरी पंडितों से बुलडोजर एक्शन को लेकर मंजूरी ली गई थी। हमने इनको खुद से हटाने के लिए कहा था। लेकिन जब उन्होंने ऐसा नहीं किया। फिर प्राधिकरण की तरफ से एक्शन लिया गया"।
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जम्मू विकास प्राधिकरण द्वारा बुलडोजर एक्शन के बाद राजनीति तेज हो गई है। बीजेपी,पीडीपी,अपनी पार्टी और कई कश्मीरी पंडितों के संगठनों ने इसकी जमकर आलोचना की है। सभी ने कश्मीरी पंडितों को नई दुकान देने की मांग की है। ताकि इनकी आजीविका पर कोई असर न पड़े।
बुलडोजर एक्शन के बाद जम्मू-कश्मीर के विस्थापित पंडितों का गुस्सा उमर अब्दुल्ला सरकार पर जमकर फूट रहा है। अब्दुल्ला सरकार पर बुलडोजर एक्शन कार्रवाई को लेकर एक कश्मीरी पंडित दुकानदार ने कहा कि "यह सरकार बेहतर और आर्थिक सहायता देने के बजाय हमारी दुकानों पर बुलडोजर चला कर हमारी आजीविका छिन रही है"। एक और दुकानदार जवाहरलाल भट्ट ने कहा कि "हम इन दुकानों के भरोसे थे। अब कैसे अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकेंगे। यह तो सरेआम गुंडागर्दी है। हमें कोई नोटिस नहीं दिया गया। अचानक से हमारी दुकानों को ढहा दिया गया"। कश्मीरी पंडितों के संगठन के एक नेता ने कहा कि "रिलीफ डिपार्टमेंट दुकानें तैयार करवा रहा है"। जो भी कार्रवाई हुई है उसमें देरी होनी चाहिए थी। पहले दुकानदारों को नई दुकानों में शिफ्ट किया जाना चाहिए था। अभी नई दुकान मिलने में समय लगेगा। तब तक यह लोग कैसे अपनी आजीविका चलाएंगे।
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जम्मू विकास प्राधिकरण द्वारा बुलडोजर एक्शन को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने भी ट्वीट के जरिए इस मामले को उठाया है। महबूबा ने लिखा कि " ये दिल दहला देने वाले दृश्य है। जेडीए ने बिना किसी पूर्व सूचना के उनकी दुकनें गिरा दीं। यह उस समुदाय के लिए एक और झटका है। जिसने दशकों से कठिनाइयों को झेला है। आदिवासी समुदाय की संपत्तियों को लक्षित कर ध्वस्त करने की शुरुआत अब कश्मीरी पंडितों तक पहुंच गई है। जिससे उनमें अलगाव और नुकसान की भावना और भी गहरी हो गई है। हम सीएम उमर अब्दुल्ला से आग्रह करते हैं कि वे इस गंभीर अन्याय को करुणा और तत्परता से हल करें।