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बसपा प्रमुख मायावती ने अखिलेश के नारे की निकाली हवा, बोलीं- PDA का नारा सिर्फ चुनावी छलावा

बसपा प्रमुख मायावती ने अखिलेश यादव के ‘पीडीए’ (PDA) नारे को मात्र एक चुनावी छलावा और जनता को गुमराह करने वाला एजेंडा करार दिया है.

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने रविवार को पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए बहुजन समाज से बसपा से जुड़कर सामाजिक परिवर्तन और आर्थिक मुक्ति के आंदोलन को मजबूत बनाने का आह्वान किया. इस मौके पर उन्होंने समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि बहुजन समाज के हितों की बात करने वाले दलों की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है.

सपा समेत अन्य विपक्षी दलों को मायावती ने घेरा

बसपा सुप्रीमो मायावती ने रविवार को कहा कि बहुजन समाज के हित, कल्याण और उत्थान के लिए बसपा ही वास्तविक आंदोलन और राजनीतिक शक्ति है, जबकि अन्य दलों की कथनी और करनी में भारी अंतर है. उन्होंने कहा कि सपा समेत कई विरोधी दल बहुजन समाज की एकता और सत्ता की 'मास्टर चाबी' हासिल करने के मिशन को मजबूत करने के बजाय उसे कमजोर करने का काम करते रहे हैं. ऐसे दलों की राजनीति से बहुजन समाज को लाभ कम और नुकसान अधिक हुआ है.

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सपा की ओर से ‘PDA’ का नारा केवल दिखावा

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बसपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि गरीबों, दलितों, आदिवासियों, अन्य पिछड़े वर्गों और मुस्लिम समाज के नाम पर राजनीति करने वाली पार्टियां वास्तव में इन वर्गों के साथ न्याय नहीं कर पाईं. उन्होंने कहा कि सपा की ओर से दिया जा रहा 'पीडीए' का नारा भी केवल दिखावा है और इसका उद्देश्य चुनावी लाभ हासिल करना भर है. उन्होंने कहा कि इन दलों को दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों की याद केवल चुनाव के समय आती है, जबकि सत्ता में आने के बाद वही वर्ग उपेक्षा और तिरस्कार का सामना करते हैं.

मुस्लिम और ब्राह्मण समाज का बसपा से जुड़ाव

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मायावती ने कहा कि सपा भी अन्य जातिवादी दलों की तरह बहुजन समाज के लिए हितकारी पार्टी नहीं रही है. उन्होंने कहा कि यह कोई आरोप नहीं बल्कि इन दलों के राजनीतिक इतिहास से स्पष्ट होता है.
बसपा प्रमुख ने दावा किया कि मुस्लिम समाज का इन पार्टियों से धीरे-धीरे मोहभंग हो रहा है और ब्राह्मण समाज का भी बसपा से जुड़ाव बढ़ रहा है, जिससे सपा की राजनीतिक और जातीय विरोध की भावना और तीव्र होती दिखाई दे रही है. उन्होंने कहा कि बहुजनों की एकता और राजनीतिक शक्ति ही उनके अधिकारों की वास्तविक गारंटी है.

कांशीराम का जीवन बहुजन उत्थान को समर्पित

पार्टी के संस्थापक कांशीराम की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए मायावती ने कहा कि उनका पूरा जीवन बहुजन समाज के उत्थान और सामाजिक परिवर्तन के मिशन को समर्पित रहा. मायावती ने कहा कि कांशीराम ने संविधान निर्माता भीमराव आंबेडकर की सोच और आंदोलन को पूरे देश में नई ऊर्जा दी व बहुजन समाज को संगठित कर राजनीतिक शक्ति में बदलने का ऐतिहासिक कार्य किया.
उन्होंने कहा कि बसपा के कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने देशभर में विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति के आंदोलन को और मजबूत बनाने का संकल्प लिया.

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‘बहुजन समाज के हित के लिए बसपा ही असली ताकत’

बसपा प्रमुख ने बहुजन समाज से अपील की कि वे पार्टी से जुड़कर सच्चे और ईमानदार अम्बेडकरवादी मिशनरी बनें और अपने वोट की ताकत से सत्ता की 'मास्टर चाबी' हासिल करें, ताकि संविधान में बहुजनों को मिले अधिकारों को जमीन पर लागू कराया जा सके. मायावती ने कहा कि बहुजन समाज के हित, कल्याण और उत्थान के लिए बसपा ही वास्तविक आंदोलन और राजनीतिक शक्ति है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ दलों का 'पीडीए' जैसे नारों के माध्यम से बहुजन समाज के प्रति प्रेम दिखाना केवल चुनावी स्वार्थ तक सीमित है.

कांशीराम को ‘भारत रत्न’ देने की मांग

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उन्होंने यह भी कहा कि कांशीराम के योगदान को देखते हुए केंद्र सरकार को उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करने में और देरी नहीं करनी चाहिए. बसपा प्रमुख ने बताया कि लखनऊ के 9 माल एवेन्यू स्थित पार्टी मुख्यालय और नोएडा के राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने बड़ी संख्या में पहुंचकर कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके मिशन को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया.

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