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बसपा सुप्रीमो मायावती ने फिर दिखाया दम, ट्रंप टैरिफ के आतंक से निपटने का सुझाया हल, विपक्षी दलों को भी दी इशारों ही इशारों में नसीहत!
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने ट्रंप के टैरिफ पर फिर बयान दिया है. उन्होंने सरकार को अमेरिकी प्रेशर से निपटने का हल सुझाया है. मायावती ने विपक्ष के हमले से इतर सरकार को कुछ नसीहतें भी दीं हैं. ये कोई पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी उन्होंने देश के लिए स्टैंड लिया है.
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बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने लखनऊ में बसपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की. इस बैठक में उन्होंने देश और पार्टी के विभिन्न मुद्दों पर समीक्षा की और संगठन के लोगों के साथ चर्चा भी की. बसपा सुप्रीमो ने इस दौरान कहा ट्रंप के टैरिफ पर भी चिंता जताई और इसके खिलाफ ठोस नीति बनाने की वकालत की. विपक्ष के दूसरे नेताओं से अलग मायावती ने इस पर निशाना साधने की बजाय सरकार को इससे निपटने की सलाह दी और रास्ता भी सुझाया.
बैठक के दौरान मायावती ने अमेरिका द्वारा थोपे गए 50 प्रतिशत ट्रंप टैरिफ के मुद्दे को गंभीरता से उठाया. उन्होंने कहा कि इस तरह के भारी-भरकम आर्थिक दबाव ने भारत के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं, जिनसे निपटने के लिए सिर्फ सतही उपाय काफी नहीं होंगे. मायावती ने केंद्र सरकार और सत्ताधारी बीजेपी को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि वे जनहित और देशहित को सर्वोपरि रखते हुए अपनी नीतियों और कार्यक्रमों में ठोस सुधारवादी रवैया अपनाएं.
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने समय रहते इस संकट को गंभीरता से नहीं लिया तो देश के विशाल बहुजन वर्ग पर इसका सीधा असर पड़ेगा. गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी, अशिक्षा और पलायन जैसी समस्याएं पहले ही आम जनता की जिंदगी को कठिन बना रही हैं, ऐसे में टैरिफ का अतिरिक्त बोझ इन समस्याओं को और गहरा कर देगा. मायावती ने कहा कि यह स्थिति न केवल आम नागरिकों की तकलीफें बढ़ाएगी बल्कि भारत के मान-सम्मान और उसकी वैश्विक साख को भी चोट पहुंचाएगी.
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उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसे हालात से बचना बेहद जरूरी है और इसके लिए आर्थिक व सामाजिक मोर्चे पर मजबूत और दूरगामी नीतिगत फैसले लेने होंगे. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अगर बीजेपी सरकार ने सुधारवादी दृष्टिकोण अपनाने में देर की, तो आने वाले समय में देश की स्थिति और भी जटिल हो सकती है.
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देश के लिए खड़ी हुईं मायावती
इससे पहले भी मायावती ने अमेरिका के खिलाफ बयान दिया था और पोस्ट कर कहा था कि मित्र देश बताने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय आयात पर 1 अगस्त से 25 प्रतिशत शुल्क और रूस से तेल आयात करने पर पेनाल्टी लगाने से संबंधित इस फैसले को केंद्र सरकार को एक अवसर के रूप में लेना चाहिए और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाकर देश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित होने से बचाना चाहिए.
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उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों, छोटे व मझोले उद्योगों और राष्ट्रहित के साथ कोई समझौता न करने का आश्वासन दिया है और अब उसे इस वादे पर खरा उतरकर दिखाना होगा.
मायावती ने आगे कहा कि भारत, जो दुनिया की सबसे बड़ी जनसंख्या वाला देश है और जहां अधिकतर लोग गरीब व मेहनतकश हैं, वहां हर व्यक्ति को काम देने वाली नीतियों के सही अमल से देश आत्मनिर्भर बन सकता है. इससे न केवल 'सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय' का लक्ष्य हासिल होगा, बल्कि संविधान के मानवतावादी और कल्याणकारी उद्देश्यों के अनुरूप जनता और देश का हित सुरक्षित रहेगा, जिससे भारत एक सुखी और समृद्ध राष्ट्र बन सकता है.
संगठन को लेकर बड़ी योजना बना रही बसपा
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बसपा प्रमुख मायावती ने कहा कि आगामी 9 अक्टूबर को पार्टी संस्थापक कांशीराम की पुण्यतिथि राजधानी लखनऊ स्थित 'मान्यवर कांशीराम स्मारक स्थल' पर ऐतिहासिक रूप से मनाई जाएगी. इस अवसर पर वह खुद शामिल होकर कार्यक्रम का नेतृत्व करेंगी और आगे की राजनीतिक रणनीति पर चर्चा भी करेंगी. लंबे समय बाद स्मारक के जीर्णोद्धार के पश्चात यहां बड़ा आयोजन होने जा रहा है.
मायावती ने विरोधिया पर लगाया आरोप
मायावती ने आरोप लगाया कि विरोधी दल अंदरखाने मिलकर बसपा को कमजोर करने की साजिश कर रहे हैं. उनका कहना था कि दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को संवैधानिक अधिकारों से वंचित कर उन्हें शासक वर्ग बनने से रोकने की कोशिशें की जा रही हैं. बसपा सरकारों में सर्वसमाज को समान अवसर और विकास मिला था, जिसे अब रोकने का प्रयास हो रहा है.
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उन्होंने यूपी और अन्य राज्यों में धार्मिक स्थलों और संत-गुरुओं का निरादर किए जाने की घटनाओं पर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि यह समाज में नफरत फैलाने का षड्यंत्र है. सरकारें संकीर्ण और सांप्रदायिक राजनीति छोड़कर ऐसे आपराधिक तत्वों पर सख्त कानूनी कार्रवाई करें, ताकि देश में अमन-चैन कायम रह सके.
मायावती देश के लिए स्टैंड लेने के लिए जानी जाती हैं. ये कोई पहला मौका नहीं है जब बसपा सुप्रीमो ने विपक्षी दलों से अलग राष्ट्रवादी स्टैंड लिया था. आपको बताएं कि अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव एक बार फिर चरम पर है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत का टैरिफ लगाए जाने के फैसले ने न केवल दोनों देशों के संबंधों में खटास घोली है, बल्कि भारत की आंतरिक राजनीति में भी हलचल मचा दी है. यह टैरिफ खास तौर पर रूस से तेल खरीद और अन्य व्यापारिक गतिविधियों को लेकर लगाया गया है, जिसे भारत सरकार ने अन्यायपूर्ण और अनुचित बताया है. हालांकि इस गंभीर मुद्दे पर जहां देश को एकजुट होकर प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता थी, वहीं कांग्रेस सहित विपक्ष के एक धड़े ने इसे आपदा में अवसर के तौर पर लिया और बिना वक्त गवांए सरकार पर तीखा हमला बोला था. शायद ये लोग विरोध के चक्कर में कब देश की आलोचना करने लगे, इन्हें पता ही नहीं चला.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का यह कदम भारत के लिए एक आर्थिक झटका के तौर पर लिया जा रहा है. इससे पहले अमेरिका, भारत के साथ व्यापार और सामरिक सहयोग का एक मजबूत रिश्ता बनाए रखने का दावा करता रहा है. लेकिन हाल के वर्षों में ट्रंप की विदेश नीति ने बार-बार भारत को ऐसे मोड़ों पर खड़ा कर दिया है, जहां उसे अपने आत्मसम्मान और आर्थिक हितों के बीच संतुलन बनाना पड़ा है. यह टैरिफ भी उसी नीति का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका अपने मित्र देशों से भी एकतरफा फैसलों के जरिए व्यवहार कर रहा है.
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राहुल गांधी ने ट्रंप की धमकी और ब्लैकमेल को अडानी समूह से जोड़ दिया था
इस टैरिफ के ऐलान के तुरंत बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार पर तीखा हमला किया. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि ट्रंप का यह फैसला एक तरह का आर्थिक ब्लैकमेल है और प्रधानमंत्री मोदी को अपनी कमजोरी को देश के हितों पर हावी नहीं होने देना चाहिए. इतना ही नहीं, उन्होंने इसे अडानी समूह पर अमेरिका में चल रही जांच से भी जोड़ दिया और यह दावा किया कि प्रधानमंत्री ट्रंप की धमकियों के सामने मजबूर हैं क्योंकि उनके हाथ बंधे हुए हैं. राहुल गांधी के इन ट्वीट्स से यह संकेत गया कि कांग्रेस इस अंतरराष्ट्रीय संकट को भी घरेलू राजनीति में भुनाने का प्रयास कर रही है.
काश! मायावती से सीख पाते राहुल गांधी
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हालांकि इसी बीच एक ऐसी राजनीतिक आवाज सामने आई, जिसने पूरे देश को चौंका दिया. यह आवाज थी बहुजन समाज पार्टी की मुखिया और उत्तर प्रदेश की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं मायावती की. मायावती ने अपने ट्वीट में न सिर्फ अमेरिका के फैसले की निंदा की बल्कि एक बेहद संतुलित और परिपक्व राजनीतिक दृष्टिकोण भी सामने रखा. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने संयमित प्रतिक्रिया देकर इस टैरिफ को अनुचित, अन्यायपूर्ण और अविवेकी करार दिया है, लेकिन इस समय देश को पूरी एकजुटता के साथ काम करने की आवश्यकता है.