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पश्चिम बंगाल में बीजेपी का दमदार प्लान: 2026 से पहले त्रिस्तरीय रणनीति, आरएसएस के साथ बूथ और संस्कृति पर बढ़त की तैयारी

पश्चिम बंगाल में बीजेपी ने 2026 से पहले अपनी त्रिस्तरीय रणनीति तैयार कर ली है. पार्टी आरएसएस के सहयोग से बूथ स्तर पर पकड़ मजबूत करने और स्थानीय संस्कृति के माध्यम से जनसमर्थन बढ़ाने की तैयारी कर रही है, ताकि आगामी चुनावों में बढ़त हासिल की जा सके.

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पश्चिम बंगाल में 2026 विधानसभा चुनावों को लेकर भाजपा ने कमर कस ली है. पार्टी ने चुनाव से करीब डेढ़ साल पहले ही त्रिस्तरीय रणनीति शुरू कर दी है, जिसमें संगठनात्मक मजबूती, ग्रामीण पहुंच विस्तार और सांस्कृतिक अभियान शामिल हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का पूरा सहयोग मिल रहा है, जो जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की नेटवर्किंग को मजबूत कर रहा है. 2021 में 77 सीटें जीतने वाली भाजपा अब 2024 लोकसभा चुनावों के 38.73% वोट शेयर को 7-8% और बढ़ाने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही है. राज्य अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य के नेतृत्व में आरएसएस के साथ समन्वय बैठकें पूरी हो चुकी हैं, जो तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कड़ी टक्कर देने का संकेत दे रही हैं.

संगठन से लेकर बूथ स्तर तक मजबूती

भाजपा ने अपनी तैयारी को तीन स्तरों पर बांटा है, केंद्रीय नेतृत्व, राज्य इकाई और जमीनी कार्यकर्ता. राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष के नेतृत्व में सितंबर में कोलकाता में आरएसएस के साथ दो दिवसीय बैठकें हुईं, जहां 2026 की रोडमैप तैयार की गई. इनमें आंतरिक मतभेद सुलझाने, बूथ स्तर पर कमजोरियों को दूर करने और एक करोड़ सदस्यता अभियान की प्रगति पर चर्चा हुई.

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पार्टी ने ग्रामीण इलाकों में 'ग्राम चले कार्यक्रम' शुरू किया है, जहां शीर्ष नेता गांव-गांव जाकर कार्यकर्ताओं से जुड़ रहे हैं. 2021 में शहरी क्षेत्रों में अच्छा प्रदर्शन करने वाली भाजपा अब ग्रामीण वोटरों पर फोकस कर रही है, जहां टीएमसी का दबदबा है.

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आरएसएस का मजबूत साथ

आरएसएस भाजपा की रीढ़ बन चुका है. राज्य में पिछले एक साल में 583 नई शाखाएं खोली गई हैं, जो हिंदू वोटों को एकजुट करने का काम कर रही हैं. आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने फरवरी में बंगाल दौरे पर लोगों से संघ में शामिल होने की अपील की, ताकि संगठन की कार्यप्रणाली को समझा जा सके. हावड़ा में मार्च में हुई दो दिवसीय आरएसएस बैठक में भाजपा नेताओं जैसे सुकांता मजूमदार, सुवेंदु अधिकारी और दिलीप घोष ने भाग लिया.

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यहां कानून-व्यवस्था, महिलाओं पर अपराध और टीएमसी सरकार की भ्रष्टाचार पर हमला बोलने की रणनीति बनी. आरएसएस की सहयोगी संगठनों जैसे विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जरिए जमीनी स्तर पर पहुंच मजबूत हो रही है.

बंगाली पहचान से कनेक्ट करने की कोशिश

भाजपा टीएमसी के कला और संस्कृति के इस्तेमाल का जवाब देने के लिए दिसंबर 2025 से फरवरी 2026 तक कला, संगीत, थिएटर और फिल्म महोत्सव आयोजित करेगी. कोलकाता में आर्ट फेस्टिवल से लेकर संगीत कार्यक्रम तक चलेंगे, जो बंगाली बुद्धिजीवियों और युवाओं को आकर्षित करेंगे. बूथ स्तर पर फोकस के तहत 25,000 ऐसे पोलिंग बूथ्स पर नजर है जहां 2021 या 2024 में भाजपा आगे रही.

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पार्टी ने महिलाओं के लिए शशि अग्निहोत्री और युवाओं के लिए तरुणज्योति तिवारी जैसे नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है. केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब देब जैसे पर्यवेक्षकों ने दो दौर की बैठकें कर रणनीति अंतिम रूप दी है.

टीएमसी को चुनौती

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने फरवरी में कहा कि 2019 से 30-40% वोट शेयर वाले भाजपा को 10% और वोट मिलने पर सत्ता हासिल हो जाएगी. पार्टी का दावा है कि 2026 में बंगाल में भाजपा की सरकार बनेगी. राज्य अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य, जो 1971 से आरएसएस स्वयंसेवक हैं, बंगाली संस्कृति से जुड़ाव के कारण चुने गए हैं. वे टीएमसी के 'बाहरी' आरोपों का जवाब देंगे. हालांकि, आंतरिक असंतोष जैसे सुवेंदु अधिकारी को सीएम फेस न बनाने पर विवाद हैं, लेकिन पार्टी इन्हें सुलझाने में जुटी है.

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आरएसएस की शताब्दी वर्ष में यह चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है.भाजपा की यह तैयारी टीएमसी को कड़ी चुनौती देगी, जहां ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी भी बूथ स्तर पर मीटिंग्स बढ़ा रहे हैं. चुनाव आयोग के मतदाता सूची विवाद के बीच भाजपा का फोकस बंगाल की पहचान और हिंदुत्व पर रहेगा. आने वाले महीनों में मेगा रैलियां और अभियान तेज होंगे.

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