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'आप देश छोड़ने की तैयारी करो...', BJP सांसद निशिकांत दुबे का राहुल गांधी पर पलटवार, कहा- Gen Z आपको क्यों करे बर्दाश्त

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगाते हुए कहा कि वे वोट चोरों के संरक्षक हैं और Gen-Z को संविधान बचाकर वोट चोरी रोकने की अपील की. भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया के एक्स पर पलटवार करते हुए कहा कि Gen-Z परिवारवाद व भ्रष्टाचार के खिलाफ है, इसलिए राहुल को ही देश छोड़ने की तैयारी करनी चाहिए.

Rahul Gandhi/ Nishikant Dubey (File Photo)
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देश की राजनीति में इस समय सबसे बड़ी बहस 'वोट चोरी' को लेकर छिड़ी हुई है. कांग्रेस पार्टी लगातार मोदी सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगा रही है. वहीं भाजपा पलटवार करते हुए कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी को कठघरे में खड़ा कर रही है. इस पूरे विवाद में अब एक नया शब्द चर्चा में आ गया है और वो Gen-Z. मतलब अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस जेनरेशन को लेकर नई तनातनी शुरू हो गई है. 

दरअसल, गुरुवार को राहुल गांधी ने सीधे चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा कि वह वोट चोरों के संरक्षक बन गए हैं. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश हो रही है और देश के युवा, खासकर Gen-Z संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए आगे आएंगे. राहुल गांधी का बयान आते ही राजनीति का पारा चढ़ गया और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने उन पर जोरदार पलटवार किया. उन्होंने कहा कि Gen-Z  परिवारवाद और भ्रष्टाचार के खिलाफ है. इसलिए राहुल गांधी को यह पीढ़ी कभी स्वीकार नहीं करेगी.

निशिकांत दुबे का पलटवार

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भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर राहुल गांधी को जवाब देते हुए लिखा 'Gen Z परिवारवाद के खिलाफ है. वह नेहरू जी, इंदिरा जी, राजीव जी, सोनिया जी के बाद राहुल जी को क्यों बर्दाश्त करेगा? वह भ्रष्टाचार के खिलाफ है, आपको क्यों नहीं भगाएगा?' दुबे ने आगे लिखा कि Gen Z नेपाल और बांग्लादेश की राजनीति से भी सबक ले रही है. नेपाल में युवाओं ने सोशल मीडिया प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के खिलाफ जबरदस्त आंदोलन किया. वहीं बांग्लादेश में युवाओं ने कट्टरपंथ के खिलाफ आवाज बुलंद की. ऐसे में भारत की Gen Z भी बदलाव की वाहक है और परिवारवाद के खिलाफ खड़ी होगी. दुबे ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को अब देश छोड़ने की तैयारी करनी चाहिए क्योंकि आने वाले समय में यह पीढ़ी उन्हें स्वीकार नहीं करेगी.

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राहुल गांधी ने लगाए थे बड़े आरोप 

नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए राहुल गांधी ने कर्नाटक का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि वहां करीब 6800 वोट सुनियोजित तरीके से डिलीट कर दिए गए. राहुल का आरोप है कि कर्नाटक CID ने 18 महीने में चुनाव आयोग को 18 चिट्ठियां लिखीं, लेकिन आयोग ने कोई जवाब नहीं दिया. इससे साफ है कि पूरी प्रक्रिया में चुनाव आयोग की मिलीभगत है. इतना ही नहीं, राहुल ने एक्स पर भी एक पोस्ट किया जिसमें लिखा था , "देश के Yuva, देश के Students, देश की  Gen-Z संविधान को बचाएंगे, लोकतंत्र की रक्षा करेंगे और वोट चोरी को रोकेंगे. मैं उनके साथ हमेशा खड़ा हूं. जय हिंद." राहुल गांधी ने पहली बार खुले तौर पर 'Gen-Z ' शब्द का इस्तेमाल कर इस पीढ़ी को लोकतंत्र की रक्षा की उम्मीद बताया.

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राहुल के बयान पर EC की तीखी प्रतिक्रिया 

राहुल गांधी के आरोपों पर चुनाव आयोग ने तत्काल प्रतिक्रिया दी और इन्हें पूरी तरह गलत व आधारहीन बताया. आयोग ने कहा कि ऑनलाइन वोट डिलीट करना संभव नहीं है. इसके लिए एक नियत प्रक्रिया है जिसमें संबंधित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाता है. आयोग ने यह भी दोहराया कि उसकी कार्यप्रणाली पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है. भाजपा ने भी कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार सवाल उठाना कांग्रेस की निराशा को दिखाता है. भाजपा नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी और कांग्रेस अब जनता का विश्वास खो चुके हैं और चुनावी हार का ठीकरा संस्थाओं पर फोड़ रहे हैं.

आखिर क्या है Gen Z?

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इस विवाद के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जेनरेशन Z है कौन? जानकारी देते चलें कि Gen Z उस पीढ़ी को कहा जाता है जिसका जन्म लगभग 1997 से 2012-2015 के बीच हुआ है. यानी इसमें आज के युवा शामिल हैं, यह पीढ़ी इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में पली-बढ़ी है. यह मोबाइल, डिजिटल मीडिया और ग्लोबल कनेक्टिविटी से गहराई से जुड़ी हुई है. यही वजह है कि Gen Z को जागरूक, सवाल पूछने वाली और बदलाव चाहने वाली पीढ़ी माना जाता है.

क्या हैं इसके सियासी मायने?

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राहुल गांधी का Gen Z पर भरोसा जताना यह बताता है कि कांग्रेस अब युवाओं के जरिए अपनी सियासत को नया आधार देना चाहती है. राहुल यह संदेश देना चाहते हैं कि आने वाले वक्त में यही पीढ़ी लोकतंत्र और संविधान की असली रक्षक होगी. वहीं भाजपा इसे परिवारवाद से जोड़कर पलटवार कर रही है. उनका कहना है कि जो पीढ़ी पारदर्शिता और योग्यता पर विश्वास करती है, वह गांधी परिवार की राजनीति को मंजूर नहीं करेगी.

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