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BMC चुनाव से पहले BJP हुई सतर्क, AIMIM गठबंधन पर CM फडणवीस की सख्ती, विधायक को नोटिस जारी

महाराष्ट्र में नगर परिषदों के गठन में AIMIM और कांग्रेस का समर्थन लेने पर बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य इकाई को नसीहत दी है. बीएमसी समेत आने वाले निकाय चुनावों पर असर की आशंका के बीच अकोट नगर परिषद में बीजेपी-AIMIM गठबंधन तोड़ा गया और विधायक प्रकाश भरसखाले को नोटिस जारी किया गया.

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महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर नगर निकायों के गठन को लेकर चर्चा में है. इस बार विवाद की वजह बनी है भारतीय जनता पार्टी द्वारा कुछ नगर परिषदों में एआईएमआईएम और कांग्रेस जैसे विरोधी दलों का समर्थन लेना. इस घटनाक्रम पर बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व ने राज्य इकाई को कड़ी नसीहत दी है. वहीं, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी अकोला के स्थानीय नेतृत्व पर सख्त रूख अपनाए. पार्टी को आशंका है कि इस तरह के प्रयोग आगामी बीएमसी और अन्य महानगर पालिकाओं के चुनावों में उसकी साख को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसी को देखते हुए अब संगठन स्तर पर सख्ती दिखाई जा रही है.

दरअसल, महाराष्ट्र में हाल ही में दो नगर परिषदों के गठन के मामले केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचे. एक मामले में बीजेपी ने असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली एआईएमआईएम के साथ मिलकर सत्ता समीकरण साधा, जबकि दूसरे में कांग्रेस का समर्थन लिया गया. बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व ने इसे पार्टी लाइन के खिलाफ मानते हुए तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए. अकोला जिले की अकोट नगर परिषद में बीजेपी-एआईएमआईएम गठबंधन को तोड़ दिया गया और इस गठबंधन को अंजाम देने वाले विधायक प्रकाश भरसखाले को कारण बताओ नोटिस भी जारी किया गया. पार्टी का तर्क है कि भरसखाले बीजेपी के मूल कैडर से नहीं हैं, इसलिए इस तरह की राजनीतिक चूक हुई.

BJP हुई सतर्क 

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बीजेपी (BJP) के भीतर इस बात को लेकर चिंता बढ़ गई है कि महाराष्ट्र में महायुति के सहयोगी दलों के बीच बढ़ते मतभेदों का असर शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में पड़ सकता है. खासतौर पर मुंबई महानगरपालिका जैसे बड़े और प्रतिष्ठित चुनाव में किसी भी तरह का संदेश पार्टी के लिए नुकसानदायक हो सकता है. हाल के महीनों में बीजेपी और उसकी सहयोगी शिवसेना के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए, जिन्हें शीर्ष नेताओं ने भले ही सुलझा लिया हो, लेकिन विपक्ष को हमला बोलने का मौका मिल गया. कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी और मनसे लगातार बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं कि वह सत्ता के लिए किसी भी हद तक जा सकती है. विपक्ष यह भी प्रचार कर रहा है कि एआईएमआईएम (AIMIM) बीजेपी की ही ‘बी टीम’ की तरह काम कर रही है. बीजेपी को डर है कि अगर यह नैरेटिव मजबूत हुआ, तो शहरी मतदाताओं पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है.

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अंबरनाथ नगरपालिका परिषद से शुरू हुई सियासी हलचल 

इसी बीच अंबरनाथ नगरपालिका परिषद का मामला भी सियासी भूचाल लेकर आया. यहां बीजेपी ने अपनी सहयोगी शिवसेना को रोकने के लिए कांग्रेस के 12 पार्षदों का समर्थन लिया. कांग्रेस ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए न केवल इन पार्षदों को निलंबित किया, बल्कि पूरी ब्लॉक इकाई को ही भंग कर दिया. हालांकि बीजेपी ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए कांग्रेस के इन सभी पार्षदों को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया. इस पूरे घटनाक्रम में राकांपा और कुछ निर्दलीय पार्षद भी बीजेपी के साथ खड़े नजर आए और आखिरकार शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया गया.

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कांग्रेस ने भी अपनाया कड़ा रूख 

इस मामले पर महाराष्ट्र कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया है. पार्टी ने ऐलान किया है कि वह अंबरनाथ के 12 पार्षदों को अयोग्य ठहराने के लिए कानूनी कार्रवाई शुरू करेगी. कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा कि ये पार्षद कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर जीतकर आए थे और बाद में बीजेपी में शामिल होकर दल-बदल कानून की भावना का उल्लंघन किया. उन्होंने दावा किया कि चुनाव चिन्ह पर जीतने के बाद अलग समूह बनाना या किसी दूसरी पार्टी में शामिल होना न केवल अनैतिक है, बल्कि संवैधानिक प्रावधानों के भी खिलाफ है.

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बताते चलें कि महाराष्ट्र में नगर निकायों की राजनीति अब सिर्फ स्थानीय समीकरणों तक सीमित नहीं रह गई है. इसका असर सीधे तौर पर राज्य और राष्ट्रीय राजनीति पर पड़ता दिख रहा है. बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व का सख्त संदेश साफ है कि अल्पकालिक फायदे के लिए वैचारिक और राजनीतिक लाइन से समझौता अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सख्ती का असर आगामी बीएमसी और अन्य महानगर पालिकाओं के चुनावी समीकरणों पर कैसे पड़ता है.

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