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बिहार का आर्थिक सर्वेक्षण '2024-25' हुआ पेश, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया वृद्धि दर

बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 पेश किया। यह सर्वेक्षण बिहार का 19वां संस्करण है

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बिहार में इन दिनों आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज है। इस बीच राज्य की हर सियासी गतिविधि पर सभी दलों की नजर बनी हुई है। इस बीच बिहार के उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को राज्य का आर्थिक सर्वेक्षण 2024-25 पेश किया। यह सर्वेक्षण बिहार का 19वां संस्करण है, जिसे बिहार लोक वित्त एवं नीति संस्थान ने तैयार किया है। रिपोर्ट में राज्य की अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी दी गई है।

बिहार का बढ़ा जीएसडीपी

आधार वर्ष 2011-12 पर आधारित आंकड़ों के मुताबिक, बिहार की सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) 2011-12 के 2.47 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 8.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह लगभग 3.5 गुना वृद्धि को दर्शाता है। 2023-24 के लिए अनुमानित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) वर्तमान मूल्य पर 8,54,429 करोड़ रुपये और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 4,64,540 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। इसमें तृतीयक क्षेत्र (सेवा क्षेत्र) का सबसे बड़ा योगदान है, जो 58.6 प्रतिशत है।

पूंजीगत व्यय में हुई वृद्धि 

इसके बाद द्वितीयक (उद्योग) क्षेत्र का 21.5 प्रतिशत और प्राथमिक (कृषि) क्षेत्र का 19.9 प्रतिशत योगदान है। 2023-24 में बिहार के जीएसडीपी में 14.5 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है। वहीं, प्रति व्यक्ति जीएसडीपी में भी 12.8 प्रतिशत की वृद्धि होने का अनुमान है।वित्त वर्ष 2023-24 में बिहार सरकार का कुल व्यय 2,52,082 करोड़ रुपये रहा। इसमें योजना व्यय 1,01,835 करोड़ रुपये और स्थापना एवं समर्पित व्यय 1,50,247 करोड़ रुपये था। इस दौरान पूंजीगत व्यय में तेजी से वृद्धि हुई है।वर्ष 2023-24 में राज्य सरकार ने 1,61,965 करोड़ रुपये का कर राजस्व प्राप्त किया। यह राज्य के कुल राजस्व का प्रमुख स्रोत बन चुका है। कुल प्राप्तियों में कर राजस्व का हिस्सा 83.8 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

राजकोषीय सूचकों के अनुसार, बिहार की वित्त व्यवस्था वर्तमान स्तर पर स्थिर और लचीली है। राज्य सरकार का व्यय प्रबंधन दीर्घकालिक आर्थिक विकास में सहायक होगा और आर्थिक वृद्धि के लिए समर्थन प्रदान करेगा।बिहार सरकार का वित्तीय प्रबंधन और व्यय योजनाओं की दिशा स्पष्ट रूप से विकास की ओर अग्रसर है, जो राज्य की स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
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