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BMC मेयर पद पर बड़ा अपडेट, अब कोई महिला ही बनेगी मुंबई की मेयर, जानें कैसे हुआ फैसला

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद के लिए इस बार आरक्षण लॉटरी सिस्टम के जरिए तय किया गया है, जिसमें यह पद ‘ओपन महिला’ कैटेगरी में चला गया है.

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BMC Meyor Election: मुंबई की राजनीति से जुड़ा एक बड़ा और अहम अपडेट सामने आया है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के मेयर पद के लिए इस बार आरक्षण लॉटरी सिस्टम के जरिए तय किया गया है, जिसमें यह पद ‘ओपन महिला’ कैटेगरी में चला गया है. इसका सीधा मतलब यह है कि अब मुंबई की मेयर केवल कोई महिला ही बन सकती है. यह फैसला सामने आते ही राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सभी दल अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ इस चुनाव में राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की नीतियों का साफ प्रभाव देखने को मिला है. जनता ने अपना वोट रूपी आशीर्वाद बीजेपी को खुलकर दिया है.

लॉटरी से होता है मेयर कैटेगरी फैसला

महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के मेयर पद के लिए आरक्षण की व्यवस्था पहले से तय नियमों के तहत लॉटरी पद्धति से होती है. हर कार्यकाल में यह लॉटरी निकाली जाती है, जिससे यह तय होता है कि मेयर पद किस वर्ग के लिए आरक्षित रहेगा. इसी प्रक्रिया के तहत इस बार बीएमसी का मेयर पद महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हो गया है. इससे पहले कई बार यह पद सामान्य या अन्य आरक्षित श्रेणियों में रहा, लेकिन इस बार महिला वर्ग का नाम निकलना कई मायनों में खास माना जा रहा है.

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महायुति किसी महिला का नाम करेगी आगे

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इस फैसले के बाद अब बीएमसी में बहुमत वाली पार्टी या गठबंधन को अपनी जीती हुई महिला नगरसेवकों में से किसी एक को मेयर पद के लिए आगे करना होगा. वर्तमान राजनीतिक स्थिति की बात करें तो बीएमसी चुनाव में शिवसेना शिंदे गुट, बीजेपी और अन्य सहयोगी दलों के गठबंधन महायुती को बहुमत मिला है. ऐसे में माना जा रहा है कि मेयर पद पर दावा भी इसी गठबंधन का सबसे मजबूत है. गठबंधन अब अपनी किसी महिला पार्षद को आगे कर मुंबई की कमान सौंप सकता है. 

शिवसेना (यूबीटी) ने जताया विरोध

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हालांकि इस आरक्षण फैसले पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया है. शिवसेना यूबीटी ने आरोप लगाया है कि मुंबई को ओबीसी आरक्षण के ड्रॉ से बाहर रखा गया है. पार्टी नेताओं का कहना है कि मुंबई जैसे बड़े महानगर में ओबीसी समुदाय की आबादी काफी बड़ी है, ऐसे में उन्हें आरक्षण में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए था. शिवसेना यूबीटी ने इस पूरी लॉटरी प्रक्रिया को पक्षपातपूर्ण बताते हुए सवाल खड़े किए हैं.

कांग्रेस ने भी ज़ाहिर की नाराजगी 

कांग्रेस पार्टी ने भी आरक्षण ड्रॉ को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की है. कांग्रेस का कहना है कि परभणी नगर निगम समेत कई जगहों पर लॉटरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी नजर आई है. पार्टी ने आरोप लगाया कि कुछ शहरों को जानबूझकर आरक्षण प्रक्रिया से बाहर रखा गया, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए ठीक नहीं है. कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी दोनों ने राज्य सरकार पर आरक्षण व्यवस्था के दुरुपयोग का आरोप लगाया है. वहीं, दूसरी ओर महाविकास अघाड़ी के नेता इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक खेल बता रहे हैं. उनका कहना है कि आरक्षण के नाम पर सत्ता पक्ष अपने फायदे के लिए फैसले ले रहा है. कुल मिलाकर बीएमसी मेयर पद का ‘ओपन महिला’ होना न सिर्फ महिला नेतृत्व के लिए एक बड़ा अवसर है, बल्कि आने वाले दिनों में मुंबई की राजनीति को नई दिशा देने वाला कदम भी साबित हो सकता है.

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बताते चलें कि बीएमसी मेयर पद का ‘ओपन महिला’ श्रेणी में आना मुंबई की राजनीति में एक नया अध्याय जोड़ता है. इससे जहां महिला नेतृत्व को आगे आने का मजबूत मौका मिलेगा, वहीं राजनीतिक दलों के सामने नई रणनीति बनाने की चुनौती भी खड़ी होगी. आने वाले दिनों में यह फैसला मुंबई की सियासत की दिशा और दशा दोनों को तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है.

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