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शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में कांग्रेस को लेकर बड़ा खुलासा, क्या राहुल गांधी की बढ़ने वाली है टेंशन ?

महाराष्ट्र में विपक्ष की महाविकास अघाड़ी में अब दरार स्थिति और भी ज़्यादा गहरी होती जा रही है। उद्धव ठाकरे के गुट ने दिल्ली नें चुनावी नतीजो में आम आदमी पार्टी की हार के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया है।

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दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणाम में विपक्षी पार्टियों को बड़ा झटका लगा है। यह झटका सिर्फ़ दिल्ली चुनाव में पिछले एक दशक से राज करने वाले आम आदमी पार्टी के अलावा सिर्फ़ कांग्रेस को भले ही लगा हो लेकिन इसकी धमक दिल्ली से सैकड़ों किलोमीटर दूर महाराष्ट्र तक महसूस की गई है। महाराष्ट्र में विपक्ष की महाविकास अघाड़ी में अब दरार स्थिति और भी ज़्यादा गहरी होती जा रही है। उद्धव ठाकरे के गुट ने दिल्ली नें चुनावी नतीजो में आम आदमी पार्टी की हार के लिए सीधे तौर पर कांग्रेस को ज़िम्मेदार ठहराया है। उद्धव गुट ने आप के प्रति सहानुभूति दिखाते हुए कहा है कि आम आदमी पार्टी को दिल्ली में कांग्रेस के साथ गठजोड़ चाहती थी लेकिन कांग्रेस ने भाव नही दिया। इसके बाद दोनों अकेले अपने दम पर चुनावी मैदान में उतरें। नतीजा यह रहा कि दिल्ली की सत्ता में 27 साल बाद बीजेपी ने प्रचंड बहुमत वापसी कर ली। यह बातें संजय राउत द्वारा शिवसेना के मुखपत्र सामना में लिखे गए एक आर्टिकल में सामने आई है। 


कांग्रेस को कम आंकने लगी उद्धव सेना

शिवसेना के मुखपत्र सामना में दिल्ली चुनाव के परिणाम को लेकर जो बातें लिखी गई है। उसने सबको चौंकाया है, मुखपत्र सामना में  किए गए यें दावे  दिल्ली में अरविंद केजरीवाल और आदित्य ठाकरे से हुई मुलाक़ात के दौरान हुई बातचीत में निकलकर सामने आई है। दिल्ली चुनाव के दौरान यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने खुलकर अरविंद केजरीवाल का समर्थन किया था। ऐसे में अब चुनाव के बाद उद्धव गुट का कांग्रेस को लेकर सख़्त रवैय्या कई सवाल उठा रहा है। क्या अब रिज़िनल पार्टी कांग्रेस के साथ प्रेशर पॉलिटिक्स कर रही है। क्या अब ये राज्य के सियासी दल कांग्रेस को कम आंकने लगे है। आइए अब अपनी इस रिपोर्ट में आपको विस्तार से बताते है कि यह सबकुछ क्यों हो रहा है। इसके पीछे की मुख्य वजह क्या है, शिवसेना यूबीटी कांग्रेस को लेकर ऐसी बातें क्यों बोल रही है। 


उद्धव गुट की प्रेशर पॉलिटिक्स

दरअसल, महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले है, मुंबई समेत कई शहरों में निकाय चुनाव होंगे। ऐसे में चुनाव से पहले ही शिवसेना यूबीटी इस तरह के कदम उठाकर महाविकास अघाड़ी में सीटों की खींचतान से पहले ही कांग्रेस पर मानसिक दबाव बनाने की शुरुआत कर दी है। बताते चले कि महाविकास अघाड़ी एन मुख्य रूप से कांग्रेस, शिवसेना यूबीटी और शरद पावर की एनसीपी है। महाराष्ट्र के मराठावाड़ा में एनसीपी का ज़्यादा प्रभाव है जो कि ग्रामीण इलाक़ा है। इससे साफ़ है कि निकाय चुनाव के दौरान महाविकास अघाड़ी में सीटों को लेकर खींचतान कांग्रेस और शिवसेना यूबीटी के बीच रहने वाली है। यही वजह है कि अधिक सीटों पर चुनाव लड़ने की मंशा के चलते उद्धव सेना कांग्रेस के साथ प्रेशर पॉलिटिक्स खेलने लगी है। इससे पहले महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान भी महाविकास अघाड़ी में सीटों के बंटवारे को लेकर लंबा मंथन हुआ था।  


कांग्रेस के लिए मुखपत्र में क्या लिखा गया?

शिवसेना यूबीटी के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने मुखपत्र में लिखा कि "दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से हुई मुलाक़ात के दौरान उन्होंने बताया कि दिल्ली चुनाव में कांग्रेस बीजेपी को हराने के बजाय आम आदमी पार्टी को हराने के लिए ज़्यादा इच्छुक थी। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने जो बातें बताई है वो कांग्रेस की मंशा का ख़ुलासा करती है। वही केजरीवाल ने इस बात को भी शिवसेना के सामने रखा था कि चुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस के साथ गठजोड़ करना चाहती थी। इसी के साथ केजरीवाल ने हरियाणा चुनाव का भी ज़िक्र किया। मुखपत्र के मुताबिक केजरीवाल ने बताया कि "हरियाणा चुनाव के दौरान वो जेल में थे, उनकी पार्टी की तरफ से राघव चड्ढा चुनाव की कमान संभाल रहे थे। उस वक़्त चड्ढा जब जेल में मुलाक़ात करने आए थे तब भी मैने कांग्रेस से गठबंधन की बात उनसे बोली और कहा आप सीटों पर कांग्रेस से बातचीत करके फ़ैसला ले लीजिए। इसके बाद राघव चड्ढा ने कांग्रेस की हरियाणा की 14 सीटों की सूची दी जिसे हमारी पार्टी लड़ना चाहती थी। इसके बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 6 सीट देने पर अपनी सहमति जताई। इस जानकारी को लेकर जब राघव मेरे पास आए तब मैने 6 सीटों पर राजी होने के लिए कह दिया। ये बात जब राहुल गांधी तक पहुंची तो उन्होंने हमारे नेता को केसी वेणुगोपाल से बात करने को कहा, फिर उन्होंने 6 से घटाकर हमें 4 सीट देने का मन बनाया। हमारी पार्टी इस पर भी तैयार हो गई तो कांग्रेस ने सिर्फ़ 2 सीट देने का मन बनाया। राघव ने यह बात बोली तो हमने इस पर भी अपनी रजामंदी दी। लेकिन अब कांग्रेस ने खेल करते हुए बीजेपी के गढ़ वाली दो सीट देने का फ़ैसला किया। इसके बाद हमने कांग्रेस से हटकर अपना अलग रास्ता हरियाणा में अपनाया, क्योंकि स्थिति यह बता रही थी कि कांग्रेस की इच्छा बीजेपी और मोदी को हराने से ज़्यादा हमें हराने की दिख रही थी।" 


ग़ौरतलब है कि दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और आम आदमी पार्टी अपने-अपने दम चुनाव लड़ी थी, हालाँकि इंडिया गठबंधन में शामिल अन्य दलों ने कांग्रेस और आप को एक साथ चुनाव लड़ने के लिए सलाह देती रही दोनों में कोई मनाने को तैयार नहीं था, नतीजा यह रहा कि आम आदमी पार्टी 62 से घटकर 22 पर आ गई, कांग्रेस शून्य जबकि बीजेपी ने प्रचंड तरीके से 48 सीटों पर बड़ी जीत हासिल की है।
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