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कारोबारियों को बड़ी राहत, इन अपराधों में व्यापारियों को नहीं होगी जेल, यूपी सरकार ने खत्म किए 13 नियम

कई पुराने कानूनों में ज़रा सी गलती पर भी व्यापारियों और उद्यमियों को जेल जाने का खतरा रहता था. अगर किसी फैक्ट्री में रजिस्टर सही तरीके से नहीं भरा गया, दुकान का समय थोड़ा ज्यादा चल गया या किसी मशीन का पेपर समय पर अपडेट नहीं हुआ, तो भी केस दर्ज हो सकता था. अब ऐसा नहीं होगा.

Image Source: Social Media
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उत्तर प्रदेश सरकार ने कारोबार करने वालों के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई वाली कैबिनेट ने ‘उत्तर प्रदेश सुगम व्यापार (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश-2025’ को मंजूरी दे दी है. इस फैसले से अब राज्य में कारोबार करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा.

क्या है नया नियम?

पहले कई पुराने कानूनों में ज़रा सी गलती पर भी व्यापारियों और उद्यमियों को जेल जाने का खतरा रहता था. अगर किसी फैक्ट्री में रजिस्टर सही तरीके से नहीं भरा गया, दुकान का समय थोड़ा ज्यादा चल गया या किसी मशीन का पेपर समय पर अपडेट नहीं हुआ, तो भी केस दर्ज हो सकता था. अब ऐसा नहीं होगा. इन मामलों में जेल की सजा की जगह जुर्माना, चेतावनी या प्रशासनिक कार्रवाई होगी. यानी अब किसी भी छोटे उल्लंघन पर उद्यमियों को जेल नहीं भेजा जाएगा.

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किन कानूनों में बदलाव हुआ है?

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इस अध्यादेश के तहत राज्य सरकार ने 13 प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक कानूनों में बदलाव किया है. इनमें से लगभग 99 प्रतिशत आपराधिक धाराएं हटा दी गई हैं. इनमें शामिल हैं -
फैक्ट्री अधिनियम
दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम
मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एक्ट
बॉयलर अधिनियम
अनुबंध श्रमिक अधिनियम आदि.
इनमें से ज्यादातर कानून ब्रिटिश काल के पुराने नियमों पर आधारित थे, जिन्हें आधुनिक व्यापार की जरूरतों के अनुसार कभी अपडेट नहीं किया गया था.

क्यों जरूरी था यह बदलाव?

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पुराने और सख्त कानूनों की वजह से व्यापारी और उद्योगपति अक्सर डर के माहौल में काम करते थे. कई बार मामूली तकनीकी गलती या दस्तावेजों की देरी से भी मुकदमे दर्ज हो जाते थे. इससे उद्योग बढ़ने में रुकावट आती थी और नए निवेशक यूपी में आने से हिचकते थे.
अब सरकार का कहना है कि इन बदलावों से ‘Ease of Doing Business’ यानी कारोबार करने में आसानी को बढ़ावा मिलेगा और निवेशकों को भरोसा मिलेगा कि यूपी में व्यापार करना सुरक्षित और सरल है.

निवेश और अर्थव्यवस्था पर असर

  • सरकार का लक्ष्य है कि इन सुधारों से उत्तर प्रदेश को 2027 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाया जाए.
  • पिछले साल हुए ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में राज्य को लगभग 40 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे, लेकिन कई निवेशक कानूनी जटिलताओं की वजह से पीछे हट गए थे. अब इस नए अध्यादेश के लागू होने से माहौल बदलने की उम्मीद है.
  • सरकार ने साथ ही एक डिजिटल कंप्लायंस पोर्टल और सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम भी शुरू करने का फैसला लिया है, ताकि कारोबारी कामकाज से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं एक ही जगह से और ऑनलाइन पूरी की जा सकें.

श्रमिक संगठनों की चिंता

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हालांकि कुछ श्रमिक संगठनों ने इस फैसले पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि अगर आपराधिक प्रावधान हटाए गए, तो मजदूरों की सुरक्षा पर असर पड़ सकता है.
सरकार ने इस पर स्पष्ट किया है कि मजदूरों की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े सभी जरूरी प्रावधान बरकरार रहेंगे. केवल वे धाराएं हटाई गई हैं, जो अब अप्रासंगिक या अत्यधिक कठोर थीं. अगर किसी फैक्ट्री में गंभीर लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है या श्रमिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जाता है, तो कड़ी कार्रवाई अब भी की जाएगी.

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इस फैसले को उत्तर प्रदेश में व्यापार और उद्योग को बढ़ावा देने वाला ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है. इससे न केवल निवेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. सरकार का उद्देश्य है कि यूपी देश ही नहीं, बल्कि दुनिया के निवेशकों के लिए भी सबसे भरोसेमंद और अनुकूल राज्य बन सके.

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