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बैंकिंग सिस्टम में दलालों का बड़ा गेम! खातों की खरीद-फरोख्त के खेल का खुलासा, 7-7 हजार में बिक रहे अकाउंट, 2 करोड़ लिमिट वाले खाते की कीमत 11 लाख

मोदी सरकार भले ही डिजिटल इंडिया के तहत बैंक खाता खोलने को बढ़ावा दे रही हो, लेकिन बैंकिंग सिस्टम में बड़े फर्ज़ीवाड़े का खुलासा हुआ है. दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि दलाल बीसी पॉइंट के ज़रिए खाते खोलकर उन्हें साइबर ठगों को बेच रहे हैं. रिपोर्टरों ने टोंक में स्टिंग कर पंजाब नेशनल बैंक और फिनो बैंक के खाते 7-7 हजार रुपए में खरीदे और 10 से अधिक खातों का सौदा किया.

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केंद्र की मोदी सरकार डिजिटल इंडिया के जरिए हर व्यक्ति तक बैंकिंग सुविधा पहुंचाने की बात करती है. सरकार लोगों को बैंक खाता खोलने और सुरक्षित वित्तीय लेन-देन के लिए लगातार जागरूक कर रही है. लेकिन देश में बैंक खाते को को लेकर बड़ा फर्जीवाड़ा भी चल रहा है. इस बात का खुलासा दैनिक भास्कर के स्टिंग ऑपरेशन में हुआ है. जिसने पूरे बैंकिंग सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 

दरअसल, राजस्थान में बैंक खातों की खरीद-फरोख्त का बड़ा रैकेट चल रहा है. दलाल बैंक खातों को खुलेआम बेच रहे हैं. दैनिक भास्कर की पड़ताल में सामने आया है कि कैसे बैंक के दलाल बीसी (बिजनेस करेस्पॉन्डेंट) पॉइंट्स के जरिए खाते खोलते हैं और उन्हें साइबर ठगों तक पहुंचाते हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि ये खाते सिर्फ़ 7-7 हजार रुपए में बिक रहे हैं और करोड़ों की लिमिट वाले खाते लाखों में बेचे जा रहे हैं.

कैसे होता है ये खेल?

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बैंक खाता बेचने वाले दलाल पहले लोगों को सरकारी योजनाओं का लालच देकर खाते खुलवाते हैं. ये लोग सरकार की नई-नई स्कीम का झांसा देकर लोगों को फ़ंसाते हैं और खाता खुलवाने के बदले 1500 से 2000 रुपए तक वसूलते हैं. उनसे आधार कार्ड, पैन कार्ड और फोटो जमा करवाई जाती है. इसके बाद बीसी पॉइंट के जरिए खाते खोले जाते हैं. चूंकि बीसी पॉइंट पर कोई सरकारी कर्मचारी नहीं होता और बैंक दोबारा वेरिफिकेशन भी नहीं करता, इसलिए यह प्रक्रिया बेहद आसान हो जाती है. खाता खुलने के बाद कुछ समय में एटीएम, पासबुक और चेकबुक भी जारी हो जाती है. इसके बाद दलाल यह खाता ठगों को बेच देते हैं.

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स्टिंग ऑपरेशन में हुआ खुलासा

दैनिक भास्कर की टीम ने टोंक जिले में पहुंचकर इस रैकेट का स्टिंग ऑपरेशन किया. रिपोर्टर ने दलालों से बातचीत कर पंजाब नेशनल बैंक और फिनो बैंक के खाते 7-7 हजार रुपए में खरीदे. इतना ही नहीं, दलालों से 10 से अधिक खातों का सौदा भी हुआ. दलालों ने दावा किया कि उनके पास देशभर का नेटवर्क है और वे हर बैंक का खाता बेच सकते हैं. सरगना इस्माइल और इमरान ने यहां तक कह दिया कि वे 1 करोड़ से 15 करोड़ लिमिट वाले खाते भी उपलब्ध करा सकते हैं. इसके लिए कीमत लाखों में तय की जाती है.

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लिमिट के हिसाब से लगती है बोली

स्टिंग में इस बात का ख़ुलासा हुआ कि बैंक खातों की कीमत उनकी लिमिट के हिसाब से तय होती है.

  • पीएनबी: 1 लाख लिमिट – 18 हजार
  • यूके बैंक: 1 लाख लिमिट – 17 हजार
  • फिनो बैंक: 25 हजार – 6 हजार
  • यस बैंक: 1 लाख लिमिट – 22 हजार
  • यूनियन बैंक: 35 हजार – 8 हजार
  • रूपे बैंक: 1 लाख लिमिट – 10 हजार
  • 1 करोड़ लिमिट – 6 लाख
  • 2 करोड़ लिमिट – 11 लाख
  • 15 करोड़ लिमिट – 30 लाख

ऊपर दिए गए खाते की कीमत जो स्टिंग के पड़ताल में सामने आई है वो बताती है कि जितनी अधिक लिमिट, उतना महंगा खाता मिलता है. 

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बीसी पॉइंट पर खाता खोलने का खेल

बीसी पॉइंट बैंक और ग्राहक के बीच सेतु का काम करते हैं. लेकिन सबसे बड़ी कमी यह है कि यहां खाते का दोबारा वेरिफिकेशन नहीं होता. बीसी पॉइंट चलाने वाले सिर्फ कमीशन के लिए ज्यादा से ज्यादा खाते खोलने में जुटे रहते हैं. यही वजह है कि बैंकिंग सिस्टम में यह बड़ा छेद पैदा हो गया है. आरबीआई हर साल करोड़ों रुपए जागरूकता के लिए खर्च करता है लेकिन हकीकत यह है कि गाँव-देहात तक बैंकिंग सुरक्षा और सही जानकारी नहीं पहुँच पा रही.

दलालों का नेटवर्क कई राज्यों तक

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इस्माइल और इमरान जैसे दलालों का नेटवर्क राजस्थान से लेकर महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात और मध्यप्रदेश तक फैला है. उन्होंने दावा किया कि वे बैंक मैनेजर तक से सेटिंग कर लेते हैं और डिमांड के हिसाब से खाते उपलब्ध करा देते हैं. यहाँ तक कि यदि किसी खाते में दिक्कत आती है तो वे बैंक अधिकारियों से मिलकर समस्या भी सुलझा देते हैं.

क्यों है यह खतरनाक?

इस तरह के खातों का इस्तेमाल ज्यादातर साइबर अपराधी करते हैं. ऑनलाइन फ्रॉड, मनी लॉन्ड्रिंग और हवाला जैसे मामलों में ऐसे फर्जी खाते उपयोग किए जाते हैं. असली खाता धारक को पता भी नहीं चलता और उसके नाम से करोड़ों के ट्रांजैक्शन हो जाते हैं.

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क्या है जरूरत?

यह भी पढ़ें

  • बीसी पॉइंट पर सख्त निगरानी – हर खाता दोबारा वेरिफाई किया जाए.
  • बैंक कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई – जो इस रैकेट से जुड़े हैं.
  • गांवों में जागरूकता – लोगों को बताया जाए कि उनके नाम पर खाता खोलकर अपराध हो सकता है.
  • सरकार और आरबीआई की सक्रियता – डिजिटल इंडिया की सफलता तभी संभव है जब बैंकिंग सिस्टम सुरक्षित और भरोसेमंद बने.

बताते चकें कि इस भास्कर के स्टिंग से प्रकाश में आया यह मामला सिर्फ एक प्रदेश का नहीं बल्कि पूरे देश के लिए चेतावनी है. ऐसे में बैंक खाता अब सिर्फ वित्तीय सुरक्षा का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि अपराधियों के लिए हथियार बनता जा रहा है. अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आम लोगों की मेहनत की कमाई और बैंकिंग व्यवस्था दोनों ही खतरे में पड़ सकते हैं.

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