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उपसेना प्रमुख का बड़ा खुलासा- ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने एक साथ दी तीन दुश्मनों को मात... तुर्की-चीन कर रहे थे पाकिस्तान की मदद, ड्रैगन के हथियारों की हो रही थी लाइव टेस्टिंग

ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई के वक्त भारत तीन मोर्चों, दुश्मनों ( पाकिस्तान, चीन और तुर्की) से सीधे लड़ रहा था. उप सेना प्रमुख राहुल आर. सिंह ने पाक के साथ सैन्य तनाव में चीन की सीधी संलिप्तता की पोल खोलते हुए कहा कि कैसे ड्रैगन उसे लाइव फीड दे रहा था, कौन से हथियार इस्तेमाल हुए.

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22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों के बाद पाकिस्तान में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हुई ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई में चीन की पाक आर्मी के साथ प्रत्यक्ष तौर पर भूमिका सामने आई है. इस बात के कयास तो बहुत पहले से लग रहे थे कि ड्रैगन भारत के खिलाफ साजिश रच रहा है लेकिन अब इस बात की पुष्टि भी हो गई है. उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने शुक्रवार को बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि भारत द्वारा किए गए ‘भारत-पाक सैन्य तनाव’ के दौरान चीन, पाकिस्तान को भारत की सैन्य तैनाती की लाइव इनपुट्स दे रहा था. उन्होंने आगे बताया कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच DGMO स्तर की बातचीत चल रही थी, तब पाकिस्तान को हमारी तैनाती और सैन्य गतिविधियों की रीयल-टाइम जानकारी मिल रही थी.

उन्होंने कहा, "जब DGMO स्तर की बातचीत हो रही थी, पाकिस्तान को चीन से लाइव इनपुट मिल रहे थे. पाकिस्तान ने बातचीत के दौरान हमें बताया कि उन्हें हमारी (भारतीय सेना की) कुछ महत्वपूर्ण सैन्य तैयारियों (तैनातियों) के बारे में पता है और वो उन पर हमले कर सकता है, इसलिए हिंदुस्तान पीछे हटना चाहिए. इससे यह स्पष्ट होता है कि चीन, पाकिस्तान को हमारी सैन्य मूवमेंट की जानकारी दे रहा था.

उप सेना प्रमुख (कैपेबिलिटी डेवलपमेंट एंड सस्टेनेन्स) लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने शुक्रवार को एक अहम खुलासा किया. उन्होंने कहा कि भारत के 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान पाकिस्तान को चीन की ओर से तैनाती की लाइव जानकारी मिल रही थी. वे नई दिल्ली में FICCI द्वारा आयोजित 'New Age Military Technologies' कार्यक्रम में बोल रहे थे.

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‘तीन मोर्चों पर लड़ रहा था भारत’
लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत एक ही समय में तीन मोर्चों पर लड़ रहा था. उन्होंने कहा, “हमारे पास एक सीमा थी लेकिन तीन विरोधी थे. पाकिस्तान सामने था, चीन हर संभव सहायता दे रहा था, और तुर्की ने भी कुछ विशेष प्रकार की मदद दी, जिसमें प्रमुख रूप से उसके Bayraktar ड्रोन शामिल थे. हमने युद्ध के दौरान कई अन्य ड्रोन भी देखे.” 

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पाकिस्तान बना चीनी हथियारों की प्रयोगशाला
उन्होंने पाकिस्तानी सेना की वस्तुस्थिति के बारे में बताया कि पाकिस्तान के पास 81% सैन्य हार्डवेयर चीन में निर्मित हैं और चीन इसे एक “लाइव लैब” की तरह प्रयोग करता है, जहाँ वह अपने हथियारों की प्रभावशीलता को परख सकता है.

लेफ्टिनेंट जनरल सिंह ने भविष्य की रणनीति की चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि यदि भारत और पाकिस्तान के बीच फिर से युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो इस बार पाकिस्तान भारत के सिविलियन केंद्रों को निशाना बना सकता है. उन्होंने कहा, “इस बार हमारे जनसंख्या केंद्रों को निशाना नहीं बनाया गया, लेकिन अगली बार हमें इसके लिए तैयार रहना होगा.”

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तीनों सेना की दिखी अद्भुत ताकत
ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े कुछ अहम ऑपरेशनल डिटेल साझा करते हुए उन्होंने बताया कि इस मिशन की योजना Technological Information और ह्यूमेन इंटेलिजेंस के संयोजन से बनाई गई थी. इस दौरान कुल 21 टारगेट्स की पहचान की गई, जिनमें से 9 को अंतिम समय में कार्रवाई के लिए चुना गया. यह निर्णय ऑपरेशन के अंतिम दिन, अंतिम घंटे में लिया गया. उन्होंने कहा कि यह एक त्रिसेना (tri-services) ऑपरेशन था- थल सेना, वायु सेना और नौसेना की समन्वित योजना और भागीदारी के साथ यह कार्रवाई की गई, जिससे यह स्पष्ट संदेश जाए कि भारत एक संयुक्त और एकीकृत सैन्य शक्ति है.

तो इसलिए भारत ने युद्ध रोकने का किया फैसला?
उन्होंने युद्ध को नियंत्रित रूप से समाप्त करने की रणनीति की प्रशंसा करते हुए कहा, “जब हम किसी राजनीतिक या सैन्य उद्देश्य तक पहुँच जाते हैं, तब हमें उस स्तर पर युद्ध को रोकना चाहिए. युद्ध शुरू करना आसान है, लेकिन उसे नियंत्रित करना बहुत कठिन होता है. इसलिए ऑपरेशन सिंदूर के बाद युद्ध को रोकना एक ‘मास्टर स्ट्रोक’ था.” उप सेना प्रमुख ने आगे बताया कि पाकिस्तान ने खुद सीजफायर की पहल की क्योंकि उसे अंदेशा हो गया था कि यदि युद्ध और आगे बढ़ा, तो उसकी स्थिति बेहद खराब हो सकती है.

‘भारत अब कभी चुप नहीं बैठेगा’
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत अब पहले जैसी नीति नहीं अपनाएगा जहां दर्द को चुपचाप सह लिया जाए. उन्होंने दोहराया, “अब कोई दर्द सहने की गुंजाइश नहीं है. ज़रूरत पड़ी तो दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी. यह एक स्पष्ट और सख्त संदेश है.”

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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया गया था. इस हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान गई थी और इसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े फ्रंट संगठन द रेसिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली थी. भारत ने इस ऑपरेशन के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित आतंकी ढांचों को निशाना बनाया.

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