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Haryana में ढाबों पर बड़ा बदलाव, नियम तोड़े तो होगी सख्त कार्रवाई, जानिए क्या है सरकार का प्लान

Haryana: वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने साफ कहा है कि पानी की बर्बादी और गंदे पानी को बिना साफ किए बहाने की अनुमति अब नहीं दी जाएगी. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों का पालन हर ढाबे को हर हाल में करना होगा.

Image Source: Social Media
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Haryana Government New Plans For Dhabas: हरियाणा की पहचान बन चुके मुरथल के ढाबे अब सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी जाने जाएंगे. जीटी रोड पर स्थित इन ढाबों को लेकर सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है. वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने साफ कहा है कि पानी की बर्बादी और गंदे पानी को बिना साफ किए बहाने की अनुमति अब नहीं दी जाएगी. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों का पालन हर ढाबे को हर हाल में करना होगा.

पानी की बर्बादी और गंदा पानी अब नहीं चलेगा

बुधवार को मुरथल के ढाबा संचालकों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में मंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा कि पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल और सीवेज का सीधे बहाव अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने साफ कर दिया कि पर्यावरण से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. सरकार चाहती है कि ढाबे चलें, कारोबार बढ़े, लेकिन कानून और पर्यावरण के दायरे में रहकर.

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हर ढाबे को लगाना होगा एसटीपी या सीटीपी

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मंत्री ने बताया कि अब हर ढाबे को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) या कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट (CTP) के जरिए गंदे पानी को साफ करके दोबारा इस्तेमाल करने की व्यवस्था करनी होगी. इससे पानी की बचत भी होगी और प्रदूषण भी कम होगा. उन्होंने ढाबा संचालकों से अपील की कि वे स्वेच्छा से पर्यावरण के हित में कदम उठाएं, ताकि मुरथल को स्वाद के साथ-साथ स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन का भी मॉडल बनाया जा सके.

सीएलयू और टैक्स नियमों का पालन भी जरूरी

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मंत्री राव नरबीर सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि जो ढाबे चेंज ऑफ लैंड यूज (CLU) के बिना चल रहे हैं, उन्हें तुरंत नगर निगम से जुड़े टैक्स, शुल्क और जरूरी दस्तावेज पूरे करने होंगे. वहीं जिन ढाबों के पास पहले से सीएलयू की मंजूरी है, उन्हें भी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा. नियमों की अनदेखी करने वालों पर जुर्माना और ढाबा बंद (क्लोजर) करने जैसी कार्रवाई की जाएगी.

सरकार का मकसद कारोबार बंद करना नहीं, नियमों के साथ चलाना

मंत्री ने साफ किया कि सरकार का उद्देश्य किसी ढाबे या व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना नहीं है. सरकार चाहती है कि पर्यावरण सुरक्षित रहे और कारोबार भी सही तरीके से चलता रहे. उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को निर्देश दिए कि ढाबा संचालकों के साथ मिलकर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, ताकि नियम भी लागू हों और व्यवसाय पर अनावश्यक असर भी न पड़े.

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समय रहते नियम मानना ही सबसे बेहतर रास्ता

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बैठक में ढाबा संचालकों ने यह चिंता भी जताई कि एनजीटी के निरीक्षण के बाद जब क्लोजर आदेश आते हैं तो भारी जुर्माना लगाया जाता है. इस पर मंत्री ने कहा कि जुर्माने की गणना ढाबे के संचालन की अवधि के हिसाब से होती है, इसलिए बेहतर यही है कि सभी संचालक समय रहते नियमों का पालन कर लें. ऐसा करने से न तो जुर्माना लगेगा और न ही ढाबे बंद होने की नौबत आएगी.

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