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खुल गए बिभव-केजरीवाल के 7 'राज', AAP में कोहराम !

बिभव कुमार कैसे बन गए केजरीवाल के सबसे खास आदमी, देखिए 2005 से अब तक केजरीवाल और बिभव का सफर

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ये रिश्ता क्या कहलाता है, एक टीवी सीरीयल का नाम है लेकिन आज इस बात की चर्चा होने लगी कि बिभव और केजरीवाल का रिश्ता क्या कहलाता है। जो अपनी ही पार्टी की एक राज्यसभा सांसद को कुर्बान कर दिया। स्वाती मालीवाल ने केजरीवाल के पूर्व निजि सचिव पर आरोप लगाया कि उसने मारपीट की है लेकिन केजरीवाल इस बात पर अब तक सिर्फ दो शब्द बोलें है और वो दो शब्द है कि जवाब दूंगा। इससे ज्यादा केजरीवाल कुछ नहीं बोल पाए। इसके साथ ही साथ पूरी आम आदमी पार्टी बिभव को बचाने के लिए स्वाति मालीवाल का चरित्र हनन करने पर उतारु हो गई। धड़ाधड़ प्रेस कांफ्रेस की गई और स्वाति मालीवाल को पीडित से आरोपी बना दिया गया।आरोपी को पीडित दिखाने की कोशिश की गई लेकिन इसी बीच दिल्ली पुलिस सीएम केजरीवाल के सरकारी घर से बिभव कुमार को गिरफ्तार करके ले गई। इसी बीच बिभव ने भी कानूनी दांव-पेंच का इस्तेमाल करते हुए स्वाति पर आरोप लगाते हुए कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी और मांग कर दी की उसे अग्रिम जमानत दे दी जाए। अब इस मामले में क्या होगा वो तो देखने वाली बात होगी लेकिन आज हम आपको बताएंगे कि क्यों बिभव कुमार केजरीवाल के इतने खास कैसे हो गए कि स्वाती मालीवाल को कुर्बान कर दिया। 

सबसे पहले आप समझिए कि बिभव कुमार बिहार के सासाराम से आते है। 2004 के बीच 2006 के बीच पत्रकारिता का कोर्स किया लेकिन सक्रिय मीडिया में काम नहीं किया बल्कि 2005 में ही केजरीवाल और सिसोदिया के एनजीओ कबीर से जुड़ गए। अब इस एनजीओं कबीर की कहानी बेहद दिलचस्प है और इस कबीर की कहानी रॉ के पूर्व अधिकारी आर. एस एन सिंह अपनी किताब भारत के अंदरुनी शत्रु में लिखते है। आर. एस एन सिंह सबूतों के साथ बताते है कि इस संस्था को अमेरिकी एजेंसी सीआईए से लाखों डॉलर की फंडिग मिली थी। अब वो फंडिग क्यों दी गई थी, इस बात की पुष्टी तो खुद केजरीवाल या फिर सीआईए ही कर सकती है क्योंकि आर. एस एन सिंह ने अपनी किताब में सबूतों के साथ एक एक दस्तावेज उस किताब में दिए है। उन्होने केजरीवाल को इस देश के लिए खतरा बताया है और ये बिभव भी उसी कबीर संस्था जे जुड़ा था। जिसे बाहरी देशों से फंडिग मिली थी,अब इसके बाद की कहानी सुनिए। 

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केजरीवाल और सिसोदिया ने बिभव को आरटीआई के तहत काम करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। यहीं से बिभव केजरीवाल और सिसोदिया की नजरों में आने लगे थे। आपको ये भी बता दूं कि एक वक्त में केजरीवाल को आरटीआई मैन भी कहा जाने लगा था। सबसे पहली पहचान केजरीवाल की आईटीआई लगाने के लिए ही बनी थी और जैसे जैसे आरटीआई का काम सफल होने लगा बिभव दूरदर्शन पर एक्सपर्ट के तौर पर जुड़ने लगा। उसके बाद कबीर ने ग्राम स्वराज पर काम शुरु किया। उसमें भी बिभव के पास अहम जिम्मेदारी दी गई और से वही स्वराज है जिससे केजरीवाल के दिल्ली की जनता के दिलों में जगह बनाई थी। राम स्वराज के तहत केजरीवाल ने लोगों को हसीन सपने दिखाए थे। कहा था उनके ज्यादातर मसलों का समाधान ग्राम स्वराज के तहत ही किया जाएगा। गांवों का विकास कैसे करना है, किस योजना में कितना पैसा लगाना है, सब ग्राम स्वराज हे तहत होगा और भी ढेरों सपने केजरीवाल ने जनता को दिखाए थे। उसके बाद इंडिया अगेंस्ट करप्शन से भी बिभव कुमार जुड़ा रहा और केजरवाल को राय देने का भी काम किया। इसके बाद साल आया 2013 जब आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जीत दर्ज की। यहां से केजरीवाल के जुडे सारे मामले बिभव कुमार बन गया। 2015 में बिभव को केजरीवाल का निजी सचिव नियुक्त कर दिया गया हालांकि अभी अप्रैल के महिने में उपराज्यपाल ने बिभव को इस पद से हटा दिया क्योंकि इस पद के लिए केजरीवाल को अयोग्य पाया गया था और बिभव पर कई तरह के आरोप भी लगे थे लेकिन बिभव केजरवाल का कितना कास था, उस बात का अंदाजा आप लागाइए कि जब केजरीवाल जेल में थे, तब केजरीवाल ने 6 लोगों से मिलने की अर्जी दी थी और इस लिस्ट में ना तो सौरभ भारद्वाज का नाम था, ना आतिशी सिंह का नाम था, बल्कि बिभव कुमार का नाम इस लिस्ट में था और जैसे ही बिभव पर तलवार लटकती है।

लंदन
में बैठे राधव चड्ढा भी देश वापस जाते है, और केजरीवाल से मुलाकात करते हैजिस थाने में बिभव को लेकर जाया गया। वहां भी पहुंत जाते है, तो क्या ऐसा कहना गलत होगा कि बिभव केजरीवाल के लिए कुर्सी से भी ज्यादा जरुरी है। बिभव को पाक साफ दिखाने के लिए शोसल मीडिया पर एक कैंपेन चलाया जाता है। पूरी आम आदमी पार्टी एक सुर में बिभव का झंड़ा बुलंद करने में जुट जाती है,तो कुछ तो खास होगा बिभव कुमार में। 

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