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रामलला की भक्ति में डूबे भूटान के PM मंदिर की नक्काशी को निहारते रहे, अयोध्या में दिखा सनातनी अंदाज

भूटान के प्रधानमंत्री करीब पौने दो घंटे तक रामलला के दरबार में मौजूद रहे. इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से पूजा भी की. अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनने के बाद ये पहला मौका है जब किसी विदेशी प्रधानमंत्री ने मंदिर में दर्शन किए हैं.

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रामनगरी अयोध्या की धरती 5 सितंबर को एक ऐतिहासिक पल का गवाह बनी. जब भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे अपनी पत्नी संग राम जन्मभूमि मंदिर पहुंचे. वह करीब पौने दो घंटे तक रामलला के दरबार में मौजूद रहे. इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से पूजा भी की. अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनने के बाद ये पहला मौका है जब किसी विदेशी प्रधानमंत्री ने मंदिर में दर्शन किए हैं. 

राम मंदिर की भव्यता देख भूटान PM दाशो शेरिंग तोबगे मंत्रमुग्ध हो गए. उनके साथ भूटान और भारत के विदेश मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे. दाशो शेरिंग विशेष विमान से अयोध्या पहुंचे थे. यहां मंत्री सूर्य प्रताप साही ने उनका ज़ोरदार स्वागत किया. अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान उन्होंने राम दरबार में दर्शन के साथ ही हनुमानगढ़ी मंदिर और कुबेरटीला में जलाभिषेक के साथ पूजा-अर्चना भी की. 

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चंपत राय ने जताई खुशी

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प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे के रामलला दर्शन करने पर राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने खुशी जताई. चंपत राय ने कहा, ‘भारत के अलावा किसी दूसरे देश के प्रधानमंत्री पहली बार अयोध्या में रामलला का दर्शन करने के लिए पधारे. दाशो शेरिंग टोबगे एक घंटा 40 मिनट तक मंदिर परिसर में रहे.’ 

यूं तो राम मंदिर का कोना-कोना भव्य और आकर्षक है लेकिन भूटान के PM को मंदिर की नक्काशी ने सबसे ज़्यादा प्रभावित किया. महासचिव चंपत राय ने बताया कि, भूटान के प्रधानमंत्री को मंदिर की नक्काशी काफी अच्छी लगी. इस दौरान PM दाशो शेरिंग तोबगे का श्रद्धामयी अंदाज में दिखे. उन्होंने राम मंदिर और अयोध्या के इतिहास के बारे में भी जानकारी ली.

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भगवान बौद्ध की तपोस्थली को किया प्रणाम 

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अयोध्या से पहले भूटान के PM शेरिंग तोबगे ने बिहार के राजगीर में बौद्ध मंदिर के दर्शन किए थे. यहां शेरिंग तोबगे नवनिर्मित रॉयल भूटान बौद्ध मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा में शामिल हुए. बौद्ध रीति-रिवाजों के साथ इस मंदिर का उद्घाटन किया गया है. राजगीर भगवान बुद्ध की तपोभूमि है और बौद्ध धर्म में इसका ख़ास महत्व है. ऐसे में भूटान के PM इस ऐतिहासिक बौद्ध स्थल के ऐतिहासिक पल के गवाह बने. 

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