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पहलगाम हमले से पहले सोशल मीडिया पर एक्टिव थे आतंकी, जैश ग्रुप में मांगी गई थी हथियारों की जानकारी
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की जांच में NIA को सोशल मीडिया से जुड़े चौंकाने वाले सबूत मिले हैं। हमले से पहले 'Resistance Time' नामक ग्रुप में आतंकी सक्रिय थे, जिन्होंने "I need gun" जैसी पोस्ट से घाटी में हथियारों की मांग की।
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24 अप्रैल की सुबह जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पर्यटक वादियों का आनंद ले रहे थे, तभी अचानक गोलियों की आवाज़ से पूरी घाटी कांप उठी. आतंकी हमले की ये खबर देशभर में जंगल की आग की तरह फैल गई. कुछ ही मिनटों में सुरक्षा बल मौके पर पहुंच गए. कई जानें गईं, कई घायल हुए और एक बार फिर आतंक की काली परछाई कश्मीर की घाटियों पर मंडराने लगी. लेकिन इस बार मामला सिर्फ हमले तक सीमित नहीं था, इसकी तह में छिपी थी एक डिज़िटल साजिश.
एनआईए की जांच में बड़ा खुलासा
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) जब इस हमले की जांच में जुटी तो शुरुआती सुरागों ने ही उन्हें चौंका दिया. एनआईए को ऐसे डिजिटल फुटप्रिंट्स मिले जो साफ इशारा कर रहे थे कि आतंकी इस हमले से पहले और बाद में सोशल मीडिया पर पूरी तरह एक्टिव थे. जांच एजेंसी को पता चला कि एक खास एन्क्रिप्टेड एप्लिकेशन पर ‘Resistance Time’ नाम का एक ग्रुप ऑपरेट हो रहा था.
इस ग्रुप में 146 सदस्य थे, जिनमें ज़्यादातर पाकिस्तान से थे. इनमें कई कट्टरपंथी विचारधारा के लोग थे, जिनके चैट्स में जहर भरा हुआ था. इसी ग्रुप में ‘jaish’ नाम के एक यूज़र ने हमला होने के अगले ही दिन लिखा – “I need gun…”। उसने घाटी में हथियारों की खरीद-फरोख्त करने वाले डीलरों की जानकारी भी मांगी. ये साफ था कि हमले की साजिश सिर्फ सीमा पार से नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर भी गढ़ी जा रही थी.
जांच में यह भी सामने आया कि इस ग्रुप में ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) को कोडवर्ड के ज़रिये सतर्क किया गया था. एक मैसेज में लिखा गया – “Aise logo ka khayal rakhe…” जिसका मतलब था कि कुछ खास लोगों को तैयार और अलर्ट रखा जाए. इतना ही नहीं, पहलगाम हमले का एक वीडियो भी इसी ग्रुप में शेयर किया गया. यह वीडियो आतंकियों ने खुद रिकॉर्ड किया था, जिससे उनकीमंशा साफ ज़ाहिर होती है.
NIA का जिपलाइन ऑपरेटर पर गहराया शक
जांच की रफ्तार तेज हुई तो एनआईए की निगाहें एक और संदिग्ध पर जा टिकीं मुजम्मिल, जो उस इलाके में जिपलाइन ऑपरेटर के तौर पर काम कर रहा था. सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह बार-बार “अल्लाह हू अकबर” कहते हुए दिखाई दे रहा था.
एनआईए को शक है कि मुजम्मिल को आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी पहले से थी. जब गोलीबारी शुरू हुई तो भी उसने पर्यटकों को रोकने की बजाय जिपलाइन पर भेजना जारी रखा. पूछताछ में मुजम्मिल की बातों में विरोधाभास पाया गया. वह जो कह रहा था, वो वायरल वीडियो से मेल नहीं खा रहा था. अब जांच एजेंसियां यह जानने में जुटी हैं कि क्या वह किसी आतंकी संगठन का मददगार तो नहीं. वैसे आपको बता दें कि हमले के बाद दिल्ली में भी हलचल तेज हो गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत एक हाईलेवल मीटिंग बुलाई. इस मीटिंग में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, सीडीएस और तीनों सेनाओं के प्रमुख मौजूद थे.
मीटिंग के दौरान पीएम मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए “आतंक का जड़ से खात्मा करना, सेना को खुली छूट दी गई है. जवाब कब और कैसे देना है, सेना खुद तय करे.” इस निर्देश के बाद सुरक्षा बल पूरी तरह अलर्ट पर हैं. माना जा रहा है कि किसी भी वक्त एक बड़ी जवाबी कार्रवाई हो सकती है.
भारत के रुख से घबराकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने तुरंत संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को फोन किया. उन्होंने कहा – “पाकिस्तान आतंकवाद का विरोध करता है. हम खुद इससे पीड़ित हैं. भारत हमला करने वाला है, कृपया रोकिए.” लेकिन भारत अब सिर्फ बातें नहीं सुनना चाहता. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव को दो टूक कहा “हम हमले के गुनहगारों को सज़ा देंगे. भारत आतंक को बर्दाश्त नहीं करेगा.”
इस बार माहौल अलग है. सरकार का रुख सख्त है. सेना तैयार है. और देश का हर नागरिक चाहता है कि आतंकियों और उनके सरपरस्तों को ऐसा जवाब मिले जो उन्हें हमेशा याद रहे.
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