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बांग्लादेशी घुसपैठिए देश के लिए घातक... होली पर देश को दहलाने की थी साजिश, दिल्ली पुलिस का चौंकाने वाला खुलासा

दिल्ली में पकड़े गए संदिग्ध मॉड्यूल की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के अनुसार यह नेटवर्क लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा है और कथित तौर पर ISI की साजिश के तहत बांग्लादेशी मूल के युवकों को शामिल किया गया.

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नई दिल्ली से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है. राजधानी में सक्रिय एक संदिग्ध आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है, जिसे लेकर जांच एजेंसियों ने गंभीर खुलासे किए हैं. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक यह नेटवर्क प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ा हुआ है और इसके तार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी (ISI) से भी जुड़े बताए जा रहे हैं.

अधिकारियों का दावा है कि इस मॉड्यूल के निशाने पर देश के चार बड़े महानगर थे. इनमें दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार कुछ संवेदनशील स्थानों की रेकी भी की जा चुकी थी और होली के मौके पर समन्वित हमलों की योजना बनाई जा रही थी. खुफिया इनपुट मिलने के बाद स्पेशल सेल ने तेजी से कार्रवाई की और समय रहते इस साजिश को नाकाम कर दिया.

बांग्लादेश से संचालित हो रहा था नेटवर्क

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जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क का संचालन बांग्लादेश में बैठा एक कमांडर कर रहा था. अधिकारियों के अनुसार बांग्लादेशी मूल के कुछ युवकों को इस साजिश का हिस्सा बनाया गया. उन्हें सोशल मीडिया के जरिए पहले संपर्क में लाया गया और फिर कथित तौर पर बांग्लादेश बुलाकर बैठक की गई, जहां हमलों की पूरी रूपरेखा तैयार की गई. पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस मॉड्यूल का मकसद बड़े शहरों में डर और अराजकता फैलाना था. संदिग्धों को किराए पर अपार्टमेंट लेने, सुरक्षित ठिकाने तैयार करने और हथियार जुटाने के निर्देश दिए गए थे. मोबाइल फोन की फॉरेंसिक जांच में चैट और वीडियो जैसे कई अहम डिजिटल सबूत मिले हैं, जो जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो रहे हैं.

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हाफिज सईद और लखवी से संपर्क के दावे

जांच से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि इस मॉड्यूल का हैंडलर सीधे हाफिज सईद और जैकी उर रहमान लखवी के संपर्क में था. दोनों नाम पहले भी भारत विरोधी आतंकी गतिविधियों में सामने आ चुके हैं. अधिकारियों के मुताबिक यह हैंडलर आईएसआई और बांग्लादेशी मूल के एक अन्य संदिग्ध के बीच कड़ी का काम कर रहा था. पुलिस का दावा है कि भारत में अवैध रूप से रह रहे कुछ बांग्लादेशी नागरिकों को इस नेटवर्क से जोड़ा गया. इसके लिए कथित तौर पर फंडिंग की व्यवस्था भी की गई, ताकि हमले सुनियोजित और एक साथ किए जा सकें.

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फिर सक्रिय हुआ नेटवर्क

स्पेशल सेल के अनुसार इस साजिश का प्रमुख चेहरा पहले भी गिरफ्त में आ चुका है. वर्ष 2007 में उसे आत्मघाती हमले की साजिश में एके-47 और हैंड ग्रेनेड के साथ पकड़ा गया था. सजा पूरी करने के बाद वह 2018 में जेल से बाहर आया और दोबारा सक्रिय हो गया. जांच एजेंसियों का कहना है कि रिहाई के बाद उसने पुराने संपर्कों को फिर जोड़ा और सोशल मीडिया के जरिए युवकों को प्रभावित करना शुरू किया. डिजिटल ट्रेल की जांच में कई संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिले हैं. अधिकारियों के अनुसार यह मॉड्यूल किसी एक घटना तक सीमित नहीं था, बल्कि लंबी योजना का हिस्सा था.

पोस्टरबाजी से खुला राज

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इस पूरे मामले में एक दिलचस्प पहलू यह भी है कि पकड़े गए आठ संदिग्धों में से चार ने दिल्ली में ‘फ्री कश्मीर’ जैसे विवादित पोस्टर लगाए थे. इसके बाद वे तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल लौट गए. जांच एजेंसियों ने इसी कड़ी को पकड़कर आगे की जांच बढ़ाई और धीरे-धीरे नेटवर्क का पूरा ढांचा सामने आने लगा. अधिकारियों का मानना है कि पोस्टरबाजी एक तरह का ट्रायल रन था, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की प्रतिक्रिया परखी जा रही थी.

कई राज्यों में छापेमारी जारी

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल का ऑपरेशन अभी खत्म नहीं हुआ है. कुछ संदिग्धों के फरार होने की आशंका के चलते कई राज्यों में छापेमारी की जा रही है. सभी आरोपियों को दिल्ली लाकर पूछताछ की जाएगी. सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े शहरों में अलर्ट जारी कर दिया है और संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती तो होली जैसे त्योहार के मौके पर बड़ा नुकसान हो सकता था. फिलहाल जांच एजेंसियां नेटवर्क के बाकी सिरों तक पहुंचने में जुटी हैं.

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बताते चलें कि यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि आतंकी संगठन किस तरह सोशल मीडिया और लोकल नेटवर्क का इस्तेमाल कर युवाओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं. लेकिन साथ ही यह भी साफ है कि सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं और किसी भी साजिश को समय रहते नाकाम करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. देश की सुरक्षा के लिए ऐसी मुस्तैदी बेहद जरूरी है.

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