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'TikTok से नहीं हटा प्रतिबंध...', भारत सरकार ने किया साफ-साफ खंडन, कहा- अफवाहों पर न दें ध्यान

भारत सरकार ने साफ किया है कि टिकटॉक (TikTok) पर से प्रतिबंध हटाने की कोई योजना नहीं है. इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने कहा कि टिकटॉक को अनब्लॉक करने का आदेश जारी नहीं हुआ है और इस तरह की खबरें भ्रामक हैं.

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भारत में शुक्रवार को सोशल मीडिया पर अचानक ऐसी खबरें फैलने लगीं कि चाइनीज वीडियो एग्रीगेटर ऐप टिकटॉक (TikTok) पर से प्रतिबंध हटा लिया गया है. कई यूजर्स ने दावा किया कि वे टिकटॉक की वेबसाइट को एक्सेस कर पा रहे हैं. इस खबर ने देशभर में हलचल मचा दी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसको लेकर खूब चर्चाएं शुरू हो गईं. लेकिन देर शाम इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि सरकार ने टिकटॉक को लेकर कोई अनब्लॉकिंग आदेश जारी नहीं किया है. यानी टिकटॉक भारत में अब भी प्रतिबंधित है और इस तरह की खबरें पूरी तरह झूठी और भ्रामक हैं. सूत्रों ने कहा कि भारत सरकार का रुख पहले जैसा ही है और टिकटॉक सहित जिन एप्लिकेशंस को प्रतिबंधित किया गया था, उन पर से बैन हटाने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है. साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि अफवाहों पर ध्यान न दिया जाए.

कैसे फैली अफवाह 

दरअसल, शुक्रवार सुबह कुछ इंटरनेट यूजर्स ने बताया कि वे टिकटॉक की वेबसाइट खोल पा रहे हैं. लेकिन वेबसाइट खुलने के बावजूद वे लॉग इन नहीं कर पा रहे थे, न ही वीडियो अपलोड और देख पा रहे थे. यही वजह रही कि यह भ्रम फैल गया कि शायद टिकटॉक फिर से सक्रिय हो गया है. टेक विशेषज्ञों का कहना है कि कभी-कभी तकनीकी कारणों से वेबसाइट अस्थायी रूप से खुल सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि बैन हटा दिया गया है. सूत्रों के अनुसार, इंटरनेट सेवा प्रदाता टिकटॉक की वेबसाइट और ऐप को लगातार ब्लॉक किए हुए हैं. फिर भी यह साफ नहीं हो सका कि कुछ यूजर्स इसे कैसे एक्सेस कर पा रहे थे. इतना जरूर है कि भारत में टिकटॉक का ऐप किसी भी ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं है.

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अलीएक्सप्रेस और शीइन पर क्या है स्थिति

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टिकटॉक के साथ ही सोशल मीडिया पर यह सवाल भी उठने लगे कि क्या चीन की ई-कॉमर्स वेबसाइट अलीएक्सप्रेस (AliExpress) और कपड़े बेचने वाली ऑनलाइन वेबसाइट शीइन (SHEIN) पर से भी बैन हटा लिया गया है. इसको लेकर अभी सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सरकार सार्वजनिक रूप से कोई घोषणा नहीं करती, तब तक इन पर से बैन हटने की संभावना नहीं मानी जा सकती.

2020 में क्यों लगा था बैन

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टिकटॉक की कहानी भारत में अचानक खत्म नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे गंभीर कारण थे. जून 2020 में भारत सरकार ने 59 मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया था, जिनमें ज्यादातर चीनी ऐप शामिल थे. टिकटॉक, यूसी ब्राउजर, वीचैट जैसे बड़े नाम भी उसी सूची में थे. इस कदम के पीछे सबसे बड़ी वजह थी भारत की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा खतरा. सरकार ने साफ कहा था कि ये ऐप्स भारतीय यूजर्स का डेटा लीक कर रहे हैं और संवेदनशील जानकारियां चीन के सर्वर्स तक भेज रहे हैं. यह सीधे तौर पर भारत की अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा था.

गलवान की घटना के सरकार ने उठाया था कदम 

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया था जब पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी. 15-16 जून 2020 की रात को हुई इस घटना में भारत ने अपने कई बहादुर जवान खो दिए थे. इसके बाद से दोनों देशों के रिश्ते में तनाव और अविश्वास की स्थिति बन गई थी. उसी पृष्ठभूमि में गृह मंत्रालय ने इन 59 ऐप्स पर बैन की घोषणा की थी.

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डेटा सुरक्षा पर गंभीर सवाल

इस मामले को लेकर तकनीकी विशेषज्ञों का कहना था कि टिकटॉक और अन्य चीनी ऐप्स यूजर्स के मोबाइल से लोकेशन, मैसेज और निजी फाइल्स जैसी संवेदनशील जानकारी इकट्ठा करते थे. ये जानकारियां चीन स्थित सर्वर्स पर ट्रांसफर होती थीं. इस वजह से न सिर्फ व्यक्तिगत निजता पर खतरा था, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर मामला बन गया था. भारत सरकार ने उस समय साफ कहा था कि राष्ट्रीय हित सबसे पहले है. कोई भी एप्लिकेशन चाहे कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो, यदि वह देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए खतरा है, तो उसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.

टिकटॉक यूजर्स हुए थे मायूस 

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टिकटॉक भारत में बेहद लोकप्रिय था. छोटे वीडियो बनाने और देखने के लिए इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल लाखों यूजर्स करते थे. खासकर युवाओं में इसकी दीवानगी अलग ही स्तर पर थी. लेकिन जब राष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर हो, तो लोकप्रियता से ऊपर सुरक्षा को तरजीह दी जाती है. यही कारण था कि टिकटॉक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर भी सरकार ने सख्ती दिखाई. इस पर बैन लगने के बाद इसके यूजर्स मायूस भी हुए थे. 

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