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Baba Siddique Murder Case: जानें सुपारी, शूटर्स और साजिश की पूरी कहानी

Baba Siddique Murder Case : बाबा सिद्दीकी, महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता, की हत्या ने पूरे राज्य को हिला कर रख दिया है। सिद्दीकी को वाई श्रेणी की सुरक्षा मिली हुई थी, फिर भी तीन शूटरों ने बांद्रा ईस्ट में उनके बेटे के कार्यालय के बाहर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी।

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Baba Siddique Murder Case: महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री और एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या ने महाराष्ट्र की राजनीति को हिलाकर रख दिया।   इस हत्याकांड की योजना बहुत गहरी साजिश का हिस्सा थी। दरअसल शनिवार को जब 66 वर्षीय बाबा सिद्दीकी अपने बेटे जीशान के बांद्रा स्थित ऑफिस से निकल रहे थे, तभी तीन शूटरों ने 9.9 एमएम पिस्तौल से उन पर हमला कर दिया।  हमले में घायल हुए बाबा सिद्दीकी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

सुपारी किलिंग की पूरी योजना

सवाल अब यह है कि जब उनके पास वाई श्रेणी की सुरक्षा थी, फिर भी कैसे उन्हें निशाना बनाया जा सका। बताया जा रहा है कि शूटरों ने उन्हें बेहद करीब से गोली मारी थी। बाबा सिद्दीकी जिस कार में थे, वह बुलेटप्रूफ थी, फिर भी हमलावरों ने इस घटना को अंजाम दिया। गोली कार के बुलेटप्रूफ शीशे को चीरते हुए निकल गई, जो कई सवाल खड़े करती है। इस घटना में छह गोलियां चलाई गईं, जिनमें से एक गोली घातक साबित हुई।

मिली जानकारी के अनुसार, हत्या के लिए शूटरों को 50,000 रुपये की सुपारी दी गई थी। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियारों को प्रीपेड कूरियर के जरिए शूटरों तक पहुंचाया गया। यह सुपारी पिछले दो महीनों से प्लान की गई थी, लेकिन गणेशोत्सव के दौरान हमले को टाल दिया गया। शूटर्स ने मुंबई के कुर्ला में किराए पर कमरा लेकर प्लान बनाया और बाबा सिद्दीकी की दिनचर्या पर नजर रखी।

वैसे आपको बता दें कि बाबा सिद्दीकी का नाम पहले भी विवादों में रहा है। उनका नाम दाऊद इब्राहिम के साथ जोड़ा गया था। एक समय पर दाऊद ने उन्हें जान से मारने की धमकी भी दी थी। लेकिन फिलहाल इस मामले में शूटर्स का संबंध लॉरेंस बिश्नोई गैंग से पाया गया। 
शूटरों की पहचान और गिरफ्तारी
मुंबई पुलिस की जांच में सामने आया कि तीनों शूटर्स यूपी और हरियाणा के रहने वाले हैं। धर्मराज कश्यप और शिवकुमार गौतम उर्फ शिवा उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के हैं, जबकि गुरमेल सिंह हरियाणा के करनाल से है। पुलिस ने धर्मराज और गुरमेल को पकड़ लिया है, जबकि शिवा अभी भी फरार है। पुलिस के अनुसार, ये सभी शूटर्स पहले पंजाब की जेल में एक साथ बंद थे, और वहां उनकी मुलाकात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से हुई थी। इस गैंग का सदस्य बनने के बाद इन्होंने यह कदम उठाया। पुलिस का यह भी मानना है कि यह सभी अपने नाम और पहचान के लिए भी इस कांड को अंजाम देने के लिए तैयार हुए थे।

महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल

बाबा सिद्दीकी की हत्या के पीछे के राजनीतिक कारणों पर भी चर्चा हो रही है। महाराष्ट्र की राजनीति में बाबा सिद्दीकी का नाम और प्रभाव काफी बड़ा था, इसलिए उनकी हत्या से राजनीति में उथल-पुथल मच गई है। हत्या के बाद से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसने इस हत्याकांड का प्लान बनाया और इसका उद्देश्य क्या था?

इस हत्याकांड ने न केवल मुंबई की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति में एक नया मोड़ भी ला दिया है। पुलिस की जांच में नए-नए खुलासे हो रहे हैं, और ये देखना बाकी है कि इस हत्या के पीछे की साजिश को कब तक पूरी तरह से उजागर किया जाएगा।

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