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'आजम खान खुद की पार्टी बनाएं...', अखिलेश यादव पर भड़के मौलाना शहाबुद्दीन, कहा - सपा को उनकी हैसियत याद दिलाना जरूरी
मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि 'हाईकोर्ट के आदेश पर आजम खान सीतापुर जेल से रिहा हुए हैं. उनकी रिहाई पर मुस्लिम समाज में बेहद उत्साह है, मेरी सलाह है कि खुद की अपनी पार्टी बनाएं.'
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सपा नेता व पूर्व मंत्री आजम खान 23 महीने बाद जेल से रिहा हुए हैं. उनकी रिहाई मंगलवार 23 सितंबर को दोपहर में हुई. सपा के वरिष्ठ नेता की रिहाई पर उनके समर्थकों में खुशी का माहौल है. उनके जेल से निकलने से कुछ देर पहले सैकड़ो समर्थकों की भीड़ जेल से बाहर उनका स्वागत करने के लिए खड़ी थी. आजम खान के बाहर आने से यूपी के सियासत में हलचल तेज हो गई है. उनको लेकर यह भी दावा किया गया है कि वह बसपा में शामिल हो सकते हैं. इस बीच आजम खान के जेल से आने के बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर बड़ा आरोप लगाते हुए आजम खान को खुद की अपनी नई पार्टी बनाने की सलाह दी है.
'आजम खान खुद की अपनी नई पार्टी बनाएं'
मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि 'हाईकोर्ट के आदेश पर आजम खान सीतापुर जेल से रिहा हुए हैं. उनकी रिहाई पर मुस्लिम समाज में बेहद उत्साह है, क्योंकि वह पिछले कई माह से जेल में बंद थे और रामपुर की जनता तथा शहर के विकास के लिए उन्होंने कई अहम काम किए हैं. ऐसे में आजम खान जेल से बाहर आने के बाद पूरे प्रदेश में अपने बिखरे हुए साथियों को एकजुट करें और नई राजनीतिक पार्टी का गठन करें.'
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'2027 विधानसभा चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारें'
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रजवी ने आजम खान को सुझाव देते हुए कहा कि '2027 के विधानसभा चुनाव में वह अपने प्रत्याशी मजबूती से उतारें, ताकि समाजवादी पार्टी को उनकी हैसियत का पूरा अंदाजा हो. उत्तर प्रदेश का मुसलमान आजम खान के साथ खड़ा दिखाई देगा और उनकी नई राजनीतिक पहल का समर्थन करेगा.'
'मुश्किल घड़ी में अखिलेश ने दिया धोखा'
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मौलाना रजवी ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि 'आजम खान उस नेता का नाम है, जिन्होंने समाजवादी पार्टी को खून-पसीने से सींचा. मुलायम सिंह यादव को ‘मुल्ला मुलायम’ बनाया और उनकी मेहनत का नतीजा था कि मुलायम और फिर अखिलेश यादव कई बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन अफसोस की बात यह है कि मुश्किल घड़ी में अखिलेश यादव ने उनका साथ नहीं दिया. आजम खान और उनका परिवार अकेले ही अपनी लड़ाई लड़ता रहा. यह अहसान फरामोशी का उदाहरण है.'
'आजम खान की रिहाई मुसलमानों के लिए प्रेरणा'
शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि 'आजम खान की रिहाई मुसलमानों के लिए एक प्रेरणा है और यह उनके अधिकारों, सामाजिक न्याय और राजनीतिक हिस्सेदारी की लड़ाई में महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगी.'
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23 महीने बाद जेल से रिहा हुए आजम खान
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बता दें कि आजम खान की रिहाई मंगलवार की सुबह होनी थी, लेकिन बेल बॉन्ड में उनके पते में गलती पाए जाने के कारण रिहाई प्रक्रिया रुक गई. इसके बाद मंगलवार दोपहर को आजम खान की रिहाई की प्रक्रिया पूरी हुई और वह कड़ी सुरक्षा के बीच गाड़ी में सवार होकर जेल परिसर से बाहर निकले. आजम खान की रिहाई के मद्देनजर उनके परिवार के सदस्य सीतापुर में मौजूद रहे. जेल के बाहर समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह देखने को मिला. इसके साथ ही जिला प्रशासन ने सीतापुर जेल रोड पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे. भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा और ड्रोन से निगरानी की गई.