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योगी से इस्तीफा मांगकर खुद फंसे अविमुक्तेश्वरानंद, अखाड़ा परिषद ने अविमुक्तेश्वरानंद की वसीयत को बताया फर्जी

महाकुंभ में भगदड़ के बाद ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने CM योगी को हटाने का परमधर्मादेश जारी किया। लेकिन इसके बाद अविमुक्तेश्वरानंद खुद ही बुरे फंस गए. क्योंकि अब स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की वसीयत को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने फर्जी करार दिया है। यानी अब उनके ही पद पर बवाल छिड़ गया

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28 जनवरी की रात महाकुंभ में जो कुछ हुआ, उसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. यह हादसा था या फिर साज़िश? इसका पता लगाने के लिए टीम योगी पूरी मुस्तैदी के साथ कुंभ में जुटी हुई है, और जांच रिपोर्ट भी सौंपी जा रही है. लेकिन इस जांच में ख़लल डालने और योगी सरकार को बदनाम करने में विपक्ष बुरी तरह जुटा हुआ है. राहुल से लेकर अखिलेश, और अखिलेश से लेकर ममता बनर्जी तक, ऐसे मुद्दों को भुना रहे हैं जैसे दो मिनट में योगी आदित्यनाथ की सरकार गिरवा देंगे. विपक्ष के साथ-साथ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जमकर चीख-चिल्ला रहे हैं.

कुंभ में योगी से पंगा लेकर फंसे अविमुक्तेश्वरानंद!


हैरानी की बात यह है कि शंकराचार्य इस कदर योगी से नफ़रत करते हुए मैदान में कूद पड़े और छूटते ही योगी को पद से हटाने की साज़िश रच डाली. परमधर्मादेश जारी कर दिया. लेकिन शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ख़ुद ही ऐसे फंसे कि अब अपना पद बचाने के लाले पड़ गए हैं. भारतीय अखाड़ा परिषद ने उनकी हरकतों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की वसीयत को अखिल भारतीय परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने फ़र्ज़ी करार दिया है. इसके साथ ही कुंभ की व्यवस्थाओं की तारीफ करते हुए रवींद्र पुरी ने कहा:

"स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का शंकराचार्य पद पर हुआ पट्टाभिषेक गलत है. इसकी उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए. CM योगी सनातन धर्म की रक्षा और संतों की सेवा के पर्याय बन गए हैं. महाकुंभ हादसा एक महज संयोग था. इसे लेकर CM के इस्तीफे का परमादेश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद कैसे जारी कर सकते हैं? अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने गुरु की फर्जी वसीयत के आधार पर खुद को शंकराचार्य घोषित किया है. गुरु की समाधि से पहले ही उन्होंने अपना पट्टाभिषेक करा लिया था, जो विधि सम्मत नहीं है. इसकी जांच कराई जानी चाहिए. सभी 13 अखाड़ों के पदाधिकारी और शीर्ष संत CM योगी के साथ हैं."

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तो अब योगी के ख़िलाफ़ कुंभ की घटना को लेकर विपक्षियों की तरह साज़िश रचने की कोशिश कर रहे अविमुक्तेश्वरानंद की ख़ुद जान में आ गई है. संतों ने चारों तरफ़ से उनके ख़िलाफ़ मोर्चा इसलिए खोला है, क्योंकि वह बेवजह माहौल बना रहे हैं, जबकि सरकार युद्ध स्तर पर श्रद्धालुओं की मदद करने में जुटी है. अधिकारी भगदड़ की जांच कर रहे हैं. साधु-संतों को भगदड़ की सूचना पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन दो दिन बाद अविमुक्तेश्वरानंद को याद आया कि मैदान में आकर योगी सरकार को निशाना बनाना है. खैर, अविमुक्तेश्वरानंद को वैसे भी कांग्रेसी कहा जाता है, क्योंकि समय-समय पर वह मोदी हो या योगी सरकार, उन्हें कोसने का मौका ढूंढते नजर आए हैं. तो अब कुंभ की घटना पर योगी सरकार को छोड़ते नहीं, आव देखा ना ताव, पहले मीडिया के सामने आकर योगी सरकार पर जमकर बरसे.

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"यह लोग काबिल नहीं हैं, उन्होंने जनता को सही जानकारी नहीं दी. संत समाज के साथ धोखा किया. जब इतनी बड़ी घटना हो गई, तब वह क्यों छुपा रहे थे, इस बात की पीड़ा बहुत ज्यादा है. हमें मृतक आत्माओं की शांति के लिए उपवास रखने का भी मौका नहीं दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को चाहिए, तत्कालीन उनको हटाकर किसी सक्षम व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाए. अभी भी यहां करोड़ों लोग आने वाले हैं. वह भीड़ नहीं संभालेंगे, बल्कि लीपापोती करेंगे."

कुंभ में अब साधु-संतों ने अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, और उनके पद की जांच की मांग की है. तो यह कहना भी गलत नहीं होगा कि जो शंकराचार्य योगी की कुर्सी हिलाने के लिए माहौल बना रहे थे, और जमकर चिल्ला रहे थे, उनकी खुद की कुर्सी अब खतरे में पड़ती दिखाई दे रही है.

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