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बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हुई हिंसा पर खौला ओवैसी का खून... ISI, चीन समेत सभी भारत विरोधी ताकतों को लेकर चेताया

बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने चिंता जताई है. उन्होंने दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की हत्या की कड़ी निंदा करते हुए इसे अमानवीय और बांग्लादेश के संविधान के खिलाफ बताया.

Asaduddin Owaisi (File Photo)
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बांग्लादेश के मौजूदा हालात लगातार चिंता बढ़ा रहे हैं. खास तौर पर वहां रह रहे हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर हो रहे हमलों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े किए हैं. इसी मुद्दे पर AIMIM सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने खुलकर अपनी बात रखी है. उन्होंने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हुई हिंसा की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए भारत-बांग्लादेश संबंधों की मजबूती को बेहद जरूरी बताया है.

दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की हत्या की निंदा

ओवैसी ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी AIMIM बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल की हत्या की सख्त मजम्मत करती है. उन्होंने इसे न सिर्फ अमानवीय बताया, बल्कि बांग्लादेश के संविधान और उसके मूल विचारों के खिलाफ भी करार दिया. ओवैसी ने यह भी साफ किया कि भारत सरकार बांग्लादेश के साथ रिश्ते मजबूत रखने के लिए जो कदम उठा रही है, AIMIM उनका समर्थन करती है.

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बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष पहचान का किया जिक्र

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ओवैसी ने याद दिलाया कि बांग्लादेश की नींव धर्मनिरपेक्ष बांग्ला राष्ट्रवाद पर रखी गई थी. उन्होंने कहा कि आज बांग्लादेश में करीब 2 करोड़ ऐसे नागरिक रहते हैं, जो मुसलमान नहीं हैं और अल्पसंख्यक की श्रेणी में आते हैं. ऐसे में उनकी सुरक्षा बांग्लादेश सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है. ओवैसी ने उम्मीद जताई कि बांग्लादेश में सत्ता से जुड़े लोग, खासकर यूनुस, यह सुनिश्चित करेंगे कि वहां रहने वाले सभी अल्पसंख्यकों की जान और सम्मान की रक्षा हो.

ISI और चीन को लेकर चेतावनी

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भारत-बांग्लादेश संबंधों पर बात करते हुए ओवैसी ने कहा कि बांग्लादेश में स्थिरता भारत की सुरक्षा के लिए बेहद अहम है, खासकर पूर्वोत्तर भारत के संदर्भ में. उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में फरवरी में प्रस्तावित चुनाव दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकते हैं. ओवैसी ने इस बात की उम्मीद जताई है कि आने वाले समय में दोनों देशों के संबंध पहले से ज्यादा मजबूत होंगे. हालांकि, ओवैसी ने एक गंभीर चेतावनी भी दी. उन्होंने कहा कि यह नहीं भूलना चाहिए कि ISI, चीन और भारत के खिलाफ काम करने वाली अन्य ताकतें बांग्लादेश में सक्रिय हैं. ऐसे में वहां की राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता भारत के लिए भी खतरा बन सकती है.

भारत के हालात पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने सिर्फ बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि भारत में हो रही घटनाओं का भी जिक्र किया. उन्होंने ओडिशा के संबलपुर में एक मजदूर की पीट-पीटकर हत्या और उत्तराखंड में MBA कर रहे आदिवासी छात्र एंजेल चकमा की मौत का उदाहरण दिया. ओवैसी के मुताबिक, ये घटनाएं दिखाती हैं कि जब कानून का राज कमजोर पड़ता है और बहुसंख्यक-आधारित राजनीति हावी हो जाती है, तो लिंचिंग जैसी घटनाएं सामने आती हैं. 

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बताते चलें कि अपने बयान के अंत में ओवैसी ने कहा कि चाहे मामला बांग्लादेश का हो या भारत का, हर तरह की हिंसा की खुलकर निंदा होनी चाहिए. अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कानून का राज ही किसी भी लोकतंत्र की असली पहचान है.

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