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UN में जैसे ही हुआ फिलिस्तीन शब्द का इस्तेमाल, नेताओं के माइक हो गए बंद, तकनीकी खराबी या इजरायल का हाथ?
UNGA में फिलिस्तीन शब्द का जिक्र तक करने वाले नेताओं के माइक बंद हो गए. इंडोनेशिया, तुर्की, कनाडा और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के भाषणों के दौरान ऐसा वाकया पेश आया. अब इसकी सूइ मोसाद की तरफ घूम गई है. बड़ा सवाल ये है कि ये महज संयोग या सुनियोजित साजिश.
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अमेरिका के न्यूयॉर्क में हो रही संयुक्त राष्ट्र महासभा की 80वीं बैठक कई मायनों में ये सुर्खियों में आ गया है. रूस-यूक्रेन युद्ध, गाजा में इजरायल की कार्रवाई, कतर में IDF के हमले और मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच हो रही इस मीटिंग में हर बीतते घंटे और दिन के साथ कुछ न कुछ घटित हो रहा है जो पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है.
इससे पहले ट्रंप के चढ़ते ही एस्केलेटर बंद हो गया, बीच भाषण टेलीप्रॉम्पटर बंद हो गया, फ्रेंच राष्ट्रपति के काफिले को रोक दिया गया तो वहीं, कई नेताओं का भाषण देते वक्त माइक बंद हो गया.
कहा जा रहा है कि फिलिस्तीन के समर्थन में जिन नेताओं ने भी बोला उनका माइक अचानक बंद हो गया. ये एक के साथ नहीं, दो के साथ नहीं बल्कि चार-चार नेताओं के साथ ऐसा हुआ. उन्हें इस मोमेंट का सामना करना पड़ा. इस के बाद ही Conspiracy Theory शुरू हो गई. इस घटना के बाद इजरायली खुफिया एजेंसी मोसाद का नाम फिर से चर्चाओं में आ गया है.
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फिलिस्तीन शब्द का इस्तेमाल करते ही माइक बंद!
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जब इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान गाजा में शांति सेना तैनात करने की बात कर रहे थे तभी उनका माइक ऑफ हो गया. इसके बाद नंबर आया भारत के दुश्मन देश तुर्किए के राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोगन का. जब उन्होंने फिलिस्तीन राग अलापना शुरू किया उनके साथ भी ऐसा ही हो गया. एर्दोगन ने गाजा ही नहीं कश्मीर पर भी जहर उगला था जिसका जवाब भी दिया गया. ये तब हुआ जब उन्होंने हमास को आतंकी संगठन न मानने और फिलिस्तीन के समर्थन की बात की तभी अचानक आवाज गायब हो गई. ट्रांसलेटर को कहना पड़ा कि "इनकी आवाज चली गई है."
यही नहीं कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा के भाषणों के दौरान अचानक माइक बंद होने की घटनाओं ने भी संयुक्त राष्ट्र में हलचल मचा दी. ऐसा इसलिए भी कि शुरुआत में दोनों नेताओं का भाषण सामान्य रहा, लेकिन जैसे ही उन्होंने फिलिस्तीन को मान्यता देने और दो-राष्ट्र समाधान की बात छेड़ी, उनका माइक ऑफ हो गया. यहां तक कि कुछ मिनटों तक सभा हॉल में सन्नाटा छाया रहा.
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तकनीकी खराबी या मोसाद का हाथ?
इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर हर बार फिलिस्तीन का मुद्दा उठने पर ही माइक क्यों बंद हुआ? संयुक्त राष्ट्र ने इसे महज तकनीकी खराबी बताया है, लेकिन लगातार दोहराए जा रहे इस पैटर्न ने संदेह गहरा दिया है. कई देशों के नेताओं का मानना है कि यह सिर्फ संयोग नहीं हो सकता.
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ऐसा इसलिए भी है क्योंकि कुछ महीने पहले लेबनान में एक साथ कई जगहों पर हुए पेजर ब्लास्ट में हिजबुल्ला के लड़ाकों के चिथड़े उड़ गए थे. वो भी तब जब इसका इंटरनेट से कोई कनेक्शन नहीं होता है और ना ही इसे हैक किया जा सकता है.