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वक्फ बोर्ड को एक और झटका! दिल्ली हाईकोर्ट ने DDA की संपत्ति पर दावे को किया खारिजे

शाही ईदगाह के पास स्थित डीडीए पार्क मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने 'बड़ा' फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 13000 वर्ग मीटर के पार्क को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की संपत्ति घोषित करते हुए वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया है।

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वक्फ बोर्ड को लेकर हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर खबरों की बाढ़ आई हुई है। मनमाने तरीके से किसी भी जमीन पर अपना दावा ठोकना वक्फ बोर्ड के लिए आम बात हो गई है। कभी किसी गांव को अपना बता देते है, तो कभी किसी मंदिर पर अपने हक के बारे में बोलती है। हिंदू तो हिंदू इस बोर्ड के अतिक्रमण से एक बड़ी संख्या में मुस्लिम कम्युनिटी भी परेशान है।इस बोर्ड की मनमानी इस कदर हावी है कि ये कभी ASI के अंदर आने वाले पौराणिक इमारतें को अपना बता देता है, तो कभी सरकारी जमीन पर अपना दावा ठोक देते है। और अब ऐसी ही एक केस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बड़ा फैसला सुनाया है। जिससे वक्फ बोर्ड के साथ साथ कट्टरपंथियों के पैरों तले जमीन खिसक गई है। 


दरअसल दिल्ली में डीडीए की जमीन पर वक्फ ने अपना दावा ठोका था। शाही ईदगाह के पास स्थित डीडीए पार्क मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने 'बड़ा' फैसला सुनाया है. कोर्ट ने 13,000 वर्ग मीटर के पार्क को दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की संपत्ति घोषित करते हुए वक्फ बोर्ड के दावे को खारिज कर दिया है। खंडपीठ ने शाही ईदगाह प्रबंध समिति को इस तरह की दलीलें देने के लिए 26 September तक माफीनामा देने का आदेश दिया है। कोर्ट की फटकार के बाद समिति के वकील ने बिना शर्त माफीनामा जारी करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही उन्होंने अपनी अपील को भी वापस लेने की अनुमति माँगी। इस मामले में कोर्ट की अगली सुनवाई 27 सितंबर को है।जैसे ही ये खबर सामने आई समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। लोगों का मानने है कि यह निर्णय महारानी लक्ष्मीबाई की विरासत के सम्मान में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

ऑपइंडिया की एक रोपिपोर्ट के मुताबिक कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन ने ईदगाह मस्जिद समिति से कहा, “अदालत के माध्यम से सांप्रदायिक राजनीति खेली जा रही है! आप (मस्जिद समिति) मामले को ऐसे पेश कर रहे हैं, जैसे कि यह एक धार्मिक मुद्दा है, लेकिन यह कानून और व्यवस्था की स्थिति से संबंधित मुद्दा है।  उन्होंने आगे कहा कि “लक्ष्मीबाई एक राष्ट्रीय नायक हैं, जो धार्मिक सीमाओं से परे हैं। याचिकाकर्ता (मस्जिद समिति) सांप्रदायिक रेखाएँ खींच रही है और अदालत का इस्तेमाल कर रही है। सांप्रदायिक आधार पर विभाजन न करें। आपका सुझाव ही विभाजनकारी है। अगर ज़मीन आपकी थी तो आपको मूर्ति स्थापित करने के लिए स्वेच्छा से आगे आना चाहिए था!”

वहीं, न्यायमूर्ति गेडेला ने कहा कि झांसी की रानी की प्रतिमा का होना बहुत गर्व की बात है।

इधर इस फैसले के तुरंत बाद डीडीए ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दि। उसके बाद इंट्री हुई बुलडोजर की। शाही ईदगाह के पास की जमीन पर फैसला आने के तुरंत बाद डीडीए और एमसीडी के अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं और मूर्ति लगाने का काम शुरू कर दिया है। सुरक्षा कारणों से ईदगाह के आसपास भारी पुलिस और अर्धसैनिक बल मौजूद हैं। खैर जिस तरह से दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से वक्फ बोर्ड को जो झटका लगा है उपसर आपकी राय। 

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