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भारत के UPI ने बनाया नया कीर्तिमान, Visa को पछाड़ बना दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट सिस्टम

यूपीआई ने न सिर्फ भारत में डिजिटल पेमेंट का चेहरा बदला है, बल्कि यह आज भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार का प्रतीक बन चुका है. तेजी से बढ़ती पहुंच, आसान उपयोग, और सुरक्षित ट्रांजैक्शन ने इसे आम जनता से लेकर वैश्विक मंच तक एक भरोसेमंद प्रणाली बना दिया है. अब जब भारत UPI को 20 देशों में ले जाने की तैयारी में है, तो यह साफ है कि आने वाला दशक "डिजिटल भारत से ग्लोबल भारत" की दिशा में एक बड़ा कदम होगा.

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UPI Payment Interface:  भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब सिर्फ एक घरेलू तकनीक नहीं, बल्कि दुनिया का अग्रणी डिजिटल पेमेंट सिस्टम बन चुका है. नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यूपीआई ने अब वीज़ा (VISA) जैसे वैश्विक भुगतान नेटवर्क को भी पीछे छोड़ दिया है. आज, भारत में हर दिन 65 करोड़ से अधिक यूपीआई ट्रांजैक्शन हो रहे हैं - यह संख्या न केवल भारत की डिजिटल क्रांति को दर्शाती है, बल्कि यह दिखाती है कि देश अब तकनीक की दौड़ में सबसे आगे है.

मोदी सरकार की एक ऐतिहासिक उपलब्धि

अमिताभ कांत ने यूपीआई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की सबसे बड़ी और असरदार पहलों में से एक बताया. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म "X" (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "यूपीआई ने सिर्फ 9 वर्षों में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. यह भारत की डिजिटल पेमेंट क्रांति का नेतृत्व कर रहा है और वीज़ा को पीछे छोड़ दुनिया का टॉप रीयल-टाइम पेमेंट सिस्टम बन गया है." उन्होंने आगे कहा कि यह बदलाव देश के आम नागरिक के जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है - लेनदेन तेज, सुरक्षित और बेहद आसान हो गए हैं.

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यूपीआई के दमदार आंकड़े

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RBI की वार्षिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2024-25 के दौरान यूपीआई के जरिए कुल 185.8 बिलियन ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 41% अधिक है. ट्रांजैक्शन का मूल्य भी जबरदस्त तरीके से बढ़ा है, 200 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 261 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया. इससे साफ है कि यूपीआई सिर्फ लोकप्रिय नहीं, बल्कि उपयोगकर्ताओं के भरोसे का भी प्रतीक बन चुका है.

 दुनिया में छा रहा है यूपीआई

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RBI ने घोषणा की है कि वह 2028-29 तक UPI को 20 देशों तक विस्तारित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. फिलहाल, भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका और UAE जैसे देशों में भारतीय पर्यटक, छात्र और व्यवसायी QR कोड के ज़रिए UPI ऐप से सीधे भुगतान कर सकते हैं. यह सुविधा भारतीयों को विदेशी धरती पर भी "डिजिटल इंडिया" का अनुभव देती है.

कार्ड सिस्टम और डिजिटल पेमेंट में भारी बदलाव

यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता का असर क्रेडिट और डेबिट कार्ड सिस्टम पर भी साफ दिख रहा है. जहां क्रेडिट कार्ड ट्रांजैक्शन 3.5 अरब से बढ़कर 4.7 अरब हो गए, वहीं डेबिट कार्ड के उपयोग में 29.5% की गिरावट दर्ज की गई. इससे यह स्पष्ट होता है कि लोग अब अधिकतर नकद रहित और कार्ड-रहित पेमेंट विकल्प को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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 डिजिटल लेनदेन का नया युग

देश में डिजिटल पेमेंट का दायरा लगातार बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2025 में कुल डिजिटल ट्रांजैक्शन 221.9 बिलियन तक पहुंच गए, जो कि 35% की वृद्धि को दर्शाता है. डिजिटल भुगतान की कुल वैल्यू 2,862 लाख करोड़ रुपये तक जा पहुंची है. यह सब दर्शाता है कि भारत की नकद रहित अर्थव्यवस्था का सपना अब हकीकत बन रहा है.

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यूपीआई ने न सिर्फ भारत में डिजिटल पेमेंट का चेहरा बदला है, बल्कि यह आज भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और नवाचार का प्रतीक बन चुका है. तेजी से बढ़ती पहुंच, आसान उपयोग, और सुरक्षित ट्रांजैक्शन ने इसे आम जनता से लेकर वैश्विक मंच तक एक भरोसेमंद प्रणाली बना दिया है. अब जब भारत UPI को 20 देशों में ले जाने की तैयारी में है, तो यह साफ है कि आने वाला दशक "डिजिटल भारत से ग्लोबल भारत" की दिशा में एक बड़ा कदम होगा.

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