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पहलगाम आतंकी हमले के बाद एक्शन में अमित शाह, विदेश मंत्री के साथ राष्ट्रपति मुर्मू से मिले; MEA ने विदेशी राजनयिकों को किया ब्रीफ
जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए टैरर अटैक को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर और गृहमंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. इसके बाद कई देशों के राजदूतों के साथ बैठक कर जानकारी दी.
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जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए टैरर अटैक को लेकर भारत सरकार ने कड़े और ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं. पाकिस्तान के खिलाफ भारत सरकार के 5 कड़े फैसले लेने के बाद अब विदेश मंत्री एस जयशंकर और गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की. यह उच्चस्तरीय बैठक सुरक्षा स्थिति की गंभीरता और आगामी रणनीतियों पर चर्चा के लिहाज से काफ़ी अहम मानी जा रही है.
इसी के साथ-साथ विदेश मंत्रालय में भी एक महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें कई देशों के राजदूतों उपस्थित थे. इसके मद्देनजर जर्मनी, जापान, पोलैंड, ब्रिटेन और रूस समेत तमाम देशों के राजदूत विदेश मंत्रालय के कार्यालय पहुंचे. इन राजनयिकों को पहलगाम आतंकी हमले की विस्तृत जानकारी दी गई और भारत की सुरक्षा चिंताओं से अवगत कराया गया.
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विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने सभी देशों के राजदूतों को करीब 30 मिनट तक ब्रीफिंग दी. चीनी राजदूत जू फेइहोंग को विदेश मंत्रालय मुख्यालय बुलाया गया था. MEA के वरिष्ठ अधिकारी उन्हें हमले के पीछे संभावित आतंकी संगठनों, पाकिस्तान की भूमिका और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी दी.
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बैसरन जाएंगे सेना प्रमुख
हमले के बाद सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी खुद स्थिति की समीक्षा करेंगे और बैसरन में हमले की जगह का दौरा करेंगे. वे वहां सैन्य कमांडरों और स्थानीय अधिकारियों के साथ सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे. सेना का यह कदम आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की दिशा में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है.वहीं सुरक्षा एजेंसियों ने पहलगाम और आसपास के क्षेत्रों में तलाशी अभियान तेज कर दिया है. शुरुआती जांच में सीमा पार से आतंकियों की घुसपैठ और उनके स्थानीय नेटवर्क की आशंका जताई गई है. NIA, IB और सैन्य खुफिया एजेंसियां हमले से जुड़े हर पहलू की गहराई से जांच कर रही हैं. घटनास्थल से बरामद हथियारों और साजो-सामान की जांच के ज़रिए आतंकियों के स्रोत और समर्थन तंत्र का पता लगाया जा रहा है.