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मुंबई बीजेपी अध्यक्ष बने अमित साटम, संगठन को नई ऊर्जा देने की जिम्मेदारी; CM देवेंद्र फडणवीस ने दी शुभकामनाएं

मुंबई भाजपा की कमान अब अमित साटम के हाथों में है. सवाल ये है कि क्या उनके नेतृत्व में पार्टी बीएमसी चुनाव में बड़ी जीत दर्ज कर पाएगी और क्या यह बदलाव भाजपा की चुनावी रणनीति को नई दिशा देगा?

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मुंबई, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को अंधेरी पश्चिम के तीन बार निर्वाचित विधायक अमित साटम को मुंबई भाजपा का नया अध्यक्ष नियुक्त किया. यह पदस्थापना BMC चुनाव से पहले हुई, जिससे पूर्वी स्तर पर संगठन को सशक्त करने का संदेश मिलता है. 
 
कौन हैं अमित साटम?
  • अमित साटम, 49 वर्ष, अंधेरी पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से तीनवीं बार विधायक बने हैं.
  • वे एक पूर्व निगम पार्षद भी रह चुके हैं और गोक्हले ब्रिज के पुनर्निर्माण जैसे अनेक नागरिक मुद्दों को उठाने में सक्रिय रहे हैं.
  • राजनीतिक पृष्ठभूमि में वे युवा, ऊर्जावान और मौजूदा मुद्दों को लेकर सजग नेता माने जाते हैं.
यह नियुक्ति क्यों मायने रखती है?
  • मुंबई भाजपा की चुनावी रणनीति पर यह फैसला बड़ा प्रभाव छोड़ सकता है:
  • BMC चुनावों की तैयारियों में अमित साटम की नियुक्ति को पार्टी द्वारा ज़मीनी लड़ाई में मजबूत पकड़ बनाकर चुनाव जीतने की रणनीति माना जा रहा है.
  • फडणवीस ने कहा, “साटम ने संगठनात्मक जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाया है; उनका अच्छा काम जारी रहेगा.” 
सीएम फडणवीस और शीला का संदेश
 
CM फडणवीस ने अमित साटम को कार्यक्षेत्र से जुड़े नेताओं में से एक बताते हुए उनके नवाचारी विचार और संगठन क्षमता की तारीफ की. पूर्व अध्यक्ष आशीष शेलार ने X पर साटम को बधाई देते हुए उन्हें ‘संघ का कार्यकर्ता’ और ‘मुंबई की दर्द को समझने वाला’ बताया. 
 
आगे क्या उम्मीद?
  • अमित साटम अब पार्टी की स्थानीय मजबूत पकड़ और चुनावी रणनीति के जिम्मेदार हैं.
  • उनका नेतृत्व भाजपा को BMC चुनाव में एक निर्णायक बढ़त दिला सकता है.
  • सीएम ने भी आशा जताई है कि साटम के नेतृत्व में भाजपा फिर से BMC पर कब्जा जमाएगी जैसा पिछले विधानसभा में हुआ था.
इसके अलावा, उन्होंने ‘वोट चोरी’ को लेकर भी अपनी बात रखी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर झूठ बोलने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सबसे बड़े दुख की बात है कि हमारे महाराष्ट्र के नेताओं कों भी यह सपना आ रहा है कि राहुल गांधी सही बोल रहे हैं. लेकिन, हमें यह समझना होगा कि झूठ की कोई दुकान नहीं होती है. झूठ की किला ढह जाता है. जब तक यह लोग नहीं जानेंगे कि लोगों के बीच में जाकर हमें उनका विश्वास जीतना होता है, तब तक इन लोगों का कुछ भी नहीं होने वाला है और रही बात झूठ बोलने की, तो इससे इन लोगों को कोई भी फायदा नहीं होने वाला है.
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