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ट्रंप-चीन टकराव के बीच भारत को बड़ी सौगात, Hitachi सहित तीन कंपनियों को रेयर-अर्थ आयात की मंजूरी

चीन ने भारत की तीन कंपनियों कॉन्टिनेंटर इंडिया, हिटाची और जे.युशिनको रेयर अर्थ मैग्नेट आयात की मंजूरी दी है. यह लाइसेंस इस शर्त पर मिला है कि संसाधनों का इस्तेमाल रक्षा उद्देश्यों या अमेरिका को निर्यात के लिए नहीं होगा. अमेरिका-चीन तनाव के बीच लिया गया यह कदम वैश्विक सप्लाई चेन के लिए अहम माना जा रहा है, क्योंकि चीन दुनिया के 80% रेयर अर्थ उत्पादन पर नियंत्रण रखता है.

Xi Jindping / Narendra Modi (File Photo)
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भारत की औद्योगिक दुनिया के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. चीन ने तीन भारतीय कंपनियों को अपने यहां से रेयर अर्थ मैग्नेट आयात करने की मंजूरी दे दी है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह मंजूरी कॉन्टिनेंटर इंडिया, हिटाची और जे.युशिन (Jay Ushin) को मिली है. ये कंपनियां अब कुछ तय शर्तों के तहत चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट ला सकेंगी. हालांकि, इन लाइसेंसों के साथ एक महत्वपूर्ण शर्त जुड़ी है. इन संसाधनों का न तो अमेरिका को निर्यात किया जा सकेगा और न ही इनका इस्तेमाल किसी भी तरह के रक्षा उद्देश्यों में किया जाएगा.

अमेरिका और चीन के तनाव के बीच बाद कदम 

यह फैसला उस समय आया है जब चीन और अमेरिका के बीच रेयर अर्थ को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है. हाल ही में चीन ने अपने रेयर अर्थ निर्यात नियमों में बदलाव किया, जिससे वैश्विक बाजार में खलबली मच गई. अप्रैल 2025 से लागू हुए इन नए प्रतिबंधों के बाद दुनिया भर की सप्लाई चेन पर भारी असर पड़ा है. दरअसल, चीन इस क्षेत्र का ‘बादशाह’ माना जाता है क्योंकि वह दुनिया के कुल रेयर अर्थ उत्पादन का करीब 80 फीसदी हिस्सा अपने नियंत्रण में रखता है. यही वजह है कि इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, मोबाइल फोन, सोलर पैनल और आधुनिक सैन्य उपकरणों के निर्माण में चीन की भूमिका अहम बनी रहती है. 

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भारत के पास रेयर अर्थ का कितना है भंडार?

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सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) के आंकड़ों के अनुसार, भारत की लगभग 52 कंपनियां चीन से रेयर अर्थ मैग्नेट आयात करती हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने करीब ₹306 करोड़ खर्च कर 870 टन रेयर अर्थ मैग्नेट खरीदे थे. इससे साफ है कि भारत की मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री अभी भी इस खनिज के लिए चीन पर काफी निर्भर है. हालांकि, भारत धीरे-धीरे इस निर्भरता को खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के पास दुनिया के कुल रेयर अर्थ भंडार का लगभग 6 प्रतिशत हिस्सा है. केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में इन खनिजों के बड़े भंडार मौजूद हैं. मौजूदा समय में भारत का उत्पादन वैश्विक स्तर पर 1% से भी कम है, लेकिन सरकार अब इस दिशा में तेजी से निवेश बढ़ा रही है.

क्या है भारत का लक्ष्य?

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भारत का लक्ष्य न सिर्फ आत्मनिर्भर बनना है बल्कि दुनिया को चीन के विकल्प के रूप में एक भरोसेमंद सप्लायर देना भी है. अगर यह प्रयास सफल होते हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत इस क्षेत्र में बड़ी आर्थिक ताकत बन सकता है. चीन की ओर से मिली यह आयात मंजूरी फिलहाल भारत के लिए एक मौका है, न सिर्फ तकनीकी विकास के लिए, बल्कि भविष्य के औद्योगिक संतुलन को अपने पक्ष में करने के लिए भी.

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बताते चलें कि यह मंजूरी भारत के लिए आर्थिक और रणनीतिक दोनों ही दृष्टि से अहम है. एक ओर जहां यह भारतीय उद्योगों को राहत देती है, वहीं यह भारत की उस क्षमता की ओर भी इशारा करती है, जो आने वाले समय में उसे रेयर अर्थ क्षेत्र में आत्मनिर्भर बना सकती है. वैश्विक अर्थव्यवस्था की इस नई कहानी में भारत अब एक मजबूत किरदार के रूप में उभरने को तैयार है.

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