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'मोदी-पुतिन-जिनपिंग' की तिकड़ी देख कांप उठेगा अमेरिका, चीन की धरती से 20 देश मिलकर बिगाड़ेंगे ट्रंप के टैरिफ प्लान का पूरा खेल, जानिए पूरी रणनीति?

SCO बैठक में दुनिया के 20 देश मिलकर एक साथ अमेरिका के टैरिफ प्लान का खेल बिगाड़ने की तैयारी में है. चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने बताया है कि SCO बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित कई अन्य देशों के प्रमुख शामिल होंगे. इसका आयोजन चीन के तियानजिन शहर में 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच होगा.

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अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50 प्रतिशत का टैरिफ दर बुधवार देर रात से लागू हो जाएगा. ट्रंप अभी भी लगातार इस बात पर अड़े हुए हैं कि अगर भारत रूस से तेल खरीदना बंद नहीं करता है, तो उसे इस तरह के कड़े टैरिफ दरों का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, उनकी धमकियों का भारत पर किसी भी तरीके से असर होता नहीं दिखाई दे रहा है. भारत धमकी के बावजूद रूस के साथ मजबूती के साथ खड़ा है. ट्रंप की टैरिफ वाली धमकी सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं है, उन्होंने चीन को भी धमकी देते हुए 200 प्रतिशत का टैरिफ दर लागू करने की बात कही है. वही ट्रंप की धमकियों के बीच दुनिया के कई प्रमुख देश एक ही मंच पर नजर आने वाले हैं. इस मंच पर दुनिया भर की नजरें हैं. उम्मीद है कि शंघाई शिखर सम्मेलन (SCO ) की बैठक में तीन ताकतवर देश रूस, चीन और भारत मिलकर ट्रंप की टैरिफ धमकियों का करारा जवाब देंगे. दुनिया के 20 देशों का एक ही मंच पर आने से ट्रंप की नींद उड़ना तय है. 

'पीएम मोदी, शी जिनपिंग और पुतिन एक साथ आएंगे नजर'

चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने बताया है कि 'SCO बैठक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित कई अन्य देशों के प्रमुख शामिल होंगे. इसका आयोजन चीन के तियानजिन शहर में 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच होगा. इसके अलावा संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और 9 अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी हिस्सा लेंगे.'

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'7 साल बाद चीन में कदम रखेंगे पीएम मोदी'

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पीएम मोदी ने आखिरी बार चीन का दौरा साल 2018 में किया था. ऐसे में 7 साल बाद पीएम मोदी अब चीन की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं. वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पीएम मोदी की आखिरी मुलाकात रूस के कजान शहर में हुए शिखर सम्मेलन में हुई थी. उस मंच पर पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग तीनों नजर आए थे. वहीं पश्चिमी नेताओं ने यूक्रेन युद्ध के बीच रूसी नेता से दूरी बना ली थी. वहीं हाल ही में नई दिल्ली में रूसी दूतावास के अधिकारियों ने भी इस बात की उम्मीद जताई थी कि भारत, रूस और चीन के बीच जल्द ही त्रिपक्षीय वार्ता होगी. 

'बिना अमेरिकी नेतृत्व की अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था'

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चीन की शोध एजेंसी द चाइना ग्लोबल साउथ प्रोजेक्ट के प्रधान संपादक एरिक ओलांडर ने कहा है कि 'शी जिनपिंग इस शिखर सम्मेलन का उपयोग एक अवसर के रूप में करेंगे, ताकि वह अमेरिका को यह दिखा सके कि उनके नेतृत्व के बिना अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था कैसी दिखती है? इससे यह साबित होगा कि चीन, ईरान, रूस और भारत का मुकाबला करने के लिए व्हाइट हाउस का किसी तरह का कोई भी प्रभाव नहीं पड़ा है. इस मंच के हर एक सेकंड पर अमेरिका अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा. 

संयुक्त घोषणा पत्र पर हो सकते हैं हस्ताक्षर

SCO बैठक को लेकर इस बात की भी चर्चा तेज है कि चीनी राष्ट्रपति की मेजबानी में सभी सदस्य देश मिलकर एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं. इसके अलावा सभी सदस्य देश SCO में विकास रणनीति को भी मंजूरी देंगे और सुरक्षा व आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के उपायों पर चर्चा कर सकते हैं. इस घोषणा पत्र से अमेरिका की टैरिफ नीति को करारा जवाब मिलेगा. 

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पीएम मोदी का उपस्थित होना अति महत्वपूर्ण - चीनी राजदूत

भारत में चीन की राजपूत शू फेइहोंग ने गुरुवार को अपने बयान में कहा कि इस महीने के अंत में होने वाले SCO शिखर सम्मेलन के लिए पीएम मोदी की चीन यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के लिए अति महत्वपूर्ण है. चीन भी इस यात्रा को काफी महत्व देता है.  

ट्रंप को बड़ा झटका देने की तैयारी में चीन

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इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से चीन अपने दोस्तों के साथ मिलकर अमेरिका के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन दिखाने की कोशिश करेगा. वह भारत और रूस के साथ SCO के मंच पर ट्रंप को झटका देने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेगा. इससे पहले चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने बिना नाम लिए अमेरिका पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि 'कुछ देश अपने राष्ट्रीय हित को दूसरों के हितों से ऊपर रखना चाहते हैं. यह मंच SCO के सिद्धांत एक की जीत और दूसरे की हार जैसी पुरानी अवधारणाओं से काफी अलग हैं. समय के साथ यह संगठन और भी ज्यादा मजबूत होता जा रहा है.'

क्या है SCO संगठन?

शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की स्थापना साल 2001 में शंघाई चीन में की गई थी. यह दुनिया का एक प्रभावशाली आर्थिक व सुरक्षा समूह है. इस समूह में भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं.  SCO के सदस्य देशों में दुनिया की करीब 40 फीसदी आबादी रहती है. वहीं यह देश पूरी दुनिया की 20 फीसदी जीडीपी की हिस्सेदारी रखते हैं. 

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क्या है SCO का उद्देश्य?

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SCO की स्थापना क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ावा देने के मकसद से की गई है. इसके अलावा यह संगठन आतंकवाद और अलगाववाद के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ने पर भी जोर देता है. व्यापार, निवेश और परिवहन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना भी SCO के प्रमुख उद्देश्यों में से एक है. 

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