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मोदी-पुतिन की नजदीकी से चिढ़े जेलेंस्की! ट्रंप के टैरिफ के फैसले पर बजा रहे ताली, भूल गए भारत के साथ है ये अहम डील!

जेलेंस्की ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का समर्थन किया है. एक अमेरिकी पत्रकार ने जेलेंस्की से पूछा था कि, क्या डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर टैरिफ लगाने की नीति उलटी पड़ गई है, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि ‘रूस से सौदे करने वाले देशों पर टैरिफ लगाना सही कदम है’

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रूस और यूक्रेन के बीच जंग में भारत का स्टैंड हमेशा तटस्थ रहा. भारत ने कभी भी जंग को सही नहीं ठहराया. रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन हों या वोलोदिमीर जेलेंस्की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों से ही शांति की अपील की है. भारत ने जहां सकारात्मक रुख अपनाया वहीं यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने भारत पर ही प्रहार कर दिया. उन्होंने अमेरिका के भारत पर टैरिफ थोपने के फैसले सही ठहराया है. 

जेलेंस्की ने भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले का समर्थन किया है. एक अमेरिकी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने टैरिफ के फैसले में ट्रंप का साथ दिया. अमेरिकी पत्रकार ने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से पूछा था कि, क्या डोनाल्ड ट्रंप की भारत पर टैरिफ लगाने की नीति उलटी पड़ गई है, तो उन्होंने सीधा जवाब दिया कि ‘रूस से सौदे करने वाले देशों पर टैरिफ लगाना सही कदम है’

जेलेंस्की के रिएक्शन वायरल होने के बाद लोगों ने उन्हें आईना दिखाना शुरू कर दिया, क्योंकि ट्रंप के फैसले से गदगद जेलेंस्की ये भूल गए कि उनके भारत के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते बेहतर हैं. यहां तक कि यूक्रेन खुद भारत से डीजल खरीदता है. 

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यूक्रेन और भारत के बीच कब हुई डीजल खरीद की डील? 

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दरअसल यूक्रेन और भारत के बीच व्यापारिक रिश्ते काफी अच्छे हैं. यूक्रेन भारत से ही डीजल खरीदता है. दोनों के बीच साल 2022 में तेल आयात पर डील हुई थी. जब रुस के साथ यूक्रेन का वॉर शुरू ही हुआ था. साल 2025 तक यूक्रेन ने भारत के साथ डीजल की खरीद बढ़ाई भी है. साल 2022 से पहले यूक्रेन रूस से डीजल खरीदता था.

भारत से यूक्रेन की डीजल खरीद कब-कब बढ़ी?  

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यूक्रेनी एनालिटिक्स फर्म NaftoRynok के मुताबिक भारत का डीजल शेयर 2024 में 1.9 प्रतिशत से 2025 में 10.2 प्रतिशत हो गया. अकेले जुलाई महीने में यूक्रेन ने भारत से 15 फीसदी तक डीजल खरीदा है. दूसरी ओर यूक्रेन रूस के बीच जंग के बाद से ही भारत रूस का सबसे बड़ा ऊर्जा साझेदार है. सबसे ज्यादा कच्चा तेल भारत रूस से ही खरीद रहा है. ये ही वजह है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बौखलाए हुए हैं. उन्होंने भारतीय सामानों पर पहले 25% और बाद में 50% टैरिफ लगा दिया. इसके बाद अमेरिका और भारत के रिश्तों में कड़वाहट घुल गई.

क्या चीन में तिकड़ी से चिढ़ गए जेलेंस्की? 

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दरअसल, PM मोदी चीन में SCO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे. यहां मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से भी मुलाकात की थी. पुतिन और जिनपिंग के साथ बॉन्ड ने दुनिया के कई देशों का ध्यान खींचा, लेकिन शायद पुतिन के साथ मोदी की केमिस्ट्री जेलेंस्की को रास नहीं आई. इसके अलावा अमेरिका के ऐतराज के बाद रूस के साथ भारत लगातार व्यापारिक और सामरिक रिश्तों को मजबूत कर रहा है. जिससे ट्रंप के साथ साथ जेलेंस्की भी चिढ़े हुए हैं, क्योंकि यूक्रेन तीन सालों से रूस के साथ भीषण जंग का सामना कर रहा है. 

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