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Art और आस्था का अद्भुत मिलन, चावल से बनाई रामलला की विशाल प्रतिमा

अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के बाद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ। यूपी के फतेहपुर के शैलेंद्र उत्तम ने रामलला की प्रतिमा से प्रेरित होकर चावल के दाने से 11 फीट ऊंची विशाल मूर्ति बनाई। इस मूर्ति को बनाने में करीब 560 किलो चावल और 2 लाख रुपये खर्च हुए। शैलेंद्र ने यह कला राम के प्रति किसानों की आस्था को प्रकट करने के लिए बनाई। इससे पहले भी वे लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपनी कला के लिए नाम दर्ज करवा चुके हैं।

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अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण एक सपने के साकार होने जैसा था। मंदिर के निर्माण के बाद राम की आस्था का अहसास दुनिया ने भी किया। राम मंदिर मिल गया मानों राम मिल गए। मंदिर बने एक साल पूरे हो गए। इसके बाद भी भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। हर दिन हजारों श्रद्धालु रामलला के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। यहां पहुंचे कुछ श्रद्धालु तो भक्ति की नई मिसाल भी पेश कर रहे हैं। इन्हीं में से एक है यूपी के फतेहपुर के रहने वाले शैलेंद्र उत्तम, जिन्होंने रामलला की प्रतिमा से प्रेरित होकर एक अद्भुत कला का परिचय दिया है।फतेहपुर के बिन्दकी के रहने वाले शैलेंद्र उत्तम ने अनूठी कला और भक्ति की नई मिसाल पेश की है। इन्होंने भगवान राम की विशाल मूर्ति बनाई, लेकिन चावल के दाने से। शैलेंद्र ने ये काम राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति को देखकर बनाई।


 11 फीट ऊंची प्रतिमा

श्रीराम की इस विशाल मूर्ति को बनाने में करीब 560 किलो चावलों का इस्तेमाल हुआ है। और यह 11 फीट ऊंची प्रतिमा है। जिसका वजन 10 क्विंटल है। जिसको बनाने में शैलेंद्र उत्तम को करीब 3 महीने का समय लगा है। इसमें उनका साथ उनके भाई शिवशंकर पटेल और आशू उत्तम ने दिया। इस प्रतिमा को बनाने में करीब 2 लाख का खर्च आया है। मूर्ति में चावल की मोटी परत लगी हुई है। चावलों को चिपकाने के लिए कैमिकल और थोड़ी सीमेंट का भी इस्तेमाल किया गया है।

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दरअसल, शैलेंद्र उत्तम किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इसलिए उन्होंने मूर्ति बनाने के लिए धान का चयन किया। उनका मानना है कि इस मूर्ति के जरिए उन्होंने राम के प्रति पूरे भारत के किसानों की आस्था को प्रकट किया है। शैलेंद्र चाहते हैं कि महाकुंभ में संगम के जल से मूर्ति का अभिषेक किया जाए। इसके लिए उन्होंने प्रशासन की परमिशन मांगी है।

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लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज है नाम

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शैलेंद्र किसान होने के साथ-साथ शिल्पकारी भी करते हैं। इससे पहले भी उन्होंने अपने टैलेंट के जरिए लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज किया है। साल 2019 में उन्होंने अलसी और सरसों के फूल से स्वतंत्रता सेनानी स्वामी ब्रह्मानंद की प्रतिमा बनाई थी। वहीं, 2017 में गेहूं के दानों से 5 फीट का सिक्का बनाया था। ये सिक्का लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया।

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