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UP में 15 जनवरी को सभी स्कूल और ऑफिस रहेंगे बंद, CM योगी ने किया सार्वजनिक अवकाश घोषित
UP: प्रदेश के पहले से जारी अवकाश तालिका में 15 जनवरी को छुट्टी का प्रावधान नहीं था. लेकिन अब मकर संक्रांति के चलते यह दिन सार्वजनिक अवकाश में शामिल कर दिया गया है. इसका मतलब है कि सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालय सभी बंद रहेंगे.
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CM Yogi: उत्तर प्रदेश सरकार ने 15 जनवरी 2026 को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है. इसका कारण है मकर संक्रांति, जिसे इस साल 15 जनवरी को मनाया जा रहा है. शासन ने आदेश जारी कर बताया कि अवकाश का निर्णय सभी स्तर पर विचार के बाद लिया गया है. प्रदेश के पहले से जारी अवकाश तालिका में 15 जनवरी को छुट्टी का प्रावधान नहीं था. लेकिन अब मकर संक्रांति के चलते यह दिन सार्वजनिक अवकाश में शामिल कर दिया गया है. इसका मतलब है कि सरकारी और गैर-सरकारी कार्यालय सभी बंद रहेंगे.
स्कूलों की छुट्टी भी बढ़ी
फिलहाल प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में शीतकालीन अवकाश चल रहा है. 1 जनवरी से 14 जनवरी तक स्कूल बंद थे और 15 जनवरी को स्कूल खुलने वाले थे।लेकिन नए आदेश के बाद 15 जनवरी तक स्कूलों की छुट्टी बढ़ा दी गई है. मकर संक्रांति के दिन सिर्फ स्कूल ही नहीं, बल्कि सभी सरकारी कार्यालय और विभाग भी बंद रहेंगे।इससे कर्मचारियों और आम लोगों को इस दिन त्योहार मनाने और परिवार के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा.
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मकर संक्रांति क्या है और क्यों मनाई जाती है
मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक बहुत ही महत्वपूर्ण और पावन त्योहार है. यह त्योहार हर साल जनवरी महीने में मनाया जाता है. इस दिन सूर्य देव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करते हैं. जैसे ही सूर्य मकर राशि में आते हैं, वैसे ही सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ने लगते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है. उत्तरायण का मतलब होता है शुभ समय की शुरुआत. इसी दिन से दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं। यही कारण है कि मकर संक्रांति को अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है.
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सर्दी के अंत और बसंत के आगमन का संकेत
मकर संक्रांति को सर्दियों के मौसम के खत्म होने का संकेत भी माना जाता है. इस दिन के बाद ठंड धीरे-धीरे कम होने लगती है और मौसम में हल्की गर्माहट आने लगती है. माना जाता है कि इसके बाद बसंत ऋतु का आगमन होता है, जिससे चारों ओर हरियाली और नई ऊर्जा दिखाई देने लगती है. इसलिए यह त्योहार केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि प्रकृति से जुड़ा हुआ भी है.
किसानों के लिए खुशी का पर्व
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मकर संक्रांति किसानों के लिए खास महत्व रखती है. यह त्योहार फसलों से जुड़ा हुआ है. इसी समय रबी की फसल जैसे गेहूं, चना, सरसों आदि की कटाई पूरी हो जाती है. किसान इस दिन भगवान को धन्यवाद देते हैं और आने वाली फसल के लिए आशीर्वाद मांगते हैं. इसलिए मकर संक्रांति को फसल का त्योहार भी कहा जाता है. यह दिन मेहनत का फल मिलने की खुशी का प्रतीक होता है.
स्नान, दान और पूजा का महत्व
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मकर संक्रांति के दिन गंगा, यमुना जैसी पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत शुभ माना जाता है. इस दिन सूर्य देव की पूजा की जाती है और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है. खासकर तिल और गुड़ का दान बहुत पुण्यदायी माना गया है. ऐसा कहा जाता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है. लोग गरीबों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करते हैं.मकर संक्रांति के मौके पर देश के कई हिस्सों में पतंग उड़ाने की परंपरा है. आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है और लोग पूरे उत्साह के साथ यह दिन मनाते हैं. एक-दूसरे को तिल-गुड़ से बनी मिठाइयां दी जाती हैं, जो आपसी प्रेम और मिठास का प्रतीक होती हैं. कई जगहों पर इस दिन खिचड़ी बनाई जाती है और इसे प्रसाद के रूप में भी बांटा जाता है.