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यूपी उपचुनाव में कांग्रेस की प्रेशर पॉलिटिक्स के आगे नरम पड़े अखिलेश, एक और सीट देने का कर सकते है एलान !
राज्य के सियासी जानकारों की मानें तो कांग्रेस ने अधिक सीट को लेकर जो डिमांड करते हुए समाजवादी पार्टी पर प्रेशर बनाया था अब वो काम कर गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव अब अपने कोटे से कांग्रेस को एक और सीट देने के लिए तैयार हो गया है।
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उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव ने राज्य में सियासी सरगर्मी को बढ़ा दिया है। इस चुनाव में भी लोकसभा की तरह सपा-कांग्रेस मिलकर चुनाव लड़ने की तैयारी में है। ऐसे में सीट शेयरिंग को लेकर चल रहा दोनों दल में चल रहा मंथन अब ख़त्म होता दिखाई दे रहा हैं। राज्य के सियासी जानकारों की मानें तो कांग्रेस ने अधिक सीट को लेकर जो डिमांड करते हुए समाजवादी पार्टी पर प्रेशर बनाया था अब वो काम कर गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव अब अपने कोटे से कांग्रेस को एक और सीट देने के लिए तैयार हो गया है। क़यास इस बात के लगाए जा रहे है बुधवार की रात तक यह तस्वीर पूरी तरह से क्लीयर हो जाएगा कि सपा कांग्रेस को कितनी सीट देने के लिए राज़ी है।
दरअसल, यूपी में 10 विधानसभा सीट पर उपचुनाव होने थे जिसमें से मिल्कीपुर विधानसभा सीट का मामला कोर्ट में होने के चलते चुनाव आयोग ने 9 सीट के लिए चुनाव की तारीख़ों का एलान किया था। अब इन नौ सीट में से कांग्रेस आधे से कम में मनाने को तैयार नहीं थी वही समाजवादी पार्टी पहले ही 6 सीट के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी कर प्रत्याशियों को चुनावी प्रचार में लगा दिया था,वही सपा की तरफ़ से कांग्रेस को अलीगढ़ की ख़ैर और ग़ाज़ियाबाद सीट देने की घोषणा किया गया था। जिसके बाद दोनों दलों के बीच बात बिगड़ी थी, और कांग्रेस से उपचुनाव से अलग होने का मन बना लिया था। अब कांग्रेस की इसी प्रेशर पॉलिटिक्स ने सपा को सोचने पर मजबूर कर दिया है। सूत्रों से हवाले से ख़बर आ रही है कि अब समाजवादी पार्टी ने फ़ैसला लिया है कि अपने कोटे से एक और सीट का ऑफ़र कांग्रेस को दिया जाएगा। जिसपर बुधवार की रात तक फ़ैसला लिया जा सकता है। और पार्टी की तरफ़ से अधिकारिक तौर पर एलान किया जाएगा।
किस सीट को कांग्रेस के लिए छोड़ेगी सपा
समाजवादी पार्टी अब दो सीट के बजाय कांग्रेस को तीन सीट देकर गठबंधन धर्म की परंपरा को बचाए रखना चाहती है। सूत्रों की माने तो अखिलेश यादव अपने कोटे से कांग्रेस की परम्परागत फूलपुर सीट देने को तैयार हो गए है। इसके पीछे की वजह मानी जा रही है कि अखिलेश यादव गठबंधन को सबसे ज़्यादा अहमियत देना ज़रूरी समझ रहे है। उनकी ये कोशिश है की कांग्रेस नाराज़ न हो क्योंकि अगर उपचुनाव से पहले गठबंधन में दरार जैसी बातें होती है तो सत्ताधारी NDA को हमला करने का मौक़ा मिल जाएगा। यही वजह है की कांग्रेस के प्रेशर पॉलिटिक्स को सपा ने समझा है।
बताते चले कि इससे पहले कांग्रेस पार्टी के प्रदेश नेतृत्व की तरफ़ से लगातार सीट की माँग को लेकर बयानबाज़ी की जा रही थी। जिससे गठबंधन को लेकर चर्चा होने लगी थी कि उपचुनाव में कांग्रेस और सपा के गठबंधन में दरार आ गई है। इसी परिस्थिति को संभालने के लिए ख़ुद सपा प्रमुख ने कांग्रेस को फूलपुर सीट भी देने को तैयार हो गए हैं, बशर्ते कांग्रेस ये सीट मिलने से संतुष्ट हो जाए। ऐसे में कांग्रेस अगर सपा के इस ऑफ़र से संतुष्ट होती है तो सपा फूलपुर सीट से अपने प्रत्याशी का नाम वापिस ले लेगी। हालांकि उपचुनाव की जब से चर्चा शुरू हुई थी तभी से कांग्रेस मंझवा और फूलपुर पर अपनी दावेदारी दर्ज करवा रही थी।फूलपुर सीट पर बीजेपी और मझवां सीट पर निषाद पार्टी का कब्जा था। वही कांग्रेस ने उन सीटों की सपा से माँग की थी जहा पिछले विधानसभा चुनाव में सपा प्रत्याशियों की हार हुई थी।
ग़ौरतलब है कि उत्तर प्रदेश की नौ विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग ने मतदान की तारीख़ का एलान किया था। आयोग के मुताबिक़ इन सीटों पर 13 को मतदान होंगे जबकि वोटों की गिनती 23 नवंबर को होगी।
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