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अखिलेश-अवनीश अवस्थी की लड़ाई, ब्राह्मण समाज पर आई, सुनील भराला ने कहा- समय आने पर दिया जाएगा करारा जवाब
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आईएएस अधिकारी अवनीश अवस्थी को लेकर बयान दिया, जो अब राजनीतिक और जातिगत विवाद का रूप ले रहा है. ब्राह्मण समाज खासा नाराज है. बीजेपी नेता और राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक सुनील भराला ने इसे ब्राह्मण समाज का अपमान करार दिया और कहा कि यह पूरे समाज पर प्रहार है, न कि केवल अवनीश अवस्थी पर.
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उत्तर प्रदेश में भले ही इन दिनों कोई चुनाव न हो लेकिन सूबे का सियासी पारा आसमान छू रहा है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने प्रेसवार्ता के दौरान आईएएस अधिकारी अवनीश अवस्थी को लेकर जो बयान दिया है, वह अब राजनीतिक के साथ-साथ जातिगत मोड़ लेता दिखाई दे रहा है. अखिलेश यादव के इस बयान पर ब्राह्मण समाज नाराजगी जाहिर की है.
ब्राह्मण समाज की नाराजगी
सपा प्रमुख की इस टिप्पणी पर ब्राह्मण समाज में गुस्सा साफ झलक रहा है. राष्ट्रीय परशुराम परिषद के संस्थापक और भाजपा नेता पंडित सुनील भराला ने इसे पूरे ब्राह्मण समाज का अपमान बताया. उन्होंने कहा कि अवनीश अवस्थी पर हमला दरअसल केवल एक अधिकारी पर नहीं बल्कि पूरे समाज पर हमला है. सुनील भराला ने साफ चेतावनी दी कि ब्राह्मण समाज इस अपमान को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेगा और समय आने पर इसका जवाब देगा. उन्होंने यह भी कहा कि अवनीश अवस्थी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मिलकर बेहतर प्रशासनिक कार्य किए हैं और समाज उनके साथ मजबूती से खड़ा है.
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अखिलेश यादव का बयान बना सियासी बवंडर
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दरअसल अखिलेश यादव ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता के दौरान कहा कि 2017 में उन पर लगे टोटी चोरी के आरोप किसी सामान्य राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा नहीं थे बल्कि यह एक सुनियोजित साजिश थी. उनका आरोप था कि उस समय आईएएस अधिकारी अवनीश अवस्थी और मुख्यमंत्री के पूर्व ओएसडी ने मिलकर उन्हें बदनाम करने की कोशिश की थी. अखिलेश ने यह भी कहा कि वह इस बात को कभी नहीं भूलेंगे. अखिलेश के इस बयान को भाजपा ने तुरंत लपक लिया और इसे ब्राह्मण समाज के अपमान से जोड़कर बड़ा मुद्दा बना दिया. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यूपी की राजनीति में जातीय समीकरण हमेशा अहम भूमिका निभाते हैं और ऐसे बयान चुनावी मौसम ना होने पर भी सियासी पारे को गरमा देते हैं.
कौन हैं अवनीश अवस्थी
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अवनीश अवस्थी 1987 बैच के यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी रहे हैं. उन्हें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बेहद भरोसेमंद माना जाता है. रिटायरमेंट के बाद भी योगी सरकार ने उन्हें सलाहकार नियुक्त किया और वर्तमान में वह फरवरी 2026 तक मुख्यमंत्री के सलाहकार के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं. यह तीसरी बार है जब उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है. उनकी पहचान एक सख्त और ईमानदार अधिकारी की रही है. उन्होंने योगी सरकार के कई महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाई है. यही कारण है कि भाजपा और खासकर ब्राह्मण समाज उन्हें निशाने पर लिए जाने को व्यक्तिगत अपमान की तरह देख रहा है.
क्या है टोटी चोरी विवाद?
इस विवाद की जड़ 2017 में उस समय पड़ी जब यूपी की सत्ता बदलने के बाद मुख्यमंत्री आवास को शुद्धिकरण के लिए धुलवाया गया. इसी दौरान यह दावा किया गया कि आवास से टोटी गायब है. भाजपा ने इसे मुद्दा बनाते हुए अखिलेश यादव पर टोटी चोरी का आरोप लगा दिया. वर्षों पुराने इस आरोप ने बार-बार राजनीति में अपनी जगह बनाई है. हाल ही में जब भाजपा विधायक केतकी सिंह ने अखिलेश यादव से टोटी चोरी का हिसाब मांगा तो मामला फिर सुर्खियों में आ गया. इस बयान से नाराज होकर सपा कार्यकर्ताओं ने विधायक के आवास पर हंगामा किया और कानूनी नोटिस भी भेजा.
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लंबा खिंच सकता है यह मुद्दा
अखिलेश यादव का यह बयान भाजपा को बैठे-बैठाए एक ऐसा मुद्दा दे गया है जिससे वह ब्राह्मण समाज को अपने साथ और मजबूत करने की कोशिश करेगी. उत्तर प्रदेश में जातीय समीकरण चुनावी नतीजों को बड़े पैमाने पर प्रभावित करते हैं. ऐसे में ब्राह्मण समाज का नाराज होना सपा के लिए नुकसानदायक हो सकता है. वहीं सपा का कहना है कि अखिलेश यादव का बयान किसी जाति विशेष पर नहीं बल्कि एक साजिश पर था. लेकिन राजनीति में अक्सर बयान संदर्भ से हटकर नए मायने ले लेते हैं. यही वजह है कि विपक्ष अब इस बयान को सपा के खिलाफ हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है.
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फिलहाल यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले दिनों में यह विवाद किस रूप में आगे बढ़ता है. भाजपा इसे अपने राजनीतिक फायदे के लिए भुनाएगी और सपा को लगातार रक्षात्मक मोड में धकेलने की कोशिश करेगी. दूसरी ओर सपा इस मुद्दे को व्यक्तिगत बदनाम करने की साजिश बताकर नुकसान को कम करने में जुटेगी.