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अजमेर फोटो ब्लैकमेल कांड: चार आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत, जेल से बाहर आने पर मुख्य आरोपी नफीस चिश्ती ने क्या कहा?"

रोपी पक्ष के वकील एडवोकेट आशीष राजोरिया ने जानकारी दी कि जमीर हुसैन और इकबाल भाटी के पीड़िताओं द्वारा नाम न लिए जाने के आधार पर बेल मिल चुकी थी. इनमें से एक आरोपी जमीर हुसैन को अमेरिका की नागरिकता मिली हुई है. वहीं, नफीस और सलीम चिश्ती करीब 9 साल जेल की सजा भुगत चुके हैं और उन्हें ट्रायल कोर्ट से भी जमानत मिली थी. अब हाईकोर्ट के स्थगन आदेश से चारों आरोपियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले की अंतिम सुनवाई और फैसला अभी लंबित है.

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अजमेर के बहुचर्चित अश्लील फोटो ब्लैकमेल कांड के चार आरोपियों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. हाईकोर्ट ने चारों को जमानत दे दी है. इनको पॉक्सो कोर्ट ने 20 अगस्त 2024 को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

1992 के अजमेर ब्लैकमेल कांड के आरोपी जेल से रिहा

हाईकोर्ट द्वारा आजीवन कारावास की सजा पर स्थगन आदेश जारी करने के बाद मंगलवार को आरोपी नफीस चिश्ती, इकबाल भाटी, सलीम चिश्ती और सैयद जमीर हुसैन अजमेर केंद्रीय कारागृह से बाहर निकले.

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आरोपियों ने पॉक्सो कोर्ट फैसले के खिलाफ राजस्थान हाईकोर्ट में अपील की थी. लगभग एक साल बाद 8 अगस्त को हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए सजा पर रोक लगाई और आरोपियों को जमानत प्रदान की. न्यायमूर्ति इंद्रजीत सिंह की एकलपीठ ने 2-2 जमानतदारों के आधार पर यह राहत दी.

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उम्रकैद के फैसले पर लगी रोक

आरोपी पक्ष के वकील एडवोकेट आशीष राजोरिया ने जानकारी दी कि जमीर हुसैन और इकबाल भाटी के पीड़िताओं द्वारा नाम न लिए जाने के आधार पर बेल मिल चुकी थी. इनमें से एक आरोपी जमीर हुसैन को अमेरिका की नागरिकता मिली हुई है. वहीं, नफीस और सलीम चिश्ती करीब 9 साल जेल की सजा भुगत चुके हैं और उन्हें ट्रायल कोर्ट से भी जमानत मिली थी. अब हाईकोर्ट के स्थगन आदेश से चारों आरोपियों को राहत जरूर मिली है, लेकिन मामले की अंतिम सुनवाई और फैसला अभी लंबित है.

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रिहा होकर क्या बोला मुख्य आरोपी

इस मामले में जमानत पर रिहा होकर जेल से बाहर आए मुख्य आरोपी नफीस चिश्ती ने कहा कि उन्हें हाई कोर्ट पर पूरा भरोसा था. कोर्ट पर आज भी भरोसा है और कल भी भरोसा रहेगा. जो करेगा मालिक अच्छा करेगा. वहीं अमेरिका में रहने वाले जमीर हुसैन के बेटे सैयद समीर हुसैन ने कहा कि उनके पापा का न एफआईआर में कोई नाम था, न ही कोई फोटोग्राफ में उनकी भूमिका थी, लेकिन उसके बावजूद भी उनको जेल में रहना पड़ा. अजमेर की निचली अदालत ने भले ही अपना फैसला कुछ भी दिया हो लेकिन हाईकोर्ट ने उनको जमानत देकर साफ कर दिया कि हिंदुस्तान के कानून में देर है लेकिन अंधेर नहीं है. उन्होंने हिंदुस्तान के कानून की भी सराहना करते हुए कहा कि उनको कानून और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज उनके पापा को जमानत होने पर उनको खुशी है.

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