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हादसा या सियासी साजिश...! प्लेन क्रैश से पहले आसमान में क्यों गोल-गोल घूम रहा था अजित पवार का विमान?

Baramati Plane Crash: बारामती प्लेन क्रैश एक ऐसा हादसा बन गया, जिसने यह दिखा दिया कि हवाई यात्रा में छोटी सी चूक या परिस्थिति कैसे बड़ा नुकसान कर सकती है. जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह घटना एक दर्दनाक याद बनकर रह गई है, जिसने कई परिवारों को हमेशा के लिए बदल दिया.

Image Source: Social Media
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Ajit Pawar Passes Away: बुधवार सुबह 28 जनवरी को महाराष्ट्र के बारामती इलाके में एक दर्दनाक विमान हादसा हुआ. इस हादसे में उप मुख्यमंत्री अजित पवार की जान चली गई. उनके साथ इस चार्टर्ड विमान में कुल 6 लोग सवार थे, जिनमें विमान के कैप्टन, फर्स्ट ऑफिसर और सिक्योरिटी गार्ड भी शामिल थे. हादसे की खबर फैलते ही पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई. हर किसी के मन में एक ही सवाल था, आखिर यह हादसा कैसे हुआ और इसका जिम्मेदार कौन है?

आसमान में घूमता रहा विमान

हादसे के चश्मदीदों ने जो बताया, उसने इस घटना को और भी रहस्यमय बना दिया. लोगों का कहना है कि विमान लैंडिंग से ठीक पहले आसमान में गोल-गोल घूमता रहा. पहले तो विमान ने रनवे पर उतरने की कोशिश की, लेकिन अचानक वह नीचे आने की बजाय फिर से ऊपर उड़ गया. इसके बाद विमान ने दोबारा रनवे की ओर रुख किया, लेकिन दूसरी कोशिश में ही वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया.

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दूसरी कोशिश क्यों बनी जानलेवा?

एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, विमान का इस तरह गोल-गोल घूमना कोई असामान्य बात नहीं होती. इसका मतलब यह होता है कि पायलट को पहली बार में रनवे सही ढंग से दिखाई नहीं दिया या विमान सही एंगल और स्पीड में नहीं था. ऐसे में पायलट लैंडिंग को बीच में ही रोक देता है, ताकि किसी बड़े खतरे से बचा जा सके. इसी प्रक्रिया को “एबॉर्टेड अप्रोच” कहा जाता है.

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दूसरी बार जब विमान रनवे की ओर बढ़ रहा था, तब वह एक बड़े घुमाव यानी लूप बनाता हुआ दिखा. इसका साफ मतलब है कि पायलट विमान को दोबारा रनवे के साथ सीधा करने की कोशिश कर रहा था.

छोटे एयरस्ट्रिप और बड़ी चुनौती

बारामती जैसे छोटे एयरस्ट्रिप्स पर अक्सर ILS यानी इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम नहीं होता. यह सिस्टम पायलट को खराब मौसम या कम दृश्यता में भी रेडियो सिग्नल के जरिए सही दिशा और ऊंचाई की जानकारी देता है. ILS न होने की स्थिति में पायलट को पूरी तरह अपनी आंखों और अनुभव पर निर्भर रहना पड़ता है. अगर धुंध हो, हवा तेज हो या रनवे साफ नजर न आए, तो लैंडिंग बेहद मुश्किल हो जाती है.

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हादसा या सियासी साजिश?

हादसे के बाद कुछ लोगों ने साजिश की आशंका भी जताई, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, किसी भी तरह की साजिश के संकेत नहीं मिले. जांच एजेंसियों का कहना है कि यह हादसा तकनीकी कारणों, मौसम की स्थिति या लैंडिंग के दौरान आई मुश्किलों की वजह से हो सकता है. फिलहाल किसी एक व्यक्ति या कारण को सीधे जिम्मेदार ठहराना सही नहीं होगा.

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बारामती प्लेन क्रैश एक ऐसा हादसा बन गया, जिसने यह दिखा दिया कि हवाई यात्रा में छोटी सी चूक या परिस्थिति कैसे बड़ा नुकसान कर सकती है. जांच पूरी होने के बाद ही सच्चाई पूरी तरह सामने आएगी, लेकिन फिलहाल यह घटना एक दर्दनाक याद बनकर रह गई है, जिसने कई परिवारों को हमेशा के लिए बदल दिया.

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