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AI Summit रोबोट डॉग विवाद: कौन हैं गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह, LinkedIn अपडेट से क्यों बढ़ी चर्चा?

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित AI Impact Summit के दौरान गैलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर प्रदर्शित रोबोटिक डॉग को लेकर विवाद खड़ा हो गया. इस बीच प्रोफेसर नेहा सिंह का वीडियो चर्चा में आ गया, इसके तुरंत बाद नेहा सिंह ने अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल पर ‘Open to Work’ अपडेट किया.

Source: Social Media/ Pro. Neha Singh
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AI Impact Summit: नई दिल्ली से बड़ी खबर सामने आई है. भारत मंडपम में चल रहे एआई इंपैक्ट समिट 2026 के दौरान एक रोबोटिक डॉग को लेकर ऐसा विवाद खड़ा हुआ कि मामला सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में लगातार बना हुआ है. इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) रहीं की प्रोफ़ेसर नेहा सिंह हैं. उनका एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें वह 'रोबोडॉग डॉग' प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी देती नजर आ रही हैं.

रोबोटिक डॉग को लेकर कैसे शुरू हुआ विवाद?

दरअसल, समिट के दौरान यूनिवर्सिटी की ओर से एक एआई पावर्ड रोबोटिक डॉग को पेश किया गया. दावा किया गया कि यह इन-हाउस विकसित तकनीक है और इसे यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने तैयार किया है. रोबोट को ‘ओरियन’ नाम दिया गया और इसे भारतीय नवाचार की मिसाल के तौर पर दिखाया गया. लेकिन कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हो गया. कई टेक एक्सपर्ट्स और यूजर्स ने दावा किया कि यह रोबोट दरअसल चीन की कंपनी Unitree Robotics का मॉडल है. चीन पल्स नामक हैंडल ने तस्वीरें और पुराने वीडियो साझा करते हुए कहा कि यह वही मॉडल है जिसे पहले चीन में प्रदर्शित किया जा चुका है. यही विवाद के चलते पहले तो समिट से गलगोटिया यूनिवर्सिटी को बाहर का रास्ता दिखाया गया. अब सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है उसके मुताबिक़ यूनिवर्सिटी इस ग़लती का दोष प्रोफेसर नेहा सिंह (Neha Singh) पर मढ़ रही है. 

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माफी, ‘Open to Work’ और बढ़ती अटकलें

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विवाद उस समय और बढ़ गया जब यूनिवर्सिटी की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी गई. इसके बाद नेहा सिंह ने अपनी लिंक्डइन प्रोफाइल पर ‘Open to Work’ अपडेट कर दिया. इस अपडेट ने अटकलों को और हवा दे दी. लोगों ने सवाल पूछना शुरू कर दिया कि क्या उन्हें पद से हटा दिया गया है या वह खुद नई नौकरी की तलाश में हैं. हालांकि, इस संबंध में न तो यूनिवर्सिटी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है और न ही नेहा सिंह की तरफ से स्पष्ट पुष्टि की गई है.

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कौन हैं नेहा सिंह?

नेहा सिंह स्कूल ऑफ मैनेजमेंट में कम्युनिकेशन की फैकल्टी मेंबर हैं. उन्होंने नवंबर 2023 में गैलगोटियास यूनिवर्सिटी जॉइन की थी. उनकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, वह कम्युनिकेशन विभाग की हेड के रूप में भी अपनी भूमिका का उल्लेख करती हैं. उन्होंने स्पष्ट किया है कि वह कोर टेक्निकल फैकल्टी का हिस्सा नहीं हैं. उनका विशेषज्ञता क्षेत्र मैनेजमेंट और कम्युनिकेशन है. उनका करियर सफर शिक्षा जगत में लगातार सक्रिय रहा है. गैलगोटियास यूनिवर्सिटी से पहले वह 2022 से 2023 तक शारदा यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर रहीं. उससे पहले मई 2018 से दिसंबर 2019 तक उन्होंने GITAM में भी असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम किया. कम्युनिकेशन स्किल्स, पब्लिक स्पीकिंग और स्टेज प्रेजेंस उनके प्रमुख विषय रहे हैं.

कैसी है नेहा सिंह की शैक्षणिक पृष्ठभूमि?

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शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो उनकी स्कूली शिक्षा Girls' High School & College से हुई, जहां वह हेड गर्ल भी रह चुकी हैं. इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से बीकॉम प्रथम श्रेणी में पास किया. आगे चलकर देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी से एमबीए इन बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन एंड मैनेजमेंट की डिग्री हासिल की. उनकी प्रोफाइल से स्पष्ट होता है कि वह छात्रों में आत्मविश्वास और प्रभावी संवाद कौशल विकसित करने पर विशेष जोर देती हैं.

जिम्मेदारी, बयान और स्टॉल खाली करने के निर्देश

विवाद के बाद नेहा सिंह ने बयान दिया कि वह अपनी बात को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने में असफल रहीं और इसकी जिम्मेदारी लेती हैं. दूसरी ओर यूनिवर्सिटी ने माफी मांगते हुए पूरे मामले की जिम्मेदारी उन्हीं पर डाल दी. इसके बाद खबर आई कि भारत मंडपम में लगाया गया यूनिवर्सिटी का स्टॉल खाली करने के निर्देश दिए गए हैं.

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सोशल मीडिया पर चल रही बड़ी बहस 

सोशल मीडिया पर इस पूरे प्रकरण को लेकर मीम्स और प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है. कुछ लोग इसे तकनीकी दावों की पारदर्शिता से जोड़कर देख रहे हैं, तो कुछ इसे कम्युनिकेशन गैप का मामला बता रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि टेक्नोलॉजी जैसे संवेदनशील क्षेत्र में किसी भी दावे को तथ्यों और स्पष्ट प्रस्तुति के साथ रखना बेहद जरूरी होता है. एक छोटी सी चूक भी बड़ी बहस का रूप ले सकती है.

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बताते चलें कि यह घटना केवल एक विवाद नहीं, बल्कि शिक्षा संस्थानों के लिए एक सीख भी है. इनोवेशन और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ पारदर्शिता और तथ्यात्मक प्रस्तुति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. फिलहाल सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यूनिवर्सिटी और नेहा सिंह की ओर से आगे क्या आधिकारिक बयान आता है. AI Impact Summit का यह विवाद तकनीक और संचार, दोनों की जिम्मेदारी की याद दिला गया है.

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