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Yogi के खिलाफ BJP नेता Mukhtar Abbas Naqvi ने भी बोली 'कांग्रेसी जुबान'

बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री भी योगी सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज उठाते हुए योगी विरोधियों की हां में हां मिलाने में लगे हुए हैं और जिला मुजफ्फरनगर में दुकानदारों के नेमप्लेट लगाने के आदेश का विरोध किया है

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उत्तर प्रदेश की सत्ता संभाल रहे योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के बीच कथित विवाद अभी थमा भी नहीं था कि अब बीजेपी के एक और कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री ने योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनके फैसले के खिलाफ आवाज उठाते हुए योगी विरोधियों की हां में हां मिलाने में लगे हुए हैं। ये मंत्री कोई और नहीं मोदी सरकार के लगातार दो कार्यकाल में बड़ा मंत्रालय संभाल चुके मुख्तार अब्बास नकवी हैं।जिन्होंने जिला मुजफ्फरनगर में दुकानदारों के नेमप्लेट लगाने के आदेश का विरोध किया है।

योगी के आदेश पर बीजेपी में ही मच गया विद्रोह

दरअसल उत्तर प्रदेश के जिला मुजफ्फरनगर में सावन से पहले ही प्रशासन ने आदेश दे दिया है कि जिस रूट से कांवड़ यात्रा निकाली जाएगी। उस रूट पर आने वाले सभी दुकानदारों को अपनी दुकान या ठेले पर काम करने वाले या फिर प्रोपराइटर का नाम जरूर लिखे, जिससे भोलेनाथ के भक्तों को कोई परेशानी ना हो और ये कोई पहली बार आदेश नहीं आया है। इससे पहले भी मुजफ्फरनगर जिला प्रशासन सावन में इस तरह के आदेश देता रहा है लेकिन इसके बावजूद योगी विरोधियों ने जिला प्रशासन के इस फैसले के खिलाफ जैसे आसमान सिर पर उठा लिया है।यहां तक कि मोदी सरकार में मंत्री रह चुके बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुख्तार अब्बास नकवी भी इस मामले में 

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योगी विरोधियों की हां में हां मिला रहे हैं। 18 जुलाई को ही उन्होंने सोशल मीडिया पर किये गये एक पोस्ट में लिखा- कुछ अति-उत्साही अधिकारियों के आदेश हड़बड़ी में गडबड़ी वाली, छुआछूत की बीमारी को बढ़ावा दे सकते हैं, आस्था का सम्मान होना ही चाहिए लेकिन छुआछूत का संरक्षण नहीं होना चाहिए, 'जनम जात मत पूछिए, का जात अरु पात, रैदास पूत सब प्रभु के, कोए नहिं जात कुजात।

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मुख्तार अब्बास नकवी वैसे तो बीजेपी के कद्दावर नेता हैं लेकिन इसके बावजूद योगी सरकार के फैसले के खिलाफ उन्होंने जो कहा है। उससे योगी विरोधियों में जैसे खुशी की लहर दौड़ पड़ी है, तभी तो कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता और एयरफोर्स की पूर्व अधिकारी अनुमा आचार्य ने उनके बयान पर लिखा -कहीं जमीर बाकी रहा नकवी साहब, चलिये अच्छा है।

एक और कांग्रेसी नेता अजय उपाध्याय ने भी मुख्तार अब्बास नकवी की पोस्ट पर लिखा - चलिए, इतने सालों  के बाद ही सही आखिर आपने भी पहली बार अपना मुंह खोला, आस्था के नाम पर अंधभक्ति RSS और BJP के मौलिक विचारधारा और चरित्र में है, सामाजिक, धार्मिक एवं जातिगत अस्पृश्यता फैलाकर सियासी लाभ लेने वालों से न्यायसंगत निर्णय की आशा करना बेमानी ।

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बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी को कांग्रेस नेताओं का मिला ये समर्थन बता रहा है कि उन्होंने किस तरह से विपक्ष की हां में हां मिलाते हुए योगी सरकार के फैसले के विरोध में आवाज उठाई, यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कांग्रेस ने जहां उनका समर्थन किया तो वहीं बीजेपी समर्थकों ने उनका जबरदस्त विरोध किया। जिससे बौखलाए मुख्तार अब्बास नकवी ने एक और ट्वीट में कांवड़ निकालते हुए अपनी फोटो पोस्ट करते हुए लिखा- अरे ट्रोलर टट्टुओं...कांवड यात्रा के सम्मान, श्रद्धा का सर्टिफिकेट कम से कम मुझे तो मत बांटो, मेरा हमेशा मानना है कि "कोई भी आस्था असहिष्णुता, अस्पृश्यता की बन्धक नहीं होनी चाहिए।

चुनावी हार के बाद योगी और केशव मौर्य के बीच कथित विवाद को लेकर पहले से ही बवाल मचा हुआ हो, ऐसे वक्त में मुख्तार अब्बास नकवी ने भी जिस तरह से सरकार के फैसले के खिलाफ आवाज उठानी शुरू कर दी।उससे कहीं ना कहीं विपक्ष जहां खुशी से नाच रहा है तो वहीं बीजेपी समर्थक उनके बयान का विरोध कर रहे हैं,तो वहीं इस पूरे मामले पर मुजफ्फरनगर पुलिस ने सफाई देते हुए कहा कि-

श्रावण कांवड़ यात्रा के दौरान पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में कांवड़िये पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रास्ते हरिद्वार से जल लेकर मुजफ्फरनगर जिले से गुजरते हैं, श्रावण के पवित्र महीने के दौरान, कई लोग, खासकर कांवड़िये अपने आहार में कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करते हैं, पहले भी ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां कांवड़ मार्ग पर सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ बेचने वाले कुछ दुकानदारों ने अपनी दुकानों के नाम इस तरह से रखे हैं, जिससे कांवड़ियों में भ्रम की स्थिति पैदा हुई और कानून-व्यवस्था बिगड़ी, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने और श्रद्धालुओं की आस्था को देखते हुए कांवड़ मार्ग पर खाद्य पदार्थ बेचने वाले होटलों, ढाबों और दुकानदारों से अनुरोध किया गया है कि वे स्वेच्छा से अपने मालिकों और कर्मचारियों के नाम प्रदर्शित करें, इस आदेश का उद्देश्य किसी भी प्रकार का धार्मिक भेदभाव पैदा करना नहीं है, बल्कि मुजफ्फरनगर जिले से गुजरने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा, आरोपों का जवाब देना और कानून-व्यवस्था की स्थिति को बचाना है, यह व्यवस्था पहले भी प्रचलित रही है ।

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कांवड़ यात्रा की रूट पर दुकानदारों को दुकान पर अपना नाम लिखने के आदेश पर भले ही बवाल मचा हुआ हो लेकिन मुजफ्फरनगर पुलिस का ये बयान बता रहा है कि ऐसा आदेश पहले भी जारी किया जा चुका है।और इस बार भी जब आदेश जारी किया गया तो विपक्ष के साथ साथ बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी भी इसका विरोध करने लगे।

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