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कैश कांड के बाद जजों की नियुक्ति के लिए सरकार कौन सा नया नियम ला रही ? क्या है कॉलेजियम विवाद ?
बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम के तहत जज खुद की नियुक्ति खुद ही करते हैं। यह सिस्टम साल 1993 से लागू है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 5 सबसे सीनियर जज मिलकर नए जजों की नियुक्ति,ट्रांसफर और प्रमोशन की सिफारिश करते हैं। कॉलेजियम की सिफारिश सरकार को माननी पड़ती है। इसके अलावा कॉलेजियम अगर दोबारा से वही नाम भेजता है। तो भी सरकार को स्वीकार करना पड़ता है। हालांकि इसके सिस्टम में पारदर्शिता की कमी की वजह से कई बड़े आरोप लगते रहे हैं।
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दिल्ली हाइकोर्ट के जज यशवंत वर्मा के घर मिले कैश और जले नोट का मामला अभी शांत नहीं हुआ है। इस कैश कांड के बाद सरकार न्याय व्यवस्था में जजों की नियुक्ति से जुड़े एक नए कानून पर विचार कर रही है। हालांकि अभी तक ऑफीशियली तौर पर यह खबर सामने नहीं आई है। लेकिन उम्मीद है कि सरकार इस पर विचार कर रही है। जानकारी के लिए बता दें कि यह वही कानून है जिसे सुप्रीम कोर्ट ने साल 2015 में संवैधानिक रूप से बताकर रद्द कर दिया था।
क्या है कॉलेजियम सिस्टम ?
बता दें कि कॉलेजियम सिस्टम के तहत जज खुद की नियुक्ति खुद ही करते हैं। यह सिस्टम साल 1993 से लागू किया गया है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के 5 सबसे सीनियर जज मिलकर नए जजों की नियुक्ति,ट्रांसफर और प्रमोशन की सिफारिश करते हैं। कॉलेजियम की सिफारिश सरकार को माननी पड़ती है। इसके अलावा कॉलेजियम अगर दोबारा से वही नाम भेजता है। तो भी सरकार को स्वीकार करना पड़ता है। हालांकि इसके सिस्टम में पारदर्शिता की कमी की वजह से कई बड़े आरोप लगते रहे हैं।
क्या है NJAC कानून ?
NJAC कानून का मतलब "National Judicial Appointments Commission" है। यह कानून एक बार फिर से चर्चाओं में है। बता दें कि वर्तमान में जो सिस्टम चल रहा है। उसे कॉलेजियम सिस्टम कहा जाता है। इस कानून के तहत सरकार साल 2014 में नया कानून लाने की कोशिश में थी। ताकि सरकार को भी जजों की नियुक्ति में अहम भूमिका मिल सके। इस कानून में कुल 6 सदस्य होते हैं। जिसमें चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया के अध्यक्ष, सुप्रीम कोर्ट के दो सीनियर जज,कानून मंत्री, 2 प्रतिष्ठित व्यक्ति, इनमें से एक SC/ST/OBC अल्पसंख्यक या कोई महिला होती है। यह कमेटी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों को शॉर्टलिस्ट करती है। इसके बाद राष्ट्रपति उस पर मुहर लगाती है। लेकिन साल 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक बताकर खारिज कर दिया था। उसके बाद कॉलेजियम सिस्टम को बहाल कर दिया था।
जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे ने की उपराष्ट्रपति के साथ मीटिंग
कमाल की बात यह है कि इस कानून पर विपक्षी दल भी सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने 21 मार्च को इस मुद्दे को उठाया था। इस मुद्दे को लेकर बीते सोमवार को जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खरगे ने उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के साथ मुलाकात की। उपराष्ट्रपति ने बिना किसी का नाम लिए NJAC कानून को लागू करने की तरफ इशारा किया। इस मुलाकात में यशवंत शर्मा के घर मिले कैश कांड पर भी चर्चा हुई। खबर यह भी है कि न्यायपालिका की छवि को साफ रखने और किसी तरह के भ्रष्टाचार से बचाने के लिए वर्तमान की व्यवस्था में बदलाव की कोशिश है। इसमें सरकार को विपक्ष का भी साथ मिल रहा है। ऐसे में आने वाले समय में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ सभी पार्टियों को मिलाकर एक मीटिंग बुला सकते हैं।
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