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नेता की हत्या कर लाश दफना देने वाले बिहार के कुख्यात डब्लू यादव को यूपी पुलिस ने एनकाउंटर में किया ढेर, 50 हजार का था इनाम

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में यूपी एसटीएफ, बिहार पुलिस और हापुड़ पुलिस के संयुक्त ऑपरेशन में बिहार का कुख्यात गैंगस्टर डब्लू यादव एनकाउंटर में मार गिराया गया. यह मुठभेड़ 27-28 जुलाई की रात थाना सिंभावली क्षेत्र में हुई. डब्लू यादव को सीने में गोली लगी, जिसके बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई. वह बेगूसराय का रहने वाला था, 50 हज़ार का इनामी था और उस पर कई संगीन मामले दर्ज थे.

एसटीएफ / डब्लू यादव
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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हमेशा से यह स्पष्ट करते रहे हैं कि अपराधियों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है, या तो वे राज्य छोड़कर चले जाएं या फिर उन्हें उनकी असली जगह तक पहुंचा दिया जाएगा. प्रदेश की पुलिस भी मुख्यमंत्री की इस नीति को पूरी सख़्ती से लागू कर रही है और लगातार बड़े माफियाओं और संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई कर रही है. जब खुद प्रदेश के नामी अपराधी और माफिया कानून से नहीं बच पा रहे, तो दूसरे राज्यों से आए अपराधियों का बच पाना असंभव है. हाल ही में इसका ताजा उदाहरण तब सामने आया, जब यूपी एसटीएफ ने बिहार पुलिस की मदद से हापुड़ जिले में मुठभेड़ के दौरान बिहार के कुख्यात गैंगस्टर और 50 हज़ार के इनामी बदमाश डब्लू यादव को मार गिराया.

दरअसल, बिहार और यूपी पुलिस की संयुक्त कार्रवाई को नई पहचान दी है. 27 और 28 जुलाई की मध्य रात थाना सिंभावली क्षेत्र में अपराध की दुनिया का खतरनाक चेहरा माने जाने वाले कुख्यात गैंगस्टर डब्लू यादव को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया. एनकाउंटर को लेकर मिली जानकारी के अनुसार, यह ऑपरेशन यूपी एसटीएफ की नोएडा यूनिट, बिहार पुलिस और हापुड़ पुलिस की संयुक्त रणनीति का नतीजा था. बताया जा रहा है कि एनकाउंटर के दौरान डब्लू यादव को सीने में गोली लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया. इलाज के लिए उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उसकी मौत हो गई.

हथियारों का जखीरा बरामद

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घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार, कारतूस और अन्य संदिग्ध सामान बरामद किया गया है. मृत अपराधी की पहचान बिहार के बेगूसराय जिले के साहेबपुर कमाल निवासी डब्लू यादव के रूप में हुई है. वह बिहार पुलिस के मोस्ट वांटेड अपराधियों में से एक था और उस पर 50,000 रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था. बेगूसराय पुलिस के रिकॉर्ड में उसका नाम गैंग A121 के सरगना के तौर पर दर्ज था. यह गैंग इलाके में दहशत का पर्याय बन चुका था और उस पर एक के बाद एक संगीन वारदातों को अंजाम देने के आरोप थे.

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सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या का मुख्य आरोपी

डब्लू यादव पर हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम पार्टी) के प्रखंड अध्यक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता विकास कुमार उर्फ राकेश कदम की अपहरण कर हत्या करने का आरोप था. पुलिस के अनुसार 24 मई 2025 को उसने अपने गैंग के साथ मिलकर विकास कुमार का अपहरण किया और उन्हें बेगूसराय के दियारा क्षेत्र में ले जाकर बेरहमी से हत्या कर दी. हत्या के बाद शव को बालू में गाड़ दिया गया था. यह मामला न सिर्फ राजनीतिक बल्कि सामाजिक रूप से भी बेहद संवेदनशील बन गया था और पुलिस पर जल्द कार्रवाई का भारी दबाव था. इसी केस के बाद से डब्लू यादव की तलाश तेज हो गई थी.

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पहले भी कर चुका था खौफनाक वारदात

डब्लू यादव का आपराधिक इतिहास लंबा और खौफनाक रहा है. वर्ष 2017 में उसने एक अन्य हत्या को अंजाम दिया था. उस पर आरोप था कि उसने गवाही देने जा रहे महेंद्र यादव को गोली मारकर हत्या कर दी थी. इस मामले में साहेबपुर कमाल थाने में IPC की धारा 302/34/120(b) और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत केस दर्ज किया गया था. इस घटना के बाद से ही वह पुलिस के रडार पर आ गया था, लेकिन हर बार वह कानून की पकड़ से बच निकलता रहा.

कुल 24 केस

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डब्लू यादव पर कुल 24 आपराधिक मामले दर्ज थे. इनमें हत्या के दो, हत्या के प्रयास के छह, लूट के दो, डकैती का एक, रंगदारी के दो केस शामिल हैं. इन मामलों में वह वर्षों से फरार चल रहा था. पुलिस की लगातार कोशिशों और खुफिया सूचनाओं के बाद यह सफलता मिली. इस एनकाउंटर को बिहार और उत्तर प्रदेश पुलिस की संयुक्त कार्रवाई का बड़ा परिणाम माना जा रहा है, जिसने न सिर्फ एक खतरनाक अपराधी का अंत किया, बल्कि अपराधियों को यह संदेश भी दे दिया कि कानून से कोई नहीं बच सकता.

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बताते चलें कि डब्लू यादव जैसे खूंखार अपराधी की मौत के बाद बिहार के उन क्षेत्रों के लोगों को राहत मिली. जिन जगहों पर डब्लू यादव ज्यादा सक्रिय था. स्थानीय लोगों का कहना है कि डब्लू यादव के गैंग की वजह से बेगूसराय और आसपास के क्षेत्रों में डर का माहौल बना रहता था. अब जब उसका अंत हो गया है, तो लोग चैन की नींद ले सकते हैं. वहीं प्रशासन और पुलिस की इस कार्रवाई की हर तरफ सराहना हो रही है. अधिकारियों का कहना है कि यह ऑपरेशन कई महीनों की तैयारी और खुफिया जानकारी पर आधारित था, जिसमें सभी एजेंसियों की आपसी समन्वय की भूमिका अहम रही.

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