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तिरुपति में एसआईटी की छह सदस्यीय टीम श्री वेंकटेश्वर मंदिर की रसोई का निरीक्षण करने पहुंची
टीम श्रीवारी मंदिर में लड्डू पोटू, मंदिर के बाहर बूंदी पोटू, घी स्टोरेज सेंटर और विपणन (मार्केटिंग) गोदाम से साक्ष्य एकत्र कर रही है। वे मंदिर के अधिकारियों से लड्डू बनाने की विधि, घी की खपत, प्रसाद बनाने, घी की आपूर्ति और अन्य मुद्दों पर विवरण भी एकत्र कर रहे हैं। एसआईटी टीम ने आवश्यक रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं।
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आंध्र प्रदेश के तिरुपति में भगवान श्री वेंकटेश्वर मंदिर में शनिवार सुबह विशेष जांच दल (एसआईटी) की छह सदस्यीय टीम मंदिर की रसोई का निरीक्षण करने पहुंची।
तिरुमाला 'लड्डू' विवाद की जांच कर रही एसआईटी टीम ने मंदिर के विभिन्न हिस्सों का निरीक्षण किया। जांच दल ने मंदिर की रसोई की भी जांच की, जहां पवित्र तिरुमाला श्रीवारी लड्डू (प्रसादम) बनाया जाता है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टीम ने प्रयोगशाला का निरीक्षण किया, जहां लड्डू की गुणवत्ता जांची जाती है। एसआईटी टीम ने आटा मिल का भी निरीक्षण किया।
एसआईटी टीम ने आवश्यक रिकॉर्ड किए जब्त
टीम श्रीवारी मंदिर में लड्डू पोटू, मंदिर के बाहर बूंदी पोटू, घी स्टोरेज सेंटर और विपणन (मार्केटिंग) गोदाम से साक्ष्य एकत्र कर रही है। वे मंदिर के अधिकारियों से लड्डू बनाने की विधि, घी की खपत, प्रसाद बनाने, घी की आपूर्ति और अन्य मुद्दों पर विवरण भी एकत्र कर रहे हैं। एसआईटी टीम ने आवश्यक रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं।
ज्ञात हो कि इससे तीन हफ्ते पहले, एसआईटी की एक टीम पवित्र प्रसादम में इस्तेमाल किए जाने वाले घी में मिलावट की जांच करने के लिए तिरुपति गई थी। टीम ने विस्तृत जांच की थी, जिसका उद्देश्य मिलावट के मामले के बारे में पूरी जानकारी जुटाना था।
बता दें कि सितंबर में आंध्र प्रदेश के विश्व प्रसिद्ध तिरुपति बालाजी मंदिर में जो प्रसाद भक्तों को लड्डू के रूप में दिया जाता है, उसमें जानवरों की चर्बी और मछली तेल से बनाई जाने वाली घी का उपयोग करने की बात सामने आई थी। मिलावटी घी से बने प्रसाद के खुलासे ने पूरे देश के करोड़ों भक्तों की आस्था पर गहरी चोट पहुंचाई थी। इस बात के सामने आने के बाद से देशभर के साधु-संतों ने मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने की मांग शुरू की थी।
Input: IANS
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