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ग्रामीण विकास का नया मॉडल : योगी सरकार की योजनाओं से बदल रही गाँवों की तस्वीर, चुनौतियाँ बन रहीं अवसर

उत्तर प्रदेश के गांवों में योगी सरकार के सहयोग से स्थानीय चेंजमेकर चुनौतियों को अवसरों में बदल रहे हैं. अलीगढ़ में महिलाएं कचरे से जैविक उर्वरक बना रही हैं, और अमेठी में अनिता देवी बीसी सखी के रूप में ग्रामीणों को बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं. ये प्रयास सामुदायिक नेतृत्व और सरकारी समर्थन से ग्रामीण विकास को बढ़ावा दे रहे हैं.

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उत्तर प्रदेश के गांवों में एक शांत लेकिन शक्तिशाली बदलाव हो रहा है. स्थानीय चेंजमेकर आत्मविश्वास के साथ नेतृत्व की भूमिका निभा रहे हैं और रोजमर्रा की चुनौतियों को विकास के अवसर में बदल रहे हैं. खेती के नवाचार से लेकर वित्तीय समावेशन और स्वास्थ्य पहलों तक, ये साबित कर रहे हैं कि प्रगति तब सबसे अधिक चमकती है जब समुदायों को स्वयं नेतृत्व करने का अधिकार मिले.

टप्पल की महिला किसानों की क्रांति

अलीगढ़ के टप्पल ब्लॉक के भरतपुर गांव में कचरे को सोने में बदला जा रहा है. इसका श्रेय टप्पल समृद्धि महिला किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड को जाता है, जो 2022 में स्थापित महिला-प्रधान किसान उत्पादक संस्थान (एफपीओ) है. इसने 1,000 से अधिक महिला किसानों को एकजुट किया है और सिर्फ दो वर्षों में इसे ‘लाइटहाउस एफपीओ’ का दर्जा मिल गया.  

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सशक्तीकरण का मंच

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पंचायत की जमीन पर बनी जैव उर्वरक यूनिट इस परिवर्तन का केंद्र है. नीलम देवी के नेतृत्व में महिलाएं गाय के गोबर, रसोई के अवशेष, और फसल कचरे को आईआईटी कानपुर की नई तकनीक से जैविक उर्वरक में बदल रही हैं. इससे मिट्टी की गुणवत्ता बढ़ी, लागत घटी, और फसलें मजबूत हुईं. यह यूनिट केवल उत्पादन स्थल नहीं, बल्कि महिलाओं के लिए नेतृत्व और वित्तीय प्रबंधन का मंच भी है. पंचायत को लीज से आय होती है, और समुदाय, सरकार, और बाजार के सहयोग से यह मॉडल सतत खेती को लाभदायक बना रहा है.

चंदा शुक्ला की प्रेरणादायक यात्रा

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मीरजापुर की 33 वर्षीय चंदा शुक्ला ने ‘चलते-फिरते’ बदलाव की मिसाल पेश की. परिवार में आर्थिक चुनौतियों के बीच, प्रज्ञा देवी से प्रेरित होकर चंदा ने ई-रिक्शा उद्यम शुरू किया. डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स के समर्थन और प्रशिक्षण के साथ, उन्होंने ऋण लेकर पहला ई-रिक्शा खरीदा. चुनौतियों से आत्मविश्वास तकशुरुआत में सामाजिक पूर्वाग्रहों का सामना करने वाली चंदा ने धीरे-धीरे आत्मविश्वास हासिल किया. दो वर्षों में उन्होंने ऋण चुकाया और बच्चों की शिक्षा के लिए बचत शुरू की. चंदा ने 100 से अधिक महिलाओं को ड्राइविंग और सड़क सुरक्षा का प्रशिक्षण दिया और आर्या महिला समूह का नेतृत्व कर रही हैं. उनकी कहानी लखनऊ और दिल्ली तक पहुंची, जिससे बैंक और सरकारी एजेंसियां महिला उद्यमियों को समर्थन देने के लिए प्रेरित हुईं.

स्वास्थ्य जागरूकता :

हरदोई के बघराई गांव के 25 वर्षीय किसान हिमांशु यादव ने व्यक्तिगत स्वास्थ्य डर को समुदाय अभियान में बदला. एंटी-फाइलेरियल दवा के दुष्प्रभाव को समझने के बाद, उन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन अभियान में हिस्सा लिया. हिमांशु ने आशा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर ‘नाइट चौपाल’ के माध्यम से 130 से अधिक ग्रामीणों को दवा दी और उनके डर को दूर किया. उनकी जागरूकता और साहस ने सामूहिक कार्रवाई को प्रेरित किया, जिससे गांव में स्वास्थ्य के प्रति नया दृष्टिकोण विकसित हुआ. अमेठी के किसुनी गांव की 32 वर्षीय अनिता देवी ने गृहिणी से बीसी सखी बनने तक का सफर तय किया. 2022 में यूपीएसआरएलएम के समर्थन और भारतीय बैंकिंग एवं वित्त संस्थान से प्रशिक्षण के बाद, उन्होंने डोरस्टेप बैंकिंग शुरू की. 

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आर्थिक सशक्तीकरण का प्रभाव

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पहले महीने की 1,589 रुपये की आय से शुरू कर अनिता ने मेहनत से मासिक कमीशन को 25,000 रुपये तक पहुंचाया. उन्होंने 1,100 से अधिक ग्रामीणों को औपचारिक वित्तीय प्रणाली से जोड़ा और अपने व्यवसाय को 5 लाख रुपये तक विस्तारित किया. अब वह 80 प्रतिशत घरेलू आय में योगदान देती हैं, जिससे उनके बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं और पति स्थानीय बाजार में दुकान चला रहे हैं. ये कहानियां दर्शाती हैं कि योगी सरकार के सहयोग और स्थानीय नेतृत्व से ग्रामीण उत्तर प्रदेश में विकास की नई इबारत लिखी जा रही है.

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