Advertisement

Loading Ad...

युद्ध की आड़ में बड़ी साजिश! भारत में कट्टरपंथ फैलाने का IB ने किया खुलासा, कहा- AI के जरिए मुस्लिम युवाओं का किया जा रहा है ‘ब्रेन वॉश’

इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) ने युद्ध के बीच एक बड़ी चेतावनी जारी की है कि भारत में कट्टरपंथ फैलाने के लिए मुस्लिम युवाओं को भड़काने के लिए AI के माध्यम का इस्तेमाल किया जा रहा है.

Loading Ad...

ईरान और अमेरिका-इजरायल युद्ध को 6 दिनों से ज्यादा हो गया है. इस ऑपरेशन में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद से स्‍थ‍ित‍ि लगातार खराब होती जा रही है. ईरान ने जवाबी कार्रवाई के रूप में पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में अमेरिका और इजरायल के ठिकानों पर हमला किया. युद्ध की बढ़ती हलचल के बीच भारतीय एजेंसियों को चैनलों के माध्‍यम से भारत के युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने के संकेत म‍िले हैं. उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और केरल जैसे राज्यों में एक नए कट्टरपंथी अभियान को शुरू करने की कोशिश की चर्चा सामने आई है.

AI के जरिए युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी ने कहा कि कट्टरपंथी तत्व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए वीडियो तैयार कर रहे हैं और उन्हें प्रसारित कर रहे हैं. ये वीडियो कई भाषाओं में तैयार किए गए हैं.
उदाहरण के लिए, केरल के लिए वीडियो मलयालम में बनाए गए हैं, ताकि ये तत्व उस राज्य के युवाओं को लक्ष्‍य बना सकें. इसी तरह कश्मीर के युवाओं के लिए वीडियो कश्मीरी या कोशुर में हैं और यूपी के लिए ये हिंदी में हैं. इन भाषाओं के अलावा, एआई का इस्तेमाल उर्दू और दूसरी भारतीय भाषाओं में कंटेंट बनाने के लिए भी किया जा रहा है. यह इस बात का इशारा है कि कट्टरपंथी तत्व युद्ध का बहाना बनाकर अपनी पहुंच बढ़ाने की योजना बना रहे हैं.

Loading Ad...

मुस्लिम युवाओं को उकसाने की साजिश

Loading Ad...

एक अधिकारी ने कहा कि ये तत्व सिर्फ शिया मुसलमानों को ही नहीं, बल्‍क‍ि सुन्नी को भी न‍िशाना बना रहे हैं. अधिकारी ने आगे कहा कि इसका मकसद युवाओं को कट्टरपंथी बनाना और फिर उन्हें भारत में हमले करने के लिए उकसाना है. खामेनेई की मौत के बाद केंद्र ने एक एडवाइजरी जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि कट्टरपंथी तत्व प्रार्थना सभाओं और एकजुटता रैलियों में घुसपैठ करके युवाओं को भड़काने की कोशिश कर सकते हैं. 

कट्टरपंथी तत्व शिया-सुन्नी युवाओं को बना रहे निशाना

Loading Ad...

हैदराबाद, मुंबई, लखनऊ और दिल्ली में शिया समुदायों की ओर से शोक जुलूस निकाले जा चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में ऐसे और जुलूस न‍िकाले जा सकते हैं. कट्टरपंथी तत्व इन्‍हीं को अपना न‍िशाना बना सकते हैं. एआई से बनाए गए वीडियो के अलावा, एजेंसियां उन इन्फ्लुएंसर्स पर भी कड़ी निगरानी रख रही हैं जो ऑनलाइन धार्मिक और सांस्कृतिक चैनल चलाते हैं. ये लोग युवाओं को भड़काने के लिए अपने संदेशों में सूक्ष्म तरीके से उकसावे वाली बातें शामिल कर सकते हैं.

अल-कायदा और ISIS मुस्लिम युवाओं में फैला रहे भ्रम

एजेंसियों को पता चला है कि शिया नरसंहार और उम्मा (मुस्लिम समुदाय) पर हमले जैसे मुद्दों का इस्तेमाल लोगों को कट्टरपंथी बनाने के लिए किया जा सकता है. एक अन्य अधिकारी ने बताया कि इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) शिया के खिलाफ है, फिर भी वह इस स्थिति का फायदा उठाकर अपना एजेंडा आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा. अल-कायदा जैसे संगठन भी अक्सर वैश्विक मुद्दों का इस्तेमाल अपनी विचारधारा फैलाने के लिए करते रहे हैं. ये संगठन अमेरिका और इजरायल दोनों के इस्लाम विरोधी होने के एजेंडे को आगे बढ़ाएंगे. इंटेलिजेंस एजेंसियों को पता चला है कि इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा दोनों इस मुद्दे का इस्तेमाल भारत में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने के लिए करेंगे.

Loading Ad...

सोशल मीडिया पर प्लेटफॉर्म पर एजेंडा फैलाने की कोशिश

इसके अलावा एजेंसियों को पता चला है कि भारत में कट्टरपंथियों का एजेंडा फैलाने के लिए सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है. अधिकारियों का कहना है कि अभी मैसेजिंग बहुत बारीक है. इससे पता चलता है कि वे हालात की जांच कर रहे हैं. जैसे-जैसे युद्ध तेज होगा, मैसेज और तेज होगा और हिंसा में शामिल होने के लिए खुलेआम अपील की जाएगी. इसके साथ-साथ एजेंसियां इन मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए दी जा रही एन्क्रिप्टेड निर्देशों पर भी नजर रख रही हैं. वित्तीय लेन-देन की भी कड़ी निगरानी की जा रही है.

इनका उद्देश्य- घरेलू स्तर पर उग्रवाद फैलाना

Loading Ad...

यह भी पढ़ें

अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई समर्थित तत्व भी इस साजिश का हिस्सा हैं. आईएसआई का उद्देश्य किसी खास मुद्दे से नहीं बल्कि भारत को हजार घाव देकर कमजोर करने से है. इसलिए वह उन तत्वों का समर्थन कर सकता है जो ईरान के युद्ध को भारत में उग्रवाद फैलाने के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं. इसका लक्ष्य घरेलू स्तर पर उग्रवाद को बढ़ावा देना और स्वयं कट्टरपंथी बने युवाओं को लोन वुल्फ (एकल) हमलों के लिए प्रेरित करना है. खुफिया एजेंसियों के अनुसार, यह एक लंबी रणनीति है, और इसका उद्देश्य तुरंत हमला करना नहीं है. योजना यह है कि ईरान के मुद्दे का इस्तेमाल कर बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया जाए और फिर भविष्य में भारत में बड़े हमले किए जाएं.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...