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योगी सरकार की बड़ी पहल, UP के 67 हजार निजी स्कूलों में इन बच्चों का होगा फ्री एडमिशन
RTE: आरटीई योजना गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण अवसर है. भले ही इस बार आवेदन प्रक्रिया थोड़ी देर से शुरू हो रही हो, लेकिन इससे बच्चों के भविष्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा.
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UP Free Education: फ्री और अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत हर साल निजी स्कूलों में गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का मौका दिया जाता है. इस कानून के अनुसार निजी स्कूलों को अपनी कुल सीटों में से 25 प्रतिशत सीटें ऐसे बच्चों के लिए आरक्षित रखनी होती हैं. इसी क्रम में इस शैक्षणिक सत्र में भी प्री-प्राइमरी (नर्सरी/केजी) और कक्षा एक में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. हालांकि इस बार यह प्रक्रिया पिछले साल की तुलना में कुछ देर से शुरू होगी.
इस बार आवेदन में देरी क्यों हो रही है
पिछले शैक्षणिक सत्र में आरटीई के तहत आवेदन प्रक्रिया 1 दिसंबर से ही शुरू हो गई थी, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हो सका. बेसिक शिक्षा विभाग ने बताया है कि आरटीई के ऑनलाइन पोर्टल में तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं और कई नए अपडेट जोड़े जा रहे हैं. इन्हीं तकनीकी कारणों की वजह से आवेदन प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो पाई. नियमों के अनुसार, आरटीई के तहत दाखिले की प्रक्रिया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से कम से कम चार महीने पहले शुरू हो जानी चाहिए, लेकिन इस बार तकनीकी सुधारों के कारण इसमें देरी हो रही है.
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प्रदेश भर के निजी स्कूलों की स्थिति
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इस शैक्षणिक सत्र में पूरे प्रदेश से करीब 67 हजार निजी विद्यालयों को आरटीई पोर्टल पर जोड़ा गया है. इन सभी स्कूलों में कुल सीटों का 25 प्रतिशत हिस्सा आरटीई के तहत आरक्षित किया गया है. इसका मतलब है कि बड़ी संख्या में बच्चों को निजी स्कूलों में मुफ्त पढ़ाई का अवसर मिलेगा. यह योजना खास तौर पर उन बच्चों के लिए है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या समाज के वंचित वर्ग से आते हैं, ताकि वे भी अच्छी शिक्षा पा सकें.
आवेदन प्रक्रिया कैसे होगी
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आरटीई के तहत आवेदन की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी. इसमें दो चरणों में सत्यापन किया जाएगा. पहले चरण में बच्चे के आवेदन और दस्तावेजों की जांच खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) द्वारा की जाएगी. इसके बाद दूसरे चरण में बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) आवेदन का अंतिम सत्यापन करेंगे. इसके साथ ही आवेदन के समय जो भी प्रमाणपत्र लगाए जाएंगे, उनका संबंधित विभागों से ऑनलाइन सत्यापन कराया जाएगा. अगर किसी भी प्रमाणपत्र की पुष्टि नहीं हो पाती है, तो आवेदन सीधे निरस्त कर दिया जाएगा.
अभिभावकों के लिए जरूरी सलाह
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी अभिभावकों को साफ तौर पर सलाह दी है कि वे आवेदन करते समय सही, सच्चे और वैध प्रमाणपत्र ही अपलोड करें. किसी भी तरह की गलत जानकारी, अधूरे दस्तावेज या फर्जी प्रमाणपत्र देने पर बच्चे का आरटीई के तहत दाखिला रद्द किया जा सकता है. इसलिए अभिभावकों को चाहिए कि वे आवेदन करने से पहले सभी जरूरी कागजात अच्छे से जांच लें और पूरी सावधानी के साथ फॉर्म भरें. सही जानकारी देने से ही बच्चे को आरटीई योजना का पूरा लाभ मिल सकेगा.
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आरटीई योजना गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण अवसर है. भले ही इस बार आवेदन प्रक्रिया थोड़ी देर से शुरू हो रही हो, लेकिन इससे बच्चों के भविष्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा. सही समय पर आवेदन करके और सही दस्तावेज लगाकर अभिभावक अपने बच्चों को बेहतर और मुफ्त शिक्षा दिला सकते हैं.