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'हम योगी-मोदी सरकार के आभारी...', बुंदेलखंड में 'हर घर नल' से बहती उम्मीद की धारा, महिलाओं को अब पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता

UP: हैंडपंप पर लंबी लाइनें लगाना और कई बार भूख और गरीबी का सामना करना बुंदेलखंड के लोगों की पहचान बन गया था. लेकिन अब यह सब अतीत की बातें बन चुकी हैं. अब सड़कों पर दूर से दिखाई देने वाली पानी की टंकियां उम्मीद की नई किरण बन गई हैं.

Image Source: Social Media
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Har Ghar Nal Yojana: बुंदेलखंड के लोगों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं कि अब उन्हें अपने घर में ही साफ पानी मिल रहा है. इस क्षेत्र में वर्षों तक पानी की कमी ने लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया. सिर पर घड़ा रखकर दूर-दराज से पानी लाना, हैंडपंप पर लंबी लाइनें लगाना और कई बार भूख और गरीबी का सामना करना बुंदेलखंड के लोगों की पहचान बन गया था. लेकिन अब यह सब अतीत की बातें बन चुकी हैं. अब सड़कों पर दूर से दिखाई देने वाली पानी की टंकियां उम्मीद की नई किरण बन गई हैं.

महोबा में जल जीवन मिशन की सफलता

महोबा जिले में लंबे समय तक लोगों ने पानी की कमी से परेशान दिन बिताए. कभी यहां वाटर ट्रेन से पानी लाना पड़ता था. लोग घड़ा भर पानी के लिए कई किलोमीटर दूर भटकते थे. लेकिन अब जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं से एक लाख 12 हजार से अधिक घरों को पाइपलाइन से कनेक्टिविटी दी जा चुकी है.
हालांकि इसके लिए 1131 किलोमीटर सड़कों को खोदा गया और कुछ जगहों पर लोगों को असुविधा का सामना करना पड़ा. महोबा के अरशद बताते हैं कि “कोई योजना शुरू होने पर थोड़ी परेशानी तो होती है, लेकिन अब हर घर में नल का होना एक बहुत बड़ी उम्मीद ह.

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चित्रकूट में सिलौटा योजना का असर

चित्रकूट जिले में सिलौटा ग्राम मुस्तकिल समूह योजना से पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर विकासखंड के करीब सवा लाख लोगों की पानी की समस्या खत्म हो गई है. कभी लोग लगभग एक किलोमीटर दूर से पानी लाते थे. इस समस्या की वजह से कई परिवार बेटियों की शादी करने में भी हिचकते थे.
योजना के तहत पूरे क्षेत्र में 576 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाई जानी थी, जिसमें 572 किलोमीटर पूरी हो चुकी है. 17 ओवरहेड टैंक हैं, जहां यमुना नदी से पानी लाकर ट्रीटमेंट प्लांट के बाद घरों तक पहुंचाया जा रहा है. ग्राम प्रधान श्रीमती रज्जन देवी कहती हैं, “हम योगी-मोदी सरकार के बहुत आभारी हैं कि हमारे बच्चों को बीमारियों से बचाने का इंतजाम किया गया. अब हमारे बच्चे स्वच्छ पानी पीकर स्कूल जाते हैं.”

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रैपुरा और चांदी बांगर में जल जीवन मिशन

चित्रकूट के अलावा रैपुरा और चांदी बांगर ग्राम समूह पेयजल योजनाएं भी काम कर रही हैं. रैपुरा योजना के तहत 19,570 परिवारों को नल से पानी उपलब्ध कराया गया. आच्छादित मदना गांव के निवासी चुनबाद यादव बताते हैं कि पहले पानी का इंतजाम मुश्किल था, लेकिन अब घर के नल से पानी मिल रहा है, जिससे उनकी जिंदगी आसान हो गई है.लोगों के लिए यह सिर्फ एक नल नहीं, बल्कि बुंदेलखंड के लिए वास्तविक वरदान है.

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झांसी और बंगरा में पानी की सुविधा

झांसी के बड़ागांव, चिरगांव और बंगरा के अंतिम छोर तक जल जीवन मिशन की पाइपलाइन पहुंच चुकी है. बंगरा ब्लॉक की ग्राम पंचायत पचवारा की बहू रागिनी बताती हैं कि पहले उन्हें सरकारी हैंडपंप से पानी लेना पड़ता था. अब वे घर के नल से पानी लेती हैं और इसके लिए किसी को मजदूरी देने की जरूरत नहीं पड़ती.
ग्राम पंचायत प्रधान अखिलेश रावत बताते हैं कि उनके गांव में एक हजार नल कनेक्शन किए जा चुके हैं. दलित बाहुल्य गांवों में आरोग्य मंदिरों और सरकारी स्कूलों में भी स्वच्छ पानी की सुविधा मिल रही है.


बांदा और हमीरपुर में परियोजनाओं का प्रभाव

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बांदा जिले में पहले पानी की कमी और सूखे की समस्या आम थी. अब अमलीकौर और खटान पेयजल परियोजनाओं से 544 गांवों में पानी पहुंच चुका है. 82,266 घरों में पाइपलाइन कनेक्शन दिए गए हैं. हमीरपुर जिले में भी दो पेयजल परियोजनाओं के तहत 322 में से 320 गांवों में घरों तक नल से पानी उपलब्ध कराया गया है. यहां के लोग बताते हैं कि यह योजना उनके जीवन में बदलाव और राहत लेकर आई है.

बुंदेलखंड में जल जीवन मिशन का महत्व

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बुंदेलखंड के लिए जल जीवन मिशन सिर्फ पानी की सुविधा नहीं, बल्कि संकल्प की सफलता है. वर्षों से पानी के लिए परेशान लोग अब अपने घरों में साफ पानी पी रहे हैं. यह योजना स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर में सुधार का नया अध्याय लिख रही है.

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