Advertisement
बनारस की झलक अब वेस्ट यूपी में! 177 करोड़ से सजेंगे यमुना के 8 घाट, 600 मीटर रिवर फ्रंट से बढ़ेगा पर्यटन
UP: ये घाट अब आधुनिक सुविधाओं और बेहतर सुरक्षा के साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए और अधिक आकर्षक बनेंगे. यमुना घाटों का यह विकास न केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए बल्कि वृंदावन के सांस्कृतिक और पर्यटकीय महत्व को भी बढ़ाएगा.
Advertisement
Yamuna Ghats will be Renovated: वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर से केशीघाट तक फैले यमुना घाटों का लंबे समय से इंतजार अब खत्म होने जा रहा है. करीब 10 सालों से रुकी हुई यह परियोजना अब सक्रिय हो गई है. गुरुवार को सिंचाई विभाग और कार्यदायी संस्था के अधिकारी निरीक्षण के लिए पहुंचे. इस परियोजना के तहत केशीघाट से लेकर बांकेबिहारी मंदिर तक लगभग 600 मीटर लंबाई में आठ घाटों का विकास, नवीनीकरण और सुंदरीकरण किया जाएगा. इस पूरे कार्य की लागत 177.81 करोड़ रुपये आंकी गई है.
रिवर फ्रंट योजना की शुरुआत और अड़चनें
यमुना घाटों के विकास के लिए 2014 में रिवर फ्रंट कार्ययोजना बनाई गई थी. इस योजना का उद्देश्य घाटों को सुरक्षित बनाना, मिट्टी कटान रोकना और पानी के बहाव को नियंत्रित करना था. इसके लिए तीन-चार फीट ऊंची सीमेंटेड दीवार बनाई गई और अंडरग्राउंड पाइप डाले गए. लेकिन इस परियोजना में एक बड़ी अड़चन तब आई जब वृंदावन के सामाजिक कार्यकर्ता मधुमंगल शुक्ला ने 2016 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की. उनका तर्क था कि नालों का प्रदूषित जल सीधे यमुना में जा रहा है और रिवर फ्रंट योजना में इसका कोई प्रबंध नहीं किया गया है. इस याचिका के चलते परियोजना पर रोक लग गई.
Advertisement
UP Police Constable Recruitment: 32 हजार कांस्टेबल पदों पर भर्तियां, उम्र में छूट का नोटिफिकेशन जारी
Advertisement
बाद में जलनिगम ने नालों की टैपिंग कराई. मथुरा-वृंदावन में कुल 23 नालों में से 19 की टैपिंग पूरी हो चुकी है और शेष नालों की टैपिंग अंतिम चरण में है. अगस्त 2024 में हाई कोर्ट ने रिवर फ्रंट निर्माण पर लगी रोक हटा दी, जिसके बाद शासन ने परियोजना को फिर से शुरू करने की अनुमति दी.
राष्ट्रीय गंगा मिशन की एनओसी के बाद काम की पुनरारंभ
Advertisement
हाईकोर्ट की अनुमति के बावजूद परियोजना में दो साल और देरी हुई, क्योंकि राष्ट्रीय गंगा मिशन से एनओसी प्राप्त करना लंबित था. एनओसी मिलने के बाद ही परियोजना को दोबारा शुरू किया जा सका. गुरुवार को सिंचाई विभाग के एक्सईएन नवीन कुमार और एई राकेश कुमार ने वृंदावन के यमुना किनारों का निरीक्षण किया.परियोजना का कार्य यूपीपीसीएल, यूनिट-32 करेगी और इसे जून 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
घाटों का कायाकल्प और सुविधाएं
परियोजना के तहत चयनित घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बैठने के लिए बेंच आदि लगाई जाएंगी. केशीघाट इस परियोजना का केंद्र बिंदु रहेगा. यहाँ करीब 125 मीटर चौड़ाई वाले घाट पर प्रतिदिन आरती, स्नान और अन्य धार्मिक गतिविधियां आयोजित होंगी.
Advertisement
अन्य घाटों की जगह अपेक्षाकृत कम है, लेकिन उपलब्ध स्थान के अनुसार वहां भी नवीनीकरण और सुंदरीकरण कार्य किए जाएंगे. इसके अलावा, रिवर फ्रंट के समीप वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था की जाएगी और इसके लिए उपयुक्त स्थानों की खोज की जा रही है.
इन घाटों का होगा विकास
परियोजना में शामिल घाटों की सूची इस प्रकार है:
Advertisement
यह भी पढ़ें
केशीघाट, जुगल घाट, गोविंद घाट, भ्रमर घाट, वराह घाट, विहार घाट, रानापत घाट और चीर घाट.
ये घाट अब आधुनिक सुविधाओं और बेहतर सुरक्षा के साथ पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए और अधिक आकर्षक बनेंगे. यमुना घाटों का यह विकास न केवल धार्मिक गतिविधियों के लिए बल्कि वृंदावन के सांस्कृतिक और पर्यटकीय महत्व को भी बढ़ाएगा.