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100 की रफ्तार से दौड़ती Train से गिरी बच्ची, फिर देखिये क्या हुआ ?

Madhya Pradesh से एक परिवार ट्रेन से यूपी के जिला मथुरा लौट रहा था तभी अचानक सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन में बैठी मासूम बच्ची के साथ एक ऐसा हादसा हो गया जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी

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रेन में सफर के दौरान कभी-कभी छोटी सी लापरवाही कितनी खतरनाक हो सकती है, ये इसी बात से समझा जा सकता है कि कुछ ही दिनों पहले मध्य प्रदेश से एक परिवार ट्रेन से यूपी के जिला मथुरा लौट रहा था। तभी अचानक सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही ट्रेन में बैठी मासूम बच्ची के साथ एक ऐसा हादसा हो गया, जिसे सुनकर आपकी रूह कांप जाएगी।दरअसल, मथुरा जिले के रहने वाले अरविंद तिवारी अपनी पत्नी अंजलि, आठ साल की बेटी गौरी और पांच साल के बेटे मृदुल के साथ मध्य प्रदेश के जिला टीकमगढ़ में अपने पैतृक गांव में नवरात्रि मनाने गए थे। अष्टमी की पूजा करके पूरा परिवार 11 अक्टूबर को गीता जयंती ट्रेन से वापस मथुरा लौट रहा था। इसी दौरान मध्य प्रदेश के ललितपुर रेलवे स्टेशन से सात-आठ किलोमीटर दूर एक ऐसा हादसा हो गया, जिसे सुनकर आपकी भी रूह कांप जाएगी।

ट्रेन में यात्रा के दौरान हुआ खतरनाक हादसा

आधी रात के वक्त जब ट्रेन सौ किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ रही थी, उसी वक्त दो बच्चे इमरजेंसी विंडो के पास खेल रहे थे। खेलते-खेलते आठ साल की बच्ची गौरी ट्रेन की विंडो से नीचे गिर गई, और ट्रेन अपनी रफ्तार से दौड़ती रही। जब बच्ची के परिवार को हादसे के बारे में पता चला, तब तक ट्रेन काफी आगे निकल चुकी थी। हालांकि, तुरंत बच्ची के पिता ने चेन पुलिंग करके ट्रेन रोकी और बच्ची के गिरने की खबर जीआरपी वालों को दी। जीआरपी ललितपुर थाना प्रभारी ने 16-17 किलोमीटर के रेल ट्रैक पर गौरी की तलाश के लिए तुरंत चार टीमें बनाई। वहीं, जहां ट्रेन रुकी थी, उधर से जीआरपी भी परिवार के साथ बच्ची को ढूंढ़ते हुए आ रही थी। तब काफी दूर बच्ची ट्रैक के किनारे झाड़ियों में रोती हुई मिली। तब जाकर परिवार और पुलिस वालों ने राहत की सांस ली। बच्ची के हाथ और पैर में चोट लगी हुई थी, जिसे तुरंत ललितपुर रेलवे स्टेशन ले जाया गया। वहां उसका प्राथमिक उपचार किया गया और फिर तुरंत जिला अस्पताल भेजा गया।

इस हादसे के बारे में बच्ची के पिता ने बताया:उनका रिजर्वेशन S3 कोच में था। रात करीब 10 बजे परिवार ने खाना खाया। गौरी और मृदुल इमरजेंसी खिड़की के पास बैठे खेल रहे थे। इस बीच, उन्होंने बेटे मृदुल को S3 कोच में ही दूसरी सीट पर पत्नी के पास छोड़ने गए। वापस अपनी सीट पर आए तो बेटी वहां नहीं थी। उन्होंने पूरी ट्रेन में बेटी की तलाश की पर वो नहीं मिली। तभी अचानक उनकी नजर इमरजेंसी विंडो पर गई, तो खिड़की खुली हुई थी। अरविंद ने चेन पुलिंग कर ट्रेन को जंगल में ही रोक दिया और बच्ची की खोजबीन की गई तो वो झाड़ी में घायल हालत में मिली।

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वहीं, मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हादसे की शिकार बच्ची गौरी ने भी इस हादसे के बारे में बताया:मैं ट्रेन की खिड़की के पास बैठी थी, भाई के साथ खेल रही थी। ट्रेन की खिड़की खुली हुई थी, तभी अचानक मोड़ आया और तेज हवा से खिड़की से बाहर गिर गई। मेरे पैर में चोट थी, इस वजह से खड़ी नहीं हो सकी। झाड़ी में करीब 2 घंटे तक पड़ी रोती रही। अंधेरा होने से डर भी लग रहा था। बाद में मम्मी-पापा और सब लोग आ गए।

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वो कहते हैं "जाखो राखे साइंया, मार सके ना कोय।" शायद यही वजह है कि सौ की रफ्तार से दौड़ती ट्रेन से गिरने के बावजूद बच्ची परिवार को सही सलामत मिल गई। हल्की सी चोटें आई हैं, जिसका इलाज करवाकर पुलिस ने परिवार समेत बच्ची को मथुरा के लिए रवाना भी कर दिया। जीआरपी और पुलिस ने जिस तरह से कार्रवाई की, उसके लिए बच्ची के पिता ने भी दिल से आभार जताया।

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चलती ट्रेन के दौरान इमरजेंसी विंडो से गिरी इस मासूम बच्ची की जान तो बच गई, लेकिन आप भी जब कभी ट्रेन से यात्रा करें तो इस बात का जरूर ख्याल रखें कि इमरजेंसी विंडो पूरी तरह से बंद हो। और बच्चों को विंडो के पास बैठाएं तो आप भी उनके साथ जरूर रहें, जिससे आपके साथ कभी इस तरह का कोई हादसा न हो। इसलिये सुरक्षित और स्वस्थ रहें।

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